2019 में रखना होगा आम जनता का ध्यान

By Independent Mail | Last Updated: Jan 10 2019 4:03PM
2019 में रखना होगा आम जनता का ध्यान

नया साल आ गया है, लेकिन आगे का आर्थिक रास्ता स्पष्ट नहीं है। उदारीकरण की मनमोहन सिंह की नीतियों ने मोदी सरकार को विफल साबित किया है। मनमोहन की नीतियों को अपनाने वाली भाजपा सोचने को विवश है कि कहीं वह रास्ता तो नहीं भटक गई है। दूसरी ओर, आर्थिक नीतियों को लेकर कांग्रेस कोई राय ही नहीं बना पा रही है। कोई राजनीतिक दल नई आर्थिक दृष्टि देने में सक्षम नहीं है। टीएमसी, टीडीपी, बीएसपी, एसपी जैसे क्षेत्रीय दल हों या वामदल, सभी विफल हैं। देश में असमंजस का माहौल है। यह भी जानकारी नहीं है कि बैंकिंग सिस्टम को बर्बाद करने वाले कॉरपोरेट का सत्ता में दखल कैसे कम किया जाए। जीएसटी घटाए जाने के बावजूद टैक्स की दरें अब भी ज्यादा हैं। कम आय वाले नौकरी पेशा लोगों और छोटे व्यवसायियों से भी टैक्स लिया जा रहा है। एक ओर पेट्रोल की कीमतें बढ़ रही हैं, तो दूसरी ओर तेल कंपनियों का मुनाफा। जीवन स्तर में गिरावट आ रही है। सितम्बर, 2018 में किए गए गैलप के सर्वे के मुताबिक, भारतीयों के वर्तमान जीवन की रेटिंग पिछले कुछ समय की तुलना में सबसे खराब है। गैलप के सर्वे के मुताबिक अपने जीवन स्तर को बेहतर मानने वाले भारतीयों के प्रतिशत में गिरावट आई है। 2014 के 14 के मुकाबले साल 2017 में सिर्फ तीन प्रतिशत भारतीय ही स्वयं को समृद्ध मानते हैं। गैलप सर्वे कहता है कि साल 2015 की शुरुआत में ही देश के ग्रामीण इलाकों में लोगों को खाद्य सामग्रियां खरीदने में कठिनाई होने लगी थी। नोटबंदी के बाद नकदी की किल्लत ने गंभीर असंतोष पैदा किया। लेकिन आंकड़ों में विकास होता हुआ दिख रहा है। आगामी लोकसभा चुनाव का परिणाम कुछ भी हो, नए साल में देश के परिदृश्य में ज्यादा बदलाव होने की संभावना नहीं दिखती। चुनावों में अब भी दो महीने से ज्यादा का वक्त बचा है। क्या इस दौरान कोई बदलाव संभव है? नहीं, क्योंकि आर्थिक सुधार जनता नहीं, कॉरपोरेट को ध्यान में रखकर किए गए। इसे विडंबना ही कहेंगे कि मेक इन इंडिया के नारों के बीच देश के बाजार विदेशी सामानों से अटे पड़े हैं। इसके साथ ही व्यापार घाटा बढ़ रहा है और नौकरियों में लगातार कमी आ रही है। लेकिन अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का तरीका शायद ही किसी को मालूम हो। फिर भी उम्मीद पर दुनिया कायम है। संभव है कि इस साल कुछ बदलाव हो।

वरिष्ठ पत्रकार शिवाजी सरकार के ब्लॉग से...

image
Copyrights @ 2017 Independent NewsCorp (P) Ltd., Bhopal. All Right Reserved