कैबिनेट की अंतिम बैठक: अच्छी परंपरा की शुरुआत

By Independent Mail | Last Updated: Mar 10 2019 9:21PM
कैबिनेट की अंतिम बैठक: अच्छी परंपरा की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक में लिए गए निर्णयों का सकारात्मक पहलू यही है कि इसमें लिया गया एक भी फैसला ऐसा नहीं है, जिसे हम चुनावी लाभ के लिए उठाया गया लोकलुभावन कदम कह सकें। उसके सारे ही निर्णय ऐसे हैं, जिनमें किसी सरकार की विकास एवं सामाजिक-आर्थिक समस्याओं के निदान संबंधी गतिविधियों की निरंतरता झलकती है। विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों के लिए 13 रोस्टर संबंधी उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों को लेकर जिस तरह का आक्रोश सड़कों पर दिखा था, उसके लिए तत्काल अध्यादेश का सहारा लिया गया है। इस पर यकीनन दो मत होंगे, लेकिन चुनाव न होता, तब भी सरकार यही निर्णय करती। कुछ योजनाओं के पूरा होने की समय सीमा बढ़ाई गई है, तो कुछ के लिए राशि का आवंटन बढ़ा दिया गया। सुरक्षा बलों की समस्याओं को लेकर जिस तरह की संवेदनशीलता इस समय देश में है, उसे देखते हुए सभी सेवानिवृत्त परिवारों को स्वास्थ्य लाभ की परिधि में लाना और उनकी तैनाती वाले अशांत क्षेत्रों में केंद्रीय विद्यालय खोलने का निर्णय हर दृष्टि से सराहनीय है। इसी तरह दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों काे सीधे राजनीतिक लाभ के लिए अधिकृत करने की जगह उपराज्यपाल की अध्यक्षता में समिति नियुक्त करने का मतलब है कि सरकार इस समस्या का समग्र और स्थायी निदान चाहती है। अविकसित क्षेत्रों में विद्युत परियोजनाओं की घोषणा और जल विद्युत परियोजना को बढ़ावा देने का निर्णय ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से लिया गया है। रेलवे लाइनों का विस्तार हो या फिर सीमा क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण संबंधी योजनाएं, सब सामाजिक-आर्थिक विकास की दृष्टि के अनुरूप ही हैं। यही बात मुंबई की उपनगरीय रेलों और दिल्ली मेट्रो के विस्तार के निर्णयों पर भी लागू होती है। इन निर्णयों में सरकार का आत्मविश्वास भी झलकता है। जाती हुई सरकार जल्दी में कुछ ऐसे फैसले करती है, जो आने वाली सरकार के लिए समस्या बन जाते हैं। लेकिन इनमें ऐसा नहीं है। ये फैसले ऐसे हैं, जिनसे लगता है कि नरेन्द्र मोदी सत्ता में अपनी पुन: वापसी को लेकर आश्वस्त हैं। हालांकि, इसका पता तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही चलेगा कि देश में अगली हुकूमत किसकी होगी, लेकिन मोदी सरकार ने मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक कर एक अच्छी परंपरा स्थापित की है। सरकारें आती-जाती रहतीं हैं, मगर सुरक्षा और विकास की नीतियों में निरंतरता रहे, यही सच्चे लोकतंत्र का परिचायक है। जनता की समस्याएं भी इसी से सुलझती हैं।

  • राष्ट्रवादी विचारक लोकेंद्र सिंह के ब्लॉग से...
image
Copyrights @ 2017 Independent NewsCorp (P) Ltd., Bhopal. All Right Reserved