पाकिस्तान को दबाव मुक्त होने का मौका न दें

By Independent Mail | Last Updated: Mar 10 2019 7:11PM
पाकिस्तान को दबाव मुक्त होने का मौका न दें

भारत और पाकिस्तान के संबंध अब तनाव मुक्त होने लगे हैं। सीमा पार जाने वाली बसों और रेलगाड़ियों का चलना अच्छी खबर है। लेकिन हमें पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी का दबाव कायम रखना होगा। यह इसलिए कि जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर युद्ध विराम का उल्लंघन अब भी हो रहा है। पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, लेकिन वह जो कदम उठा रहा है, वह यह सुनिश्चित नहीं करते कि वह आतंकवाद पर सचमुच लगाम लगाने जा रहा है। यह एक तथ्य है कि पाकिस्तान चुनिंदा आतंकी संगठनों के खिलाफ इस तरह की कागजी कार्रवाई पहले भी कर चुका है, जैसी इस समय कर रहा है। सबसे खास बात यह है कि हमारा पड़ोसी लश्कर और जैश जैसे आतंकी संगठनों पर तो कम से कम दिखावे की कार्रवाई कर ही रहा है, लेकिन हिजबुल मुजाहिदीन इससे बाहर है, जबकि अभी हाल ही में जम्मू बस स्टैंड पर जो हमला हुआ है, उसमें हिजबुल का ही हाथ था। यह अच्छा हुआ कि भारत ने पाकिस्तान के कदमों को अपर्याप्त और दिखावे की कार्रवाई बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने साफ-साफ कहा कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के खिलाफ जो कार्रवाई हो रही है, उससे भारत संतुष्ट नहीं है, लेकिन यह बयान पर्याप्त नहीं है। पाक अगर दुनिया को धोखा दे रहा है, तो यह हमें ही सुनिश्चित करना होगा कि वह अपनी इस हरकत में कामयाब न हो। यह एक धोखा ही है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ कार्रवाई की बात करते हैं, तो पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता उनके बयान का खंडन कर देते हैं। वह यह कह देते हैं कि इस नाम का तो कोई संगठन ही अब अस्तित्व में नहीं है। पाकिस्तानी फौज के इस बयान से यही पता चलता है कि वह एक बार फिर दुनिया की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश में जुट गई है। भारत को इस तरह की चालबाजी को लेकर न केवल खुद सतर्क रहना होगा, बल्कि विश्व समुदाय को भी इसके प्रति आगाह करना होगा कि पाकिस्तान उसे झांसा देने की कोशिश कर रहा है। इस मामले में पाकिस्तान के प्रति नरमी बरतने वाले चीन सरीखे देशों के रवैये को लेकर कहीं अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। इसके साथ ही हमें अमेरिका के रवैये पर भी निगाह रखनी होगी, क्योंकि वह अफगानिस्तान से निकलने की कोशिश में पाकिस्तान के संरक्षण वाले आतंकी समूह तालिबान से समझौता करने की जल्दी में है। तालिबान से जल्दबाजी में किया गया कोई समझौता न केवल अफगानिस्तान को खतरे में डालेगा, बल्कि पाकिस्तान के दुस्साहस को भी बढ़ाएगा। यह ठीक है कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह साफ कर दिया कि करतारपुर गलियारे को लेकर अगले हफ्ते शुरू होने वाली बातचीत को द्विपक्षीय वार्ता की शुरुआत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, लेकिन इसका अंदेशा तो है ही कि पाकिस्तान इसकी आड़ में उस दबाव से मुक्त होने की कोशिश कर सकता है, जो पुलवामा हमले के बाद दुनिया ने उस पर बनाया है। यह सही है कि पुलवामा हमले के बाद भारत ने दिखा दिया है कि वह सीमा पार के आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने की क्षमता रखता है, लेकिन अभी यह सुनिश्चित करना शेष है कि आगे भी इस तरह की कार्रवाई की स्थिति में पाकिस्तान पलटवार करने का दुस्साहस न दिखा सके। इस दुस्साहस के दमन के बाद ही पाकिस्तान के सही रास्ते पर चलने की कुछ उम्मीद की जा सकती है।

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