भारत, रूस सशस्त्र बलों के लिए लॉजिस्टिक सहयोग बढ़ाएंगे

By Independent Mail | Last Updated: Sep 5 2019 12:01PM
भारत, रूस सशस्त्र बलों के लिए लॉजिस्टिक सहयोग बढ़ाएंगे

व्लादिवोस्तोक (रूस), एजेंसी:  भारत और रूस ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने की नीति के तहत अपने सैन्य बलों के लिए पारस्परिक लॉजिस्टिक सहयोग बढ़ाने के लिए संस्थागत प्रबंधन के निर्माण की दिशा में काम करने का निर्णय लिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बुधवार को यहां हुई विस्तृत वार्ता के बाद एक संयुक्त बयान में सेना और सैन्य-प्रौद्योगिकी क्षेत्रों को विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त साझेदारी का स्तंभ बताया गया। बयान में कहा गया कि दोनों पक्ष सैन्य उपकरणों के उत्पादन और सहयोगात्मक विकास पर तथा दोनों देशों के सैन्य बलों के नियमित संयुक्त अभ्यास पर सहमत हुए हैं।
बुधवार को यहां दो-दिवसीय दौरे पर पहुंचे मोदी ने पुतिन के साथ विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग और आपसी हितों के अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों के सभी पहलुओं पर बात की।
संयुक्त बयान में कहा गया, "दोनों पक्षों ने अपने सैन्य बलों के नियमित सैन्य संपर्को और संयुक्त अभ्यास पर संतुष्टि जताई। उन्होंने 2011-2020 तक चलने वाले सैन्य और तकनीकी सहयोग के लिए दीर्घकालिक कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन का स्वागत किया। उन्होंने इस क्षेत्र में संवाद की नई दीर्घकालिक योजना को गति देने पर भी सहमति जताई।"
बयान में कहा गया, "दोनों पक्षों ने अपने सैन्य बलों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने की इच्छा जताई और सैन्य बलों के लिए सैन्य तंत्र और सेवाओं के परस्पर सहयोग के लिए संस्थागत प्रबंधन की जरूरत को स्वीकार किया। दोनों पक्षों ने साथ ही सैन्य-तंत्र सम्बंधित सहयोग का ढांचा तैयार करने पर सहमति जताई।"
मोदी और पुतिन ने सैन्य राजनीतिक वार्ताओं, संयुक्त सैन्य अभ्यासों, अधिकारियों की वार्ताओं, एक-दूसरे के सैन्य संस्थानों में प्रशिक्षणों और सहयोग के अन्य आपसी क्षेत्रों के माध्यम से दोनों देशों की सेनाओं में परस्पर सहयोग बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने कहा कि दूसरी 'जॉइंट ट्राई-सर्विसेज एक्सरसाइज इंद्र-2019' इस साल भारत में आयोजित होगी।
बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने सैन्य उपकरणों, अंगों और कलपुर्जो का विकास और उत्पादन कर, आफ्टर-सेल्स सर्विस तंत्र को बेहतर कर और दोनों देशों के सैन्य बलों के बीच नियमित संयुक्त अभ्यासों को जारी रखते हुए रक्षा सहयोग को बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।
बयान में कहा गया, "दोनों पक्ष रूस में निर्मित हथियारों और रक्षा उपकरणों को तकनीक के आदान-प्रदान और संयुक्त उपक्रम स्थापित कर भारत में 'मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के अंतर्गत सैन्य उपकरणों और कलपुर्जो का संयुक्त रूप से उत्पादन करने के कार्यक्रम को बढ़ावा देने पर सहमति हुए।"
संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत-रूस संबंधों ने वर्तमान विश्व की अशांत वास्तविकताओं से सफलतापूर्वक मुकाबला किया है और इस पर ना कभी बाहरी प्रभाव पड़ा है और ना पड़ेगा।
बयान में कहा गया कि भारत-रूस संबंधों का संपूर्ण रूप से विकास दोनों देशों की विदेश नीति की प्राथमिकता है।
दोनों पक्षों ने वैश्विक मामलों में संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय समन्वयकारी भूमिका समेत बहुराष्ट्रवाद को मजबूती देने की महत्ता पर भी जोर दिया।
दोनों पक्षों ने इस समय विश्व की वर्तमान वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने और अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के मुद्दों से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को ज्यादा प्रभावी और समर्थ बनाने के लिए इसमें सुधार का आवाह्न किया।
बयान में कहा गया कि रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता की वकालत करना जारी रखेगा।
 
 
 
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