एम्स में होगा माकपा नेता तारिगामी का इलाज

By Independent Mail | Last Updated: Sep 6 2019 8:56AM
एम्स में होगा माकपा नेता तारिगामी का इलाज

नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में स्थानांतरित करने का आदेश दिया। तारिगामी अनुच्छेद-370 के रद्द होने के बाद से जम्मू-कश्मीर में नजरबंद हैं। उनके गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि उनका स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। माकपा महासचिव सीताराम येचुरी द्वारा तारिगामी की नजरबंदी को चुनौती देने वाली एक याचिका दायर की गई थी। इस पर प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र की प्रतिक्रिया मांगी। येचुरी के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने अदालत को बताया कि श्रीनगर की अपनी हालिया यात्रा के दौरान येचुरी ने पाया कि तारिगामी के आंदोलन को प्रतिबंधित कर दिया गया है और उनके सुरक्षा वाहनों को वापस ले लिया गया है। रामचंद्रन ने इस संबंध में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। येचुरी ने हिरासत में लिए गए अपनी पार्टी के सहयोगी तारिगामी से मिलने के लिए घाटी की अपनी यात्रा के बाद सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था। शीर्ष अदालत ने 28 अगस्त को येचुरी को तारिगामी से मिलने की अनुमति दी थी। हालांकि कोर्ट ने उन्हें मुलाकात के अलावा किसी अन्य गतिविधि में शामिल होने से रोक दिया था। यह आदेश येचुरी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के बाद आया, जिसके तहत पांच अगस्त को अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के बाद तारिगामी की नजरबंदी को चुनौती दी गई थी। याचिका में यह भी कहा गया है कि तारिगामी का स्वास्थ्य बेहतर नहीं है और येचुरी उनसे मिलना चाहते हैं। येचुरी ने अपने हलफनामे में शीर्ष अदालत को बताया कि तारिगामी और उनके परिवार के सदस्यों को पिछले 25 दिनों से घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं है और न ही बाहर के किसी व्यक्ति को उनके घर में प्रवेश करने की अनुमति दी गई है। येचुरी ने हलफनामे में कहा कि वह और उनके परिवार के सदस्य वास्तव में हाउस अरेस्ट हैं। येचुरी ने अदालत को यह भी बताया कि तारिगामी विभिन्न बीमारियों से पीड़ित हैं, लेकिन उन्हें अस्पताल जाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि बार-बार अनुरोध करने पर एक हृदय रोग विशेषज्ञ और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट को घर पर ही आने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद 24 अगस्त को उन्हें अस्पताल जाने की अनुमति दी गई। तारिगामी को हृदय से संबंधित बीमारी से लेकर धमनी रोग, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (फेफड़ों संबंधी बीमारी), और बाएं हाथ में सुन्नता सहित कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है। येचुरी ने अपने हलफनामे में अदालत से अनुरोध किया कि वह यहां तारिगामी को एम्स में स्थानांतरित करने के आदेश दें। हलफनामे पर ध्यान देने के बाद शीर्ष अदालत ने कहा, "ऐसा लगता है कि उन्हें चिकित्सा सहायता की आवश्यकता है और हम उन्हें एम्स में स्थानांतरित करने के लिए इच्छुक हैं।

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