दुश्मन को भी दास बना देता है मधुर व्यवहार

By Independent Mail | Last Updated: Nov 30 2018 10:02PM
दुश्मन को भी दास बना देता है मधुर व्यवहार

एक राजा था। उसने एक सपना देखा। सपने में उससे एक साधु कह रहा था कि बेटा! कल रात तुम्हें एक सांप काटेगा और उसके काटने से तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी। वह सर्प एक पेड़ की जड़ में रहता है। साधु ने यह भी बताया कि वह पेड़ कहां है जिसमें सर्प रहता है और यह भी कि सांप तुमसे पूर्व जन्म की शत्रुता का बदला लेना चाहता है। सुबह हुई। राजा सोकर उठा। सपने ने उसे विचलित कर दिया। वह अपनी आत्मरक्षा के उपाय सोचने लगा।

सोचते-सोचते राजा इस निर्णय पर पहुंचा कि मधुर व्यवहार से बढ़कर शत्रु को जीतने वाला और कोई हथियार इस पृथ्वी पर नहीं है। उसने सर्प के साथ मधुर व्यवहार करके उसका मन बदल देने का निश्चय कर लिया। शाम होते ही राजा ने उस पेड़ की जड़ से लेकर अपनी शैया तक फूलों का बिछौना बिछवा दिया, सुगन्धित जलों का छिड़काव करवाया, मीठे दूध के कटोरे जगह-जगह रखवा दिये और सेवकों से कह दिया कि रात को जब सर्प निकले, तो कोई उसे किसी प्रकार कष्ट पहुंचाने की कोशिश न करे। रात को सांप अपनी बांबी में से बाहर निकला और राजा के महल की तरफ चल दिया। वह जैसे आगे बढ़ता गया, अपने लिये की गयी स्वागत व्यवस्था को देख-देखकर आनन्दित होता गया। कभी वह कोमल बिछौने पर लेटता, कभी मनभावन सुगन्ध का रसास्वादन करता और जगह-जगह मौजूद मीठा दूध पीता हुआ आगे बढ़ता चला गया। इससे क्रोध के स्थान पर सन्तोष और प्रसन्नता के भाव उसमें बढ़ने लगे। जैसे-जैसे वह आगे चलता गया, वैसे ही वैसे उसका क्रोध कम होता गया। राजमहल में जब वह प्रवेश करने लगा, तो देखा कि प्रहरी खड़े हैं लेकिन उसे जरा भी हानि पहुंचाने की चेष्टा नहीं कर रहे हैं।

यह असाधारण से लगने वाले दृश्य देखकर सांप के मन में स्नेह उमड़ आया। मधुरता के जादू ने उसे मंत्रमुग्ध कर दिया। कहां वह राजा को काटने चला था लेकिन अब उसके लिए अपना कार्य असंभव हो गया। सांप सोचने लगा कि वह जिसे हानि पहुंचाने आया था, उसने तो बहुत मधुर व्यवहार किया है। ऐसे धर्मात्मा राजा को काटूं तो किस प्रकार काटूं? इस प्रश्न के चलते वह दुविधा में पड़ गया। राजा के पलंग तक पहुंचते-पहुंचते सांप का निश्चय पूरी तरह से बदल गया। उधर, राजा सांप की ही प्रतीक्षा कर रहा था। वह सांप से बोला, आओ, तुम्हारा स्वागत है। सांप ने राजा से कहा, राजन! मैं तुम्हें काटकर अपने पूर्व जन्म का बदला चुकाने आया था लेकिन तुमने मुझे परास्त कर दिया। अब मैं तुम्हारा शत्रु नहीं मित्र हूं। मित्रता के उपहार स्वरूप अपनी बहुमूल्य मणि मैं तुम्हें दे रहा हूं। इसे अपने पास रखो। मणि राजा के सामने रखकर सांप चला गया। यह महज कहानी नहीं, जीवन की सच्चाई है। अच्छा व्यवहार कठिन से कठिन कार्यों को सरल बनाने का माद्दा रखता है। यदि व्यक्ति व्यवहार कुशल है, तो वह सब कुछ पा सकता है जिसे पाने की वह इच्छा रखता है। हमें अपने शत्रुओं को जीतने की कोशिश करनी चाहिए, शस्त्रों से नहीं, प्रेम से।

पूजा शर्मा

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