जबलपुर शहर की बेटी प्रिया बनीं लेफ्टिनेंट, सभी ने किया सेल्यूट

By Independent Mail | Last Updated: Mar 13 2018 7:37PM
जबलपुर शहर की बेटी प्रिया बनीं लेफ्टिनेंट, सभी ने किया सेल्यूट

इंडिपेंडेंट, मेल, जबलपुर (मप्र)। अपने आर्मी मैन पिता के साथ जब भी वह 506 आर्मी बेस वर्कशॉप जातीं, वहां कई आर्मी लेडी ऑफिसर को देखतीं। इन लेडी ऑफिसर को देखकर वह भी मन ही मन आर्मी ऑफिसर बनने का सपना संजो बैठीं और उसका यह ख्वाब पूरा हो भी गया। कठिन परिश्रम और टफ ट्रेनिंग से गुजरने के बाद शहर की बेटी प्रिया कश्यप लेफ्टिनेंट बनकर शहर लौटीं। तकरीबन 11 माह की ट्रेनिंग चेन्नई में लेने के बाद अपने शहर पहुंची प्रिया का परिवारजनों और मित्रों ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। तीन बार एसएसबी (सर्विस सलेक्शन बोर्ड) देने के बाद प्रिया को यह सफलता हाथ लगी है।

लेडी आर्मी ऑफिसर को देख तय किया लक्ष्य

प्रिया ने बताया कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने यह लक्ष्य बना लिया था कि आर्मी ऑफिसर बनना है। पिता यशपाल कश्यप 506 आर्मी बेस वर्कशॉप में सिविल स्टाफ हैं। कई बार वहां जाना हुआ और वहां प्रिया ने कई आर्मी लेडी ऑफिसर को देखा। बस यहीं से प्रिया ने भी सोच लिया कि आगे की मंजिल भले ही कठिन हो, लेकिन वह आर्मी ऑफिसर बनकर ही दम लेंगी। बस फिर क्या था, उन्होंने अपना जनरल नॉलेज स्ट्रॉन्ग किया और तैयारी में जुट गईं।

तीसरे प्रयास में मिली सफलता

प्रिया ने जीईसी से पढ़ाई के बाद एसएसबी की तैयारी की। पहले अटैम्प्ट में वे कॉन्फ्रेंस में आउट हुईं, दूसरे अटैम्प्ट में वे मेरिट से आउट हो गई थीं। दो विफलताओं के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरी बार में उन्होंने एसएसबी के हर पड़ाव पार किए और मेरिट में स्थान हासिल करने में सफल रहीं। 

लाइफ तो बस यही है, बाकी कुछ नहीं

प्रिया ने बताया कि अक्सर विफलता व्यक्ति को तोड़ देती है और राह बदलने को मजबूर कर देती है, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। एसएसबी के दौरान उन्होंने यह अनुभव किया कि असल जिंदगी तो यही है। वे इसे पाकर ही रहेंगी और आखिर में सफलता मिल ही गई। प्रिया का कहना है कि इस सफलता के असली हकदार उनके पिता यशपाल हैं।

ये बेटियां बनीं मिसाल

प्रिया ऐसी अकेली आर्मी लेडी ऑफिसर नहीं हैं। इससे पहले भी बेटियों ने परचम फहराया है। इससे पहले भी कई गर्ल्स आर्मी, नेवी और एयरफोर्स जॉइन कर कर चुकी हैं। संस्कारधानी की अनेक बेटियां डिफेंस जॉइन कर देशसेवा में कंधे से कंधा मिला रही हैं। नेवी, एनसीसी से पासआउट प्रेरणा चौहान आर्मी में ऑफिसर बन चुकी हैं। आर्मी एनसीसी से पासआउट अंजनी मिश्रा एयर फोर्स में ऑफिसर हैं। आयुषी रजक नाम की एक बेटी पिछले वर्ष नेवी में सब-लेफ्टिनेंट बनी थी।

एनसीसी बनी सीढ़ी

सेना में जाने की ललक ऐसी बढ़ रही है कि अनेक लड़कियां इसके लिए बाकायदा ट्रेनिंग ले रही हैं। एनसीसी कैडेट्स में खासतौर पर यह जज्बा दिख रहा है। आर्मी ऑफिसर बनने के लिए वे पहली सीढ़ी के तौर पर एनसीसी जॉइन करती हैं और यहां भी अपना हुनर संवार रही हैं। एनसीसी में शहर की अनेक कैडेट्स देशभर में उपलब्धियां हासिल कर चुकी हें। कैडेट आयुषी चौधरी भी इनमें से एक है। वह हाल ही में राजपथ पर परेड करके लौटी हैं। आयुषी कहती हैं कि, मेरा सपना है कि आर्मी ऑफिसर बनूं। ऐसे में अभी जनरल नॉलेज और इंग्लिश स्ट्रॉन्ग कर रही हूं। इसके बाद अहमदाबाद जाकर कोचिंग जॉइन करूंगी।

ले रहीं गाइडेंस

कुछ इसी तरह की बात तमन्ना सिंह ठाकुर भी कहती हैं। वे बताती हैं, मैंने एसएसबी की तैयारी शुरू कर दी है। कॉलेज एग्जाम खत्म होने के बाद एसएसबी के लिए रेगुलर क्लास जॉइन करूंगी। मुझे ऑफिसर बनना है और उसके लिए अपने इंस्ट्रक्टर से भी गाइडेंस लूंगी।

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