अपने जीवन को असाधारण बनाने का प्रयास करें

By Independent Mail | Last Updated: Nov 2 2018 11:01PM
अपने जीवन को असाधारण बनाने का प्रयास करें

हम आपसे एक आसान-सा सवाल पूछते हैं कि आपका सबसे करीबी मित्र कौन हैं? आपका उत्तर हो सकता है, मेरी पत्नी या मेरे पति, मेरा बच्चा। नहीं, नहीं, मेरा मित्र। न, न, मेरी मां हैं, पिता हैं। इस तरह आप जो भी उत्तर दें, वह सब सफेद झूठ है। देखिए, उनमें से हरेक को आपने एक हद तक ही छूट दी है। किसी को घर के दरवाजे तक, किसी को अपने हाथ की पहुंच तक, किसी को अपने बिस्तर तक। लेकिन चाहे कितनी ही नजदीकी क्यों न हों, उनसे भी एकाध रहस्य आपने अपने मन में छिपा रखा है। उस रहस्य को भी जानने की हद तक आपसे निकटता रखने वाला व्यक्ति केवल एक ही है। कौन है वह? आप कह सकते हो कि ईश्वर लेकिन यह उत्तर भी सही नहीं है। आपके रहस्यों को जानने की जगह दूसरे महत्वपूर्ण काम भी ईश्वर के पास हैं। इसलिए सवाल यही है कि फिर वह करीबी व्यक्ति कौन है? वह आप खुद हैं। हां, आप ही हैं। आप से भी घनिष्ठ व्यक्ति आपके लिए और कौन हो सकता है? आपको उसी घनिष्ठ व्यक्ति के बारे में ही पूर्ण रूप से जानना चाहिए। हर क्षण को अपनी इच्छानुसार बना लेने के लिए आपको दिया गया अवसर ही है यह जीवन। इस धरती के भाग्य को बदलने वाले सभी ज्ञानी, उस क्षण के लिए जो आवश्यक था, उसी पर ध्यान केंद्रित करते हुए संपूर्ण इच्छा के साथ लग गए। वे यह सोच कर इंतजार में नहीं बैठे रहे कि पचास, पांच सौ या पांच हजार साल बाद कोई उस काम को करेगा। उन्होंने उसी क्षण काम प्रारंभ किया, जब उनकी समझ में आया कि उन्हें कुछ करना चाहिए। लेकिन इस समय सारे 'लाउडस्पीकर' उन लोगों के थोथे बोल का शोर मचा रहे हैं, जो किसी तिनके को उठाकर रखने के लिए भी तैयार नहीं रहते, जो केवल और केवल उपदेश देते हैं। हमें काम करना चाहिए। आज का माहौल हम सबके लिए इतना अनुकूल है, जितना पहले कभी नहीं रहा था। विज्ञान ने हमें इतनी सुविधाएं दे रखी हैं कि एक साथ मिलकर काम करने में भाषा, संस्कृति, दूरी आदि कुछ भी बाधक नहीं है। अगर आप जागरूकता से, आनंद से, लगन से और एकाग्र होकर काम करने लग जाएं तो आपके चारों ओर सौ लोग काम करेंगे। इन सौ लोगों के चारों ओर 10 हजार लोग खड़े हो जाएंगे। यह संख्या थोड़े ही समय में 10 लाख बन सकती है। अगर 10 लाख लोग जिम्मेदारी की भावना से पूरी लगन के साथ काम करेंगे तो उन्हें विश्व की कोई ताकत टक्कर नहीं दे पाएगी। दरअसल, अपराजेय सैन्य बल रखना ताकत नहीं है। सही मार्गदशर्न पाने के लिए लोग आपकी तरफ ताकते हैं, वही है सबसे बड़ी ताकत। यही ताकत हमारी सबसे बड़ी दोस्त होती है। इस ताकत को जगाने का केवल एक ही तरीका है कि आप स्वयं को समझें, स्वयं से परिचित हों। लेकिन हम दूसरों को जानने में अपनी ऊर्जा गंवाते हैं। हम स्वयं को जानने से बचते हैं। हम ऐसा कुछ नहीं करते जिससे स्वयं को जान पाएं, इसलिए आज दुनिया के ज्यादातर मनुष्य औसत जीवन जी रहे हैं।

सद्गुरु जग्गी वासुदेव

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