आगे दिक्कतें बढ़ाएगी जीन एडिटंग तकनीक

By Independent Mail | Last Updated: Nov 30 2018 10:03PM
आगे दिक्कतें बढ़ाएगी जीन एडिटंग तकनीक

चीन में जीन एडिटिंग से पैदा कराई गई दो जुड़वां बच्चियां वैज्ञानिक चमत्कारों की ताजा कड़ी हैं। इनके बारे में दावा किया गया है कि दुनिया में पहली मर्तबा जीन संवर्धन तकनीक से पैदा कराई गई ये बच्चियां एचआईवी संक्रमण से महफूज रहेंगी, क्योंकि इनकी आनुवंशिक संरचनाओं में फेरबदल कर प्रतिरोधक क्षमता पैदा कर दी गई है। इस दावे की अभी परख होनी है, पर यदि ये वास्तव में डिजाइनर बेबीज हैं, तो निश्चय ही यह एक क्रांतिकारी पहल है। हालांकि, इसकी नैतिकता पर बड़े सवाल उठेंगे। यह भी पूछा जाएगा कि क्या जीन एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल सुरक्षित है और क्या इससे वंशानुगत बीमारियां रोकी जा सकती हैं। बहरहाल, चीन के शोधकर्ता ही जियांकुई के मुताबिक आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) की मदद से तीन से पांच दिन की जुड़वां बच्चियों के भ्रूण के जींस में उन्होंने जीन एडिटिंग तकनीक से वे जरूरी फेरबदल कर दिए, जिनसे भविष्य में एचआईवी-एड्स संक्रमण से इनका बचाव हो सकेगा। हालांकि, खुद चीन की सरकार इस दावे से हैरान है। लेकिन इस दावे की उपयोगिता महत्वपूर्ण है। अब तक मेडिकल साइंस इलाज के लिए दवाओं और सर्जरी पर निर्भर रही है, उसमें एक नई राह खुल गई है। जियांकुई ने साफ किया है कि जीन एडिटिंग का उद्देश्य आनुवंशिक बीमारियों की रोकथाम या इलाज करना नहीं है, बल्कि इस तरह उन्होंने कुछ लोगों को एक खास विशेषता प्रदान करने की कोशिश की है, ताकि उनमें एचआईवी संक्रमण के खिलाफ प्रतिरोधी ताकत पैदा की जा सके। असल में एड्स के लिए सीसीआर-5 नामक जीन जिम्मेदार होता है। माता-पिता में से किसी को एड्स की बीमारी रही हो तो इसकी आशंका रहती है कि उनके बच्चों में एचआईवी का वायरस चला जाए। जियांकुई ने जीन एडिटिंग की एक खास तकनीक क्रिस्पर-कैस-9 का इस्तेमाल किया और कोशिका के स्तर तक जाकर डीएनए से रोगाणु वाली जीन को काटकर बाहर निकाल दिया। क्रिस्पर कैस-9 एक तरह की आणविक (एटमी) कैंची है, जिसका इस्तेमाल वैज्ञानिक बीमारी पैदा करने वाले जीन को हटाने के लिए करते हैं। ध्यान रहे कि शोध में शामिल इन बच्चियों को जन्म देने के लिए जिन मां-बाप के अंडाणु और शुक्राणु लिए गए थे, उनमें से पुरुष एड्सग्रस्त थे (जिनसे रोगाणु जींस बच्चियों में आए) जबकि महिलाएं इससे सुरक्षित थीं। फिलहाल स्थिति यह है कि चीनी करिश्मे पर कुछ को छोड़कर दुनिया भर के वैज्ञानिकों ने चिंता जता दी है। दरअसल, चीनी वैज्ञानिक का यह कृत्य आगे चलकर दिक्कतें ही बढ़ाएगा।

लेखक अभिषेक कुमार सिंह के ब्लॉग से...

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