नहीं होनी चाहिए गाय के नाम पर हिंसा

By Independent Mail | Last Updated: Dec 6 2018 2:36PM
नहीं होनी चाहिए गाय के नाम पर हिंसा

जाहिद खान

गाय की हत्या के नाम पर भीड़ ने फिर दो बेकसूर इंसानों की जान ले ली है। इस मर्तबा यह दर्दनाक वाकया दिल्ली से महज 130 किलोमीटर दूर बुलंदशहर जिले के स्याना गांव में पेश आया। गोकशी के शक में भीड़ ने पहले तो भयंकर हंगामा किया और फिर वह हिंसा पर उतर आई। उसने जमकर पथराव किया और वहां खड़ी अठारह गाड़ियां फूंक दीं। गुस्साए कथित गोरक्षकों की हिंसा में एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत हो गई। हिंसक भीड़ ने पुलिस चौकी के भीतर ही सीओ समेत अन्य पुलिसवालों को बंधक बना लिया और बाहर से आग लगा दी। वह तो बैरक का रोशनदान तोड़कर ये लोग बाहर निकल आए, वरना मामला ज्यादा गंभीर हो सकता था। बचाव में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की तो एक नौजवान की जान चली गई। घटना में कई लोग और पुलिसकर्मी घायल हुए। जिस घटना से बुलंदशहर समेत पूरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश पल भर में अशांत हो गया, वह घटना स्याना कोतवाली इलाके के महाव गांव की है। जहां खेतों में अज्ञात लोगों ने कुछ मरे हुए मवेशी के अवशेष रख दिए थे। सूचना मिलने पर स्थानीय निवासियों में आक्रोश फैल गया। गुस्साए लोग इन अवशेषों को ट्रैक्टर ट्राली में भरकर चिंगरावठी पुलिस चौकी ले गए। पुलिस ने मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। लेकिन गुस्साई भीड़ संतुष्ट नहीं हुई। उसने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बुलंदशहर-गढ़मुक्तेश्वर स्टेट हाईवे पर ट्रैक्टर ट्राली लगाकर रास्ता जाम कर दिया। स्याना कोतवाली के इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह ने पुलिस बल के साथ सैंकड़ों लोगों की इस भीड़ को समझाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी। पुलिस का कहना है कि जब उसने जाम खुलवाना चाहा तो भीड़ ने पथराव कर दिया। वहीं स्थानीय लोगों का इल्जाम है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी जिसमें पुलिस इंस्पेक्टर समेत एक नागरिक की मौत हो गई। जिन लोगों ने भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर घटना के वीडियो देखे हैं, उन्हें सच का पता होगा। उनसे साफ मालूम चलता है कि हिंसक भीड़ ने बेरहमी से पुलिस इंस्पेक्टर को मारा और जमकर सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान किया। क्या आदमी गुस्से की आग में इतना वहशी भी हो सकता है कि पीट-पीटकर किसी की हत्या कर दे? समाज में कोई अपराध होता है, तो अपराधी को पकड़ने के लिए पुलिस है और उसे सजा दिलाने के लिए कानून। कानून की एक तयशुदा प्रक्रिया है, जिसमें कोई भी हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कैसा भी अपराध हो, लोग कानून हाथ में नहीं ले सकते। लोग खुद ही इंसाफ करने लगेंगे तो पुलिस और कानून की क्या भूमिका होगी? गोरक्षा के नाम पर कथित गोरक्षकों द्वारा की जा रही हिंसा का यह पहला मामला नहीं है, बल्कि इस तरह के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। इन मामलों में शीर्ष अदालत की कड़ी फटकार और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बाद भी गोरक्षकों की हिंसा में कोई कमी नहीं आई है। बीते साल जुलाई में शीर्ष अदालत ने जब केंद्र सरकार से इस मामले में जवाब-तलब किया तो अदालत में अपना हलफनामा दाखिल करते हुए उसने कहा था कि केंद्र ऐसे अपराधियों के संरक्षण की आलोचना करता है। देश के अधिकांश राज्यों में गोहत्या और गो तस्करी के खिलाफ सख्त कानून हैं। फिर तथाकथित गोरक्षकों को कानून हाथ में लेने का क्या हक है? बुलंदशहर मामले को देखें, तो यह सच है कि खेत में गोवंश अवशेष मिले। लेकिन गोहत्या किसने और क्यों की, यह जांच के बाद ही मालूूम चलेगा। इसके पीछे कोई बड़ी साजिश भी हो सकती है? पश्चिमी उत्तर प्रदेश सांप्रदायिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है, घटना की आड़ में कहीं इस पूरे क्षेत्र को सुलगाने की कोशिश तो नहीं हो रही जिससे वोटों की फसल काटी जा सके। गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी कर रहे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है, वे चाहे किसी पार्टी या संगठन से जुड़े हुए हों। बुलंदशहर मामले की जांच के लिए कहने को तो योगी सरकार ने एसआईटी बना दी है। लेकिन एसआईटी निष्पक्ष जांच करेगी, इंसाफ-पसंदों काे इस बात का जरा-सा भी यकीन नहीं है। सरकार इस मामले की जांच के लिए वाकई गंभीर है, तो अदालत की निगरानी में एक एसआईटी का गठन करे, ताकि इस घटना का पूरा सच सामने आ सके। उन तथाकथित गोरक्षक संगठनों पर पाबंदी लगाई जाए जो गोहत्या के नाम पर बेकसूरों को जान से मारने से भी नहीं हिचकते। अफसोस कि सरकारें तत्परता से काम नहीं करतीं। यही वजह है कि कभी राजस्थान के अलवर, उत्तर प्रदेश के बिसाहड़ा, सहारनपुर तो कभी झारखंड के जमशेदपुर से भीड़ द्वारा हिंसक घटनाओं के होने की खबरें आती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के तत्काल जरूरी है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष ढंग से जांच कराए और जांच में जो भी दोषी पाया जाए उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

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