दूसरों की बुराई करने से बचें

By Independent Mail | Last Updated: Feb 10 2019 11:47PM
दूसरों की बुराई करने से बचें

एक बहुत बड़े सेठ जी थे। उन्होंने भोजन के लिए शहर के कई लोगों को आमंत्रित किया। भोज में दो ब्राह्मण भी शामिल थे, तो कुछ घोषित अपराधी भी आए हुए थे। सेठ जी सपरिवार व्यवस्था में लगे हुए थे, वे ब्राह्मणों के पास पहुंचे। एक ब्राह्मण जब हाथ-पैर धोने गया, तो सेठ जी ने दूसरे ब्राह्मण से कहा कि आपके साथ वाले ब्राह्मण देवता काफी यशस्वी और ज्ञानी प्रतीत होते हैं। ब्राह्मण ने ईर्ष्यावश कहा कि अरे सेठ जी, उनकी सात पुश्तों में भी कोई ज्ञानी नहीं हुआ। केवल भेष बदलकर पंडित बने हुए फिरते हैं। बैल हैं, बैल। इसी दौरान पहले वाला ब्राह्मण हाथ-पांव धोकर वापस आ गया। इसके बाद दूसरे वाले ब्राह्मण हाथ-पैर धोने चले गए। सेठ जी ने वही सवाल दूसरे वाले ब्राह्मण से भी दोहराया। वह भी ईर्ष्यावश बोला, सेठ जी आपको ईश्वर ने धन तो दिया पर मनुष्य को पहचानने की शक्ति न दी। वह कब से ज्ञानी हो गया, ज्ञानी तो इसके पड़ोस में भी नहीं बसते। गधा है गधा। तभी दूसरे ब्राह्मण भी हाथ-पांव धोकर आ गए और एक-दूसरे को देखकर चुप हो गए। अब दोनों के आगे खाने की थाली लगा दी गई। दोनों ब्राह्मण यह देखकर हतप्रभ थे कि उनके सामने रखी गई एक थाली में हरी घास और दूसरी में भूसा था। जबकि जो घोषित अपराधी सेठ जी के यहां आए थे, उनकी थाली में तरह-तरह के पकवान थे। दोनों ब्राह्मण गुस्से में खड़े हो गये और सेठ को अपने अपमान के लिए भला बुरा कहने लगे। सेठ जी हाथ जोड़कर खड़े हो गए और बोले कि महाराज जो सवाल मैंने आप लोगों से किया, वहीं सवाल इन अपराधियों से भी किया था। इन लोगों ने या तो एक दूसरे की तारीफ की या फिर चुप रहे। भले ही अपराधी हैं लेकिन एक- दूसरे की कमी नहीं बताई और अगर किसी में कमी थी, तो उसे मेरे सामने उजागर करने से बेहतर चुप रहना समझा। उन्होंने एक दूसरे का सम्मान किया, इसलिए मैंने उनका यथोचित सम्मान किया। आपने उसी सवाल पर एक दूसरे को गधा और बैल कहा तो महाराज मैंने ऐसे पशु को जो खाना दिया जाता है, वही परोस दिया। मुझसे कोई गलती हुई हो तो क्षमा चाहता हूं। यह सुनकर दोनों ब्रह्मणों को अपनी गलती का बोध हुआ और चुपचाप वहां से चले गए। इस कहानी का संदेश यह है कि दूसरे की बुराई करना मानवीय प्रकृति है, लेकिन इससे जितना बचाए उतना ही अच्छा, क्योंकि दूसरे की बुराई से पहले स्वयं को भी देख लेना चाहिए।

  • स्वामी सत्यप्रिय दास
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