एंड्रॉयड फोन पर हैकिंग का खतरा

By Independent Mail | Last Updated: Jul 10 2018 11:59PM
एंड्रॉयड फोन पर हैकिंग का खतरा

दुनिया भर के करीब सौ करोड़ एंड्रॉयड फोन पर एक एमएमएस को लेकर खतरा मंडरा रहा है। अगर आपके फोन पर हैकर्स से ऐसा कोई एमएमएस आ गया तो आपके फोन की सारी जानकारी पर हैकर का कंट्रोल हो सकता है। खतरनाक बात है कि आपको इस बारे में पता भी नहीं चलेगा। फोन कंपनियों को गूगल ने इस बारे में जानकारी दे दी है, और उन्होंने अपनी तरफ से ग्राहकों के लिए सॉफ्टवेयर पैच भी जारी कर दिया है, लेकिन अभी तक ये साफ नहीं है कि किस-किस फोन के लिए ये सॉफ्टवेयर पैच दिए गए हैं।

किन-किन फोन पर है खतरा?

सभी एंड्रॉयड फोन जो 2.2 या उससे ऊपर के वर्जन के आॅपरेटिंग सिस्टम पर काम करते हैं वो इस एमएमएस का शिकार हो सकते हैं। एंड्रॉयड के स्टेजफ्राइट नाम के मल्टीमीडिया सिस्टम में अगर कोई हैकर वायरस के साथ एक एमएमएस वीडियो भेज सकता है जिसके भी पास ये मैसेज आएगा उसको बिलकुल पता नहीं चलेगा कि क्या हुआ है। वो मैसेज नहीं भी देखेगा तो भी वायरस अपना काम करना शुरू कर सकता है।

बेहद खतरनाक वायरस

फोन में प्री-इंस्टाल्ड हैंगआउट का ऐप खुद ही एमएमएस से वीडियो प्रोसेस करके आपकी गैलरी में डाल देगा। हैकर को सिर्फ आपका फोन नंबर पता होना चाहिए जिसके बाद वो आपको ये एमएमएस भेज सकता है। आपके फोन में एमएमएस आते ही चंद सेकेंड में वायरस अपना काम करना शुरू कर देता है। उसके बाद हैकर आपके फोन को कंट्रोल कर सकता है। हैकर आपके फोन के बारे में सभी जानकारियां हासिल कर सकता है। इसके अलावा आपकी सभी तसवीरें, कैमरा और माइक्रोफोन तक को वो कंट्रोल कर सकता है।

कैसे लगा पता

फोर्ब्स मैगजीन के अनुसार इस सिक्योरिटी की खामी के बारे में एक रिसर्चर ने पता लगाया। इसके बारे में पता अप्रैल में लगा था। गूगल ने सभी फोन बनाने वाली कंपनियों को इस सिक्योरिटी की खामी दूर करने के लिए सॉफ्टवेयर पैच भेजा था लेकिन फोन कंपनियों ने अपने ग्राहकों को सॉफ्टवेयर पैच मुहैया नहीं करवाया है। गूगल ने सिक्योरिटी की खामी के बारे बताने के लिए रिसर्चर का शुक्रिया अदा किया है। गूगल ने एक प्रेस रिलीज में कहा है। 'हम रिसर्चर जोशुआ ड्रेक की मदद के शुक्रगुजार हैं। एंड्रॉयड की सिक्योरिटी उसका इस्तेमाल करने वालों के लिए और हमारे लिए भी बहुत जरूरी है इसलिए हमने तुरंत सॉफ्टवेयर पैच अपने पार्टनर्स को दिया ताकि उसे सभी डिवाइस पर लगाया जाए।'

दिक़्कत

लेकिन दिक्कत यह है कि कई डिवाइस पर ये सॉफ्टवेयर पैच कई हफ़्तों और महीनो तक नहीं पहुंचेंगे क्योंकि फोन बनाने वाली कंपनियां ऐसा काम करने में काफी समय लेती हैं। सभी मोबाइल फोन कंपनियां इस सॉफ्टवेयर को पहले अपने फोन पर चेक करती हैं उसके बाद ही सभी ग्राहकों के लिए ये सॉफ्टवेयर को ग्राहकों को दिया जाता है। एचटीसी ने फोर्ब्स मैगजीन को बताया कि गूगल ने उन्हें ये जानकारी दी थी और जुलाई की शुरूआत से उन्होंने अपने ग्राहकों के लिए ये सॉफ्टवेयर पैच देना शुरू कर दिया था।

कैसे बचें

  • ग्राहकों के पास इससे बचने का यही विकल्प है कि आप गूगल हैंगआउट को अपने डिफॉल्ट एप्लीकेशन के रूप में इस्तेमाल करना बंद कर सकते हैं। शायद हैकर्स को इसके बारे में जानकारी नहीं रही है इसके कारण आप सुरक्षित रहे गए हों।
  • दुनिया के करीब 80 फीसदी स्मार्टफोन एंड्रॉयड आॅपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं इसलिए ऐसी कोई भी सिक्योरिटी की खामी दुनिया भर के मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वालों पर सीधा असर करती है।
  • भारत में एंड्रॉयड फोन का बाजार उससे भी बड़ा है और सैमसंग, माइक्रोमैक्स, इंटेक्स जैसी कंपनिया एंड्रॉयड फोन बेचने वाली सबसे बड़ी कंपनियाँ हैं।
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