...तो भारत कैसे बनेगा दुनिया की बड़ी ताकत?

By Independent Mail | Last Updated: Apr 10 2019 10:22AM
...तो भारत कैसे बनेगा दुनिया की बड़ी ताकत?

हम अपने देश के इतिहास को गर्व से याद करते हुए कहते हैं कि कभी वह 'सोने की चिडि़या' कहलाता था। इस देश में एक से बढ़कर एक महान ऋषि हुए, जिन्होंने अपनी साधना के बल पर विभिन्न क्षेत्रों में कमाल का ज्ञान हासिल किया। अकेले पतंजलि ही योग, व्याकरण और चिकित्सा में पारंगत थे और तीनों पर ही उन्होंने बेमिसाल काम किया। उनके योगसूत्र से आज पूरी दुनिया लाभान्वित हो रही है। पतंजलि ने जिन तीन क्षेत्रों में काम किया, वे तीनों ही मनुष्य के जीवन के लिए सबसे जरूरी हैं। योग से हम शरीर और मन को स्वस्थ बनाते हैं, शिक्षा हमारे व्यक्तित्व के विकास का आधार है और चिकित्सा हमें निरोगी रखने के लिए जरूरी है। जिस तरह ये तीनों एक व्यक्ति के विकास के लिए जरूरी हैं, समाज के विकास के लिए भी ये उतने ही आवश्यक हैं। लेकिन अब भारत तीनों ही मामलों में एक पिछड़ा हुआ देश है। शारीरिक स्वास्थ्य या फिटनेस की बात करें, तो उसमें अपनी स्थिति का आंकलन हम खेलकूद में अपनी असफलताओं को देखकर ही कर सकते हैं। ओलिंपिक खेलों में छोटे-छोटे देश हमसे ज्यादा पदक जीतकर ले जाते हैं। शिक्षा की बात करें, तो आज भी हमारे देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर की यूनिवर्सिटीज नहीं हैं। देश के होनहार बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए विदेशी यूनिवर्सिटीज की शरण में जाना पड़ता है। यही हाल चिकित्सा का है। वे युवराज सिंह हों, इरफान खान हों, सोनाली बेंद्रे या सोनिया गांधी, बीमारी गंभीर होने पर सभी को बाहर ही जाना पड़ा। लेकिन कुछ समय से देश में जिस तरह का राजनीतिक विमर्श देखने को मिला है, उससे पता चलता है कि इतना सब होते हुए भी ये तीनों ही क्षेत्र अभी तक हमारी प्राथमिकता नहीं बन सके हैं। अपने हितों को साधने के लिए सत्तारूढ़ सरकार को राष्ट्रभक्ति, राम मंदिर और अल्पसंख्यकों को भयभीत करना ज्यादा कारगर लगता दिख रहा है। नतीजतन शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाएं तीनों दरकिनार कर दिए गए हैं। शिक्षा का आलम यह है कि दिल्ली सरकार को छोड़ दिया जाए, तो हर राज्य में सरकारी स्कूलों का बहुत ही बुरा हाल है। शिक्षकों को अंग्रेजी के नाम पर कैट और डॉग की स्पेलिंग भी ठीक से लिखनी नहीं आती, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में फर्क बताने में तो बड़े-बड़े धुरंधर भी फेल हो जाएं। लेकिन राष्ट्रभक्ति की बात करें, तो ये घरों में सोते लोगों पर हमला करने से पहले एक क्षण को भी नहीं सोचते। गोरक्षा के लिए वे कुछ भी दांव पर लगाने को तैयार हो जाते हैं। 

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