हाफिज सईद को जेल में डाले पाकिस्तान सरकार

By Independent Mail | Last Updated: Mar 11 2019 11:38PM
हाफिज सईद को जेल में डाले पाकिस्तान सरकार

संयुक्त राष्ट्रसंघ ने आतंकवादी हाफिज सईद से प्रतिबंध हटाने की याचिका खारिज कर दी। हालांकि हाफिज की ओर से लाहौर की एक प्रसिद्ध लॉ फॉर्म ने जोरदार वकालत की थी। लेकिन संयुक्त राष्ट्र की तरफ से नियुक्त मध्यस्थ डैनियल फासियाती ने पूरी समीक्षा के बाद कहा कि ऐसा कोई तथ्य नहीं मिला, जिससे उस पर प्रतिबंध गलत साबित होता हो। हाफिज का आवदेन आने के समय से ही भारत भी सक्रिय था। उसने फ्रांस, ब्रिटेन आदि को साथ लेकर लड़ाई लड़ी। वस्तुत: भारत के प्रस्ताव पर ही दिसम्बर, 2008 में संयुक्त राष्ट्र ने उसे प्रतिबंधित किया था। हाफिज सईद भारत के सर्वाधिक वांछित आतंकवादियों में से एक है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा भारत के तथ्यों, जिसमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन आदि द्वारा हाफिज को आतंकवादी घोषित करने की जानकारी भी शामिल थी, को स्वीकारने का मतलब यही है कि हाफिज की आतंकवादी गतिविधियां जारी हैं और उससे विश्व शांति को खतरा है। इसके बाद भविष्य में भी हाफिज कभी प्रतिबंधों से मुक्त हो सकेगा, इसकी संभावना लगभग खत्म हो गई है। पाकिस्तान के पास इस मामले की सुनवाई से अलग रहने का ही विकल्प था। अगर पाकिस्तान इसमें हाफिज के पक्ष में खड़ा होता, तो यह साबित हो जाता कि उसके संरक्षण में ही उसकी आतंकवादी गतिविधियां चल रहीं हैं। भारतीय कूटनीति के कारण उस पर आतंकवाद को लेकर जैसा दबाव है, उसमें वह चाहकर भी हाफिज की मदद नहीं कर सकता था। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने के लिए सुरक्षा परिषद में फिर प्रस्ताव लाया जा चुका है। सुरक्षा परिषद के सदस्यों के तेवर देखते हुए इसके भी पारित हो जाने की संभावना दिख रही है। हालांकि, चीन अब भी मसूद अजहर के पक्ष में है। लेकिन अगर उस पर पाबंदी लगती है, तो पाकिस्तान के दो नागरिकों पर आतंकी होने की मुहर लग जाएगी। पाकिस्तान विश्व के तेवर को देखते हुए हाफिज के संगठनों को प्रतिबंधित कर तत्काल कार्रवाई कर रहा है, लेकिन उसने उसे स्वतंत्र छोड़ा हुआ है। अगर हाफिज का संगठन आतंकवादी कानून के तहत पाकिस्तान में प्रतिबंधित किया जा सकता है, तो उसे उसी कानून के तहत गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा सकता? पाकिस्तान हाफिज सई को गिरफ्तार करके जेल में डाले। यह तब होगा, जब दुनिया उस पर दबाव बनाएगी।

  • वरिष्ठ पत्रकार नीलम महाजन के ब्लॉग से...
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