पश्चिम बंगाल में जो हुआ, वह बेनजीर था

By Independent Mail | Last Updated: Feb 10 2019 10:58PM
पश्चिम बंगाल में जो हुआ, वह बेनजीर था

शैलेंद्र शांत

हाल ही में पश्चिम बंगाल में जो हुआ, वह साधारण लोगों की नजर में ही नहीं, राजनीतिक प्रेक्षकों की नजर में भी बेनजीर था। उसके बाद के घटनाक्रम भी हैरान करने वाले थे। सुबह अखबारों में वाममोर्चे की तीन साल बाद होने वाली ब्रिगेड रैली की सुर्खियां थीं। प्रमुख बांग्ला चैनलों पर उस रैली की खबरें चलाई जा रही थीं। राज्य के हर हिस्से से भारी संख्या में कार्यकर्ता, समर्थक, महिला-पुरुष ब्रिगेड मैदान पहुंचे थे। इस रैली का संदेश था-नेता नहीं, नीति चाहिए और नारा था-मोदी हटाओ देश बचाओ, ममता हटाओ बंगाल बचाओ। लेकिन शाम होते-होते सुर्खियां बदल गईं। देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई के अधिकारियों को स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उनके साथ धक्का-मुक्की भी की गई। अपराधियों की तरह धकेल कर कारों में उन्हें बैठाया गया। यही नहीं, सीबीआई के दफ्तर पर भी पुलिस को भारी संख्या में तैनात कर दिया गया। हालांकि, बाद में सीबीआई अधिकारी छोड़ दिए गए। यह बहुत बड़ी खबर थी। बेनजीर, अकल्पनीय, जो अब राजनीतिक टकराव में तब्दील गई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया। इसकी गूंज संसद के दोनों सदनों में पहुंच गई। इसके साथ ही यह घटनाक्रम केंद्र बनाम राज्य ही नहीं, भाजपा बनाम विपक्ष की लड़ाई का मुद्दा भी बन गया। बयानबाजी का दौर जारी है। सीबीआई के अधिकारी कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के लाउडन स्ट्रीट स्थित घर पूछताछ के लिए गए थे। वहां पहले से ही अच्छी तादाद में पुलिस के जवान मौजूद थे। इस खबर का पता चलने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस पुलिस अधिकारी के घर पहुंच गई थीं। उनके साथ पुलिस के आला अधिकारी भी थे। मुख्यमंत्री ने धरने का ऐलान कर दिया। इस धरने को ममता ने सत्याग्रह करार दिया था। ममता उसी जगह धरने पर बैठीं, जहां उन्होंने सिंगुर में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ धरना दिया था। तब वह विपक्ष की नेता थीं। तब के उस आंदोलन में तमाम दलों के साथ भाजपा भी उनके साथ थी। लेकिन इस धरने में ममता बनर्जी कहना था कि यह सब एक साजिश के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करा रहे हैं। उनका आरोप यह भी था कि भाजपा विरोधी दलों की रैली आयोजित करने के कारण भाजपा उन्हें निशाना बना रही है। हमारे गठबंधन से मोदी घबरा गए हैं। वे इस तरह की भाषा बोल रहे हैं, जो एक प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देती। वहीं, सीबीआई के संयुक्त निदेशक पंकज श्रीवास्तव का कहना था कि जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर की जा रही है। सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव ने कहा था कि पश्चिम बंगाल पुलिस सहयोग नहीं कर रही है, इसलिए हम सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं। कुल मिलाकर मामला सुप्रीम कोर्ट गया भी। इसी बीच, राज्य सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा कर सीबीआई पर उसके स्टे का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए सुनवाई की मांग कर दी। इस पर सीबीआई का कहना था कि वह स्टे दूसरे मामले से संबंधित है। ममता के धरने पर बैठने के बाद यह मुद्दा पूरी तरह राजनीतिक हो गया था। इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, शरद यादव, शरद पवार, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव आदि कई नेता सीबीआई के बेजा इस्तेमाल के आरोप को दोहराते हुए ममता के साथ खड़े हो गए। इन नेताओं का कहना था कि अभी तक सीबीआई वाले सो रहे थे। ऐन लोकसभा चुनाव के वक्त जागने की कोई वजह तो होगी। दूसरी तरफ भाजपा नेता ममता पर लोकतंत्र को ध्वंस करने, संवैधानिक संकट पैदा करने और मुख्यमंत्री के दायित्व को नहीं निभा पाने का आरोप जड़ रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि दाल में कुछ काला तो है, तभी जांच में सहयोग नहीं किया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ राहुल समेत कई कांग्रेसी ममता के साथ खड़े हैं, तो वहीं इसी दल के सांसद अधीर रंजन चौधरी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग है। चौधरी ने ममता को स्वेच्छाचारी और लोकतंत्र विरोधी करार देते हुए उन पर विरोधी स्वर को दबाने का आरोप भी लगाया। माकपा के राज्य सचिव सूर्यकांत मिश्र ने आरोप लगाया कि वाममोर्चे की सफल रैली से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए ममता ने ड्रामा शुरू किया था। वह इस हरकत से भाजपा की ही मदद कर रही थीं। इधर, भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने ममता पर तंज कसा कि वह पुलिस आयुक्त को जांच से बचाने के लिए मुखर क्यों हैं, कहीं वह खुद को तो नहीं बचाना चाहतीं। हालांकि, अब यह तमाशा खत्म हो गया है। लेकिन जो तमाशा हुआ था, वह बेनजीर था। वामपंथियों के ममता और भाजपा की नूराकुश्ती के आरोप में दम है।

  • वरिष्ठ स्तंभकार
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