हिंदी को तरजीह देने वाला पहला अरब देश बना संयुक्त अरब अमीरात

By Independent Mail | Last Updated: Feb 10 2019 10:26PM
हिंदी को तरजीह देने वाला पहला अरब देश बना संयुक्त अरब अमीरात

अबूधावी में हिंदी बनी अदालत की तीसरी भाषा

एजेंसी, दुबई। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक अमीरात (देश) अबूधाबी में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। यहां के राजा युसूफ सईद अल अब्री ने हिंदी को तीसरी अदालती भाषा का दर्जा दे दिया है। अब यहां की अदालतें अरबी और अंग्रेजी के साथ ही साथ हिंदी में भी काम करेंगी। उन मुकदमों की सुनवाई खास तौर पर हिंदी में होगी, जिनका एक पक्षकार हिंदी या भारतीय उपमहाद्वीप यानी भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, अफगानिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार, मालदीव और भूटान की भाषाओं को बोलने वाला होगा। विदेशियों की न्याय तक पहुंच बढ़ाने के लिए ही हिंदी को अदालतों की आधिकारिक भाषा बनाया गया है। अबूधाबी के न्याय विभाग (एडीजेडी) ने कहा कि उसने श्रम मामलों में अरबी और अंग्रेजी के साथ हिंदी भाषा को शामिल करके अदालतों के समक्ष भाषा के माध्यम का विस्तार कर दिया है। इसका मकसद हिंदी भाषी लोगों को मुकदमे की प्रक्रिया, उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में सीखने में मदद करना है। दूसरी ओर राजमहल के प्रवक्ता ने कहा कि अबूधाबी के बाद जल्द ही आम सहमति बनाकर यूएई के सातों देशों में हिंदी को आधिकारिक न्यायिक भाषा बना दिया जाएगा।

यूएई में 26 लाख भारतीय

यूएई में भारतीयों की तादाद 26 लाख है। इनकी सबसे ज्यादा आबादी दुबई और अबूधाबी में है। इसमें अगर भारत के पड़ोसी देशों की आबादी को भी जोड़ दिया जाए, तो यह संख्या 32 लाख हो जाती है। यह आबादी संयुक्त अरब अमीरात की कुल आबादी का 30 फीसद है। वहां की राजशाही इन लोगों की कानूनी अड़चनों को दूर करने की कोशिश कर रही है।

सुषमा स्वराज ने किया स्वागत

अबूधाबी के राजा के इस फैसले का भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि दुनिया भारत और हिंदी की ताकत को अब नकार नहीं सकती। बता दें कि दुनिया के कई और देशों में भी हिंदी को तवज्जो दी जाती है। करीब 70 देशों ने अपने यहां की उच्च शिक्षा में हिंदी की पढ़ाई की व्यवस्था कर रखी है। जर्मनी जैसे देशों में हिंदी की पत्र-पत्रिकाएं प्रकाशित होती हैं, लेकिन हिंदी को राजकीय कामकाज की भाषा का दर्जा केवल मॉरीशस में ही दिया गया है। अब अबूधाबी ऐसा दूसरा देश बन गया है, जहां का न्यायिक कार्य हिंदी में होगा।

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