महंगी पड़ेगी इंसानी शरीर की प्रकृति से छेड़छाड़

By Independent Mail | Last Updated: Dec 3 2018 11:27PM
महंगी पड़ेगी इंसानी शरीर की प्रकृति से छेड़छाड़

रामायण का एक प्रसंग बहुत लोकप्रिय है, जिसमें हनुमानजी की परीक्षा लेने आई सुरसा उन्हें निगलने के लिए उनके सामने जितना मुंह खोलती है, हनुमानजी अपना आकार उतना ही बड़ा कर लेते हैं। जैसे-जैसे सुरसा के खुले मुंह का आकार बढ़ता जाता है, पवन-सुत का आकार उससे कहीं ज्यादा बड़ा हो जाता है। जब सुरसा के मुंह का आकार बहुत बड़ा हो जाता है, तो हनुमानजी अचानक ही सूक्ष्म रूप धारण करके उसके मुंह में घुस जाते हैं और तुरंत ही निकल भी आते हैं। यह प्रसंग इतना लोकप्रिय हुआ कि तमाम समस्याओं के लिए सुरसा के मुंह का मुहावरा बन गया। हमारे पौराणिक आख्यानों में विराट और सूक्ष्म रूप धारण करने के ऐसे कई प्रसंग हैं। ये सभी चीजें पश्चिम की सोच में भी हैं, लेकिन सूक्ष्म आकार की फंतासी को सबसे ज्यादा अपनाया है, आधुनिक विज्ञान कथाओं और उनके अनुसरण से बने कार्टून चलचित्रों ने। इन विज्ञान कथाओं में वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित कर लेते हैं, जिनसे इंसान को सूक्ष्म बनाया जा सकता है। इंसान को छोटा करने की तकनीक की संभावनाएं खोजने की कोशिशें भी हुई हैं। लेकिन वर्जीनिया टेक के मैक्स माइकल और अने स्टेपल ने इस सवाल को दूसरे सिरे से पकड़ने की कोशिश की। उन्होंने यह जानना चाहा कि अगर इंसान को सचमुच छोटा कर दिया जाए, तो उसका जीवन कैसा होगा? वे दोनों जिस नतीजे पर पहुंचे, वह काफी दिलचस्प है। सबसे पहले तो उन्होंने पाया कि जब पूरा शरीर और उसके अंग छोटे हो जाएंगे, तो हमारा श्वसन तंत्र भी छोटा हो जाएगा। अपने छोटे फेफड़ों में हम बहुत ज्यादा ऑक्सीजन नहीं भर सकेंगे। हमें जितनी ऑक्सीजन चाहिए, उतनी नहीं मिल सकेगी और हम वैसा ही महसूस करेंगे, जैसा कि ऊंचे पहाड़ पर वहां महसूस करते हैं, जहां ऑक्सीजन काफी कम होती है। माना जाता है कि आठ हजार मीटर की ऊंचाई से डेथ जोन शुरू हो जाता है, जहां इंसान कम ऑक्सीजन की वजह से जान से हाथ भी धो सकता है। इसके अलावा, हमारा शरीर जितनी गरमी पैदा करता है, उतनी ही खर्च भी कर देता है। शरीर छोटा होने से ये दोनों क्षमताएं भी घटेंगी। जाहिर है, इन सभी स्थितियों में जीना मुश्किल होगा। प्राचीन प्रसंग अपनी जगह हैं, लेकिन सच यही है कि हमारा आकार इस प्रकृति में हमारे शरीर की सभी जरूरतों को पूरे करने के लिहाज से ही बना है। इसके आकार से खिलवाड़ की कोई भी कोशिश महंगी पड़ सकती है।

दार्शनिक राजेश्वर शर्मा के ब्लॉग से...

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