तिनसुकिया कांड पर न हो राजनीति

By Independent Mail | Last Updated: Nov 4 2018 11:03PM
तिनसुकिया कांड पर न हो राजनीति

असम के तिनसुकिया में संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा बंगाली युवकों की नृशंस हत्या को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में उफान पैदा हो गया है। सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस के नेता विरोध में सड़क पर उतर गए। एक ही दिन जहां इस घटना के विरोध में महानगर में तृणमूल कांग्रेस का जुलूस निकला, वहीं वामपंथी पार्टियां भी लाल झंडा लेकर अलग जुलूस के साथ सामने आए। कांग्रेस ने भी अपने ढंग से इस घटना का विरोध किया और इसकी तीव्र निंदा की है। शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस और माकपा ने महानगर में जुलूस निकाला, तो शनिवार को प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने काला दिवस मनाया। तृणमूल कांग्रेस ने दूसरे दिन भी शनिवार को विभिन्न जिलों में विरोध जुलूस निकाला। पश्चिम बंगाल में काली पूजा और दीपावली का उत्साह एक तरह से तिनसुकिया हत्याकांड के शोरगुल में दबने लगा है। सर्दियों की दस्तक से पहले ही राज्य की राजनीति एकाएक गर्म हो गई है। तिनसुकिया में पांच बंगाली युवकों की हत्या के विरोध में सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दल जो अलग-अलग शोरगुल मचा रहे हैं, उनका एक ही मकसद भाजपा को कठघरे में लाना है। तिनसुकिया में पांच बंगाली युवकों की हत्या पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो सीधे तौर पर भाजपा पर हमला किया है। ममता ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि असम में जिस तरह पांच बंगाली युवकों की हत्या की गई, वह पूरे देश के लिए अशुभ संकेत है। पूरे देश में माहौल खराब किया जा रहा है। गुजरात से बिहारियों को खदेड़ा जा रहा है, तो असम में बंगालियों की हत्या की जा रही है। भाजपा का नाम लिए बिना ममता ने कहा कि देश में एक ऐसी पार्टी है जो जांच एजेंसी के मार्फत धमकाती रहती है और भय पैदा करती है। जगह-जगह आरएसएस के संगठन का जाल बिछाने का दबाव डाला जा रहा है। जहां कोई रुकावट डालता है, उसे जांच एजेंसी का भय दिखाया जा रहा है। देश में इस तरह का माहौल कभी नहीं था, लेकिन अब ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो पूरे देश के लिए अशुभ संकेत हैं। इस तरह संदिग्ध आतंकियों द्वारा असम में पांच युवकों की हत्या के लिए विपक्षी दल जिस तरह भाजपा को कोस रहे हैं, उसका राजनीतिक अर्थ कोई भी समझ सकता है। इस तरह के संवेदनशील मसलों पर राजनीति करने से बचा जाना चाहिए। ऐसे मसलों पर जब राजनीति होती है, तो उग्रवादियों को ही ताकत मिलती है।

असम के वरिष्ठ पत्रकार बिनोद रिंगानिया के ब्लॉग से

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