जीएसटी में नए परिवर्तन लाभदायक

By Independent Mail | Last Updated: Mar 11 2019 12:44AM
जीएसटी में नए परिवर्तन लाभदायक

अरविंद मोहन

जीएसटी काउंसिल की 10 जनवरी को हुई 24वीं बैठक में ही यह उम्मीद की जा रही थी कि कई अन्य बदलावों के साथ रियल एस्टेट के लिए भी कर ढांचे में बदलाव किए जाएंगे। इस क्षेत्र को मदद की जरूरत भी रही है और लगातार यह मांग आ रही थी कि जब तक सरकार पहल नहीं करेगी, तब तक सबसे ज्यादा रोजगार और आवास जैसी बड़ी जिम्मेवारी निभाने वाले इस क्षेत्र में जान नहीं लौटेगी और उस दिन जैसे ही यह फैसला टला, तो सब ओर से आवाज आने लगी कि सरकार ने चुनाव के मद्देनजर यह फैसला टाला है और चुनाव होने से ठीक पहले इस बारे फैसला करेगी। जिस तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी टीम चौबीस घंटे चुनावी मोड में है और उसकी तैयारी की हर बारीकी पर ध्यान दिया जा रहा है, ऐसे में यह सोच गलत भी नहीं थी, बल्कि उस बैठक में हुए बदलावों को भी चुनाव से जोड़कर देखा गया था। पर इस बार जो फैसले हुए, वे न सिर्फ रियल एस्टेट क्षेत्र को खुश करने वाले हैं, बल्कि आम लोगों को भी खुश करेंगे। लेकिन जो सबसे बड़ी बात है, वह यह है कि इस बार एक पूरा पैकेज है, जिसमें सब स्प्ष्ट बातों के साथ ही करों की दरों में भी भारी कमी कर दी गई है। इस बार नए बनने वाले फ्लैटों पर जीएसटी की दर को 21 फीसद से घटाकर पांच फीसद कर दिया गया है अर्थात आधे से भी कम। अफोर्डेबल हाउसों पर तो यह आठ फीसद से घटाकर सीधे एक फीसद कर दिया गया है। ये दरें पहली अप्रैल से लागू होंगी, लेकिन लगभग हर वर्ग के ग्राहक को लाभ होगा। सो, तारीफ के साथ यह शिकायत भी आई कि ऐसा बदलाव अब आखिरी वक्त में क्यों हुआ है? यह तो पहले ही हो जाना चाहिए था, जिससे निर्माण के क्षेत्र में सक्रियता बढ़ती और अरबों रुपये की फंसी पूंजी के गतिशील होने के साथ ही लाखों लोगों को रोजगार भी मिलता। चार राज्यों-राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के विधानसभा चुनावों से पूर्व जब केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सिर्फ 23 सामानों पर कर घटाने की घोषणा की, तो आम तौर पर एक ऋणात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली और लगा कि यह जो मामूली करेक्शन किया गया था, उसका कोई मतलब न था। इस बार ऐसी कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखी। सिर्फ चुनाव की बात जरूर कई कोनों से उठी। जब वित्त मंत्री ने अपने ब्लॉग में काफी सारी बातें लिखीं, तब अंदाजा हुआ कि सचमुच सरकार की तरफ से किसी बड़े बदलाव की तैयारी है और तब यह उम्मीद लगी थी कि फरवरी अंत तक चुनाव की घोषणा के पूर्व कोई इतनी बड़ी राहत घोषित हो सकती है, जिसका असर संभवत: मतदाताओं के फैसलों पर भी हो। लेकिन ऐसा कोई समग्र पैकेज इस बार नहीं आया-बल्कि इस बार की लिस्ट तो दिसम्बर वाली सूची से भी काफी छोटी है, पर इस बार जिस क्षेत्र को छुआ गया है, वह काफी बड़ा क्षेत्र है। वित्त मंत्री का यह कहना महत्वपूर्ण था कि सरकार सारी जीएसटी दरों को नए तरीके में ढालने की तैयारी कर रही है। साथ ही साथ, लक्जरी आइटमों तथा शराब-सिगरेट जैसी नुकसानदेह चीजों पर उनका इस्तेमाल हतोत्साहित करने के लिए ज्यादा कर लगाने को छोड़ दें, तो ज्यादातर चीजों को एक नये टैक्स रेट के दायरे में लाने जा रही है। यह नई दर 12 से 18 के बीच होगी-उनका इशारा 15 फीसद का था, जबकि अनेक लोग 16 फीसद को व्यावहारिक मानते हैं। वित्त मंत्री के अनुसार ज्यादातर चीजों को इस एक रेट की परिधि में लाने के अलावा कुछ पर पांच फीसद और अनेक पर शून्य फीसद कर लागू करने की तैयारी है। वित्त मंत्री ने सीमेंट पर कर घटाने के संकेत भी दिए, जिसकी चर्चा रेट घटाने की घोषणा के बाद सबसे ज्यादा हुई थी। रियल इस्टेट कारोबार के कई सामानों पर अधिक कर है और उसके लिए कोई घोषणा नहीं हुई है। पर जो कुछ सामने आया है, वह एकदम साफ-सुथरा और बिना कंफ्यूजन वाला है। जीएसटी लाभ के लिए फ्लैट की कीमत 45 लाख रखने के साथ अफोर्डेबल हाउस की परिभाषा भी तय कर दी गई है। इसके मुताबिक, मेट्रो शहरों में दो बेडरूम फ्लैट और नॉन-मेट्रो शहरों में तीन बेडरूम को अफोर्डेबल हाउसिंग के दायरे में लाया गया है। इतना ही नहीं, लाभ लेने वाले मकान के कारपेट एरिया की सीमा 60 वर्ग मीटर रखी गई है, तो बिल्डर द्वारा किसी भी तरह 45 लाख से ज्यादा लेने पर रोक-सी लगा दी गई है। शहरी घरों में 95 फीसद इसी सीमा के अन्दर वाले मकान ही होते हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली की घोषणाओं से लगा कि सरकार जीएसटी के मामले में बड़े बदलाव एक स्वाभाविक क्रम और मूल्यांकन के आधार पर कर रही है। वैसे, आर्थिक जानकारों का यही कहना है कि ये कदम भले ही आर्थिक हैं, पर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि इनका राजनीतिक लाभ मिलेगा। अलबत्ता, एक चीज को लेकर शंका जताई जा रही है कि सारे क्रेडिट का रिकॉर्ड रखने की अनिवार्यता के चलते बिल्डरों पर बोझ बढ़ेगा और कहने की जरूरत नहीं कि उनका मार्जिन भी कम होगा। दूसरी समस्या यह देखने को मिलेगी कि रियल एस्टेट क्षेत्र में फिर से नकदी के प्रयोग का चलन बढ़ जाएगा। इससे इनपुट टैक्स क्रेडिट सिस्टम हटाने से कैश का चलन बढ़ेगा। पहले इसे रोकने के लिए 80 फीसद खरीद संगठित क्षेत्र से कराने की तैयारी थी, लेकिन आखिरी वक्त में इस प्रावधान को नहीं रखा गया। इसलिए माना जाता है कि बिल्डर सीमेंट, स्टील, पेंट वगैरह का रिकॉर्ड नहीं रखेंगे और इसके बजाय उनके कैश लेन-देन बढ़ेगा। पर ये ऊपर की बातें हैं। जीएसटी रेट में बदलाव की ठोस वजहें भी हैं। जब सरकारी खजाने में जीएसटी से वसूली का क्रम नियमित हो गया है और कर वसूली में उतार-चढ़ाव के दौर की जगह स्थिरता आने लगी है, तब उसने ऐसे बदलाव किए हैं और ज्यादा रैशनलाइजेशन की बात कर रही है, बल्कि इधर कई महीनों से नियमित कर वसूली एक लाख करोड़ से ऊपर पहुंचने लगी है। शुरू में इस बात की अनिश्चितता भी थी कि कर वसूली पहले जितनी भी हो पाएगी या नहीं, जबकि राज्यों की देनदारियां बढ़नी ही थीं, लेकिन अब न सिर्फ नियमित वसूली का भरोसा हुआ है, बल्कि लीकेज भी कम हुए हैं। करों की मात्रा में भी स्थिरता आई है।

  • वरिष्ठ पत्रकार
image
Copyrights @ 2017 Independent NewsCorp (P) Ltd., Bhopal. All Right Reserved