क्या आजादी के 71 सालों बाद बदली है औरतों की जिंदगी?

By Independent Mail | Last Updated: Aug 19 2018 12:17AM
क्या आजादी के 71 सालों बाद बदली है औरतों की जिंदगी?

आज हम आजादी की 72वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। इस खास दिन हर कोई किसी न किसी तरीके से जश्न मना रहा है। आज के दिन उन लोगों को याद किया जाता है, जिन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए आजादी की लड़ाई लड़ी। वहीं, आज के दिन देश की तरक्की और उन्नति के बारे में भी बात होती है जिसमें औरतों की स्थिति में आए बदलाव की भी चर्चा होती है।

पहले से बेहतर है स्थिति

पहले के मुकाबले अब लोग की सोच में बहुत बदलाव आ चुका है। जहां कभी औरतों को घर की चारदीवारी में ही रखा जाता था। वहीं, आज हर क्षेत्र में औरतें अपनी भागीदारी स्थापित कर रही हैं। राजनीति, विज्ञान, डॉक्टर, इंजीनियर, सेना, पुलिस, खेलों के अलावा शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जहां महिलाएं काम न कर रही हो। काम करने के साथ-साथ वह अपनी सोच और काबलियत से दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनती जा रही हैं।

बदल रहा है लोगों का नजरिया

लोगों को अब पढ़ाई का महत्व पता लग रहा है। लड़कियों को हायर एजुकेशन दी जा रही है ताकि वे भी अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। भारत में औरतों की स्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रही। पहले के मुकाबले उन्हे अधिकार भी दिए गए हैं, जिनका इस्तेमाल करके वे अपने पर हो रहे अत्याचारों को रोक सकती है। इसके अलावा लड़कियों की इच्छाओं और करियर पर भी ध्यान दिया जाने लगा है। सरकार और एनजीओ की तरफ से भी समय-समय पर महिलाओं की मदद की जा रही है। वहीं, लोग इस जरूरत को समझ रहे हैं कि अगर एक औरत शिक्षित होगी तो कुल शिक्षित होगा।

अभी भी कुछ बदलाव आने जरूरी

आज आजादी के 71 साल बीत जाने के बाद भी कहीं न कहीं कुछ बदलाव आने जरूरी हैं जिसमें सबसे जरूरी है लोगों की सोच, यहां पर पिछड़े इलाकों की बात की जा रही है। जिसमें महिलाओं की स्थिति या उनके बारे में सोच को लेकर कुछ खास बदलाव नहीं आया। पढ़ाई के मामले में स्थितियां बदल रही हैं लेकिन कुछ पिछड़े इलाकों में लड़कियां आज भी बहुत पीछे हैं।

1.बाल मजदूरी भी अहम मुद्दा है। जिस पर बात तो होती है लेकिन बदलाव आने में अभी बहुत समय बाकी है। छोटे-छोटे बच्चे गरीबी की वजह से काम करना शुरू कर देते हैं ताकि उन्हें रोटी मिल सके।

2.अधिकारों को लेकर महिलाओं में जागरूकता फेलाना अभी भी बाकी है। घरेलू हिंसा आज भी बहुत औरतें सहन कर रही हैं। जबकि वे अपने हक के लिए लड़ने से कतराती हैं। आजाद भारत में उन्हें भी खुल कर जीने का हक है।

3.महिलाएं इस बात को लेकर भी जागरूक होनी चाहिए की उनकी काबलियत ही उनकी पहचान है। इसके लिए किसी पर निर्भर होने की बजाए खुद कोशिश करनी बहुत जरूरी है।

4.आज के मॉडर्न जमाने में औरतों के कामकाजी होने में कोई बुराई नहीं है। इससे घर की आर्थिक स्थिति तो बेहतर होती ही है,साथ ही समाज की सोच को बदलने की तरफ भी यह अहम कदम है।

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