कैबिनेट विस्तार से पहले सियासत जोरों पर

By Independent Mail | Last Updated: Mar 30 2018 4:15PM
कैबिनेट विस्तार से पहले ही सियासत जोरों पर

इंडिपेंडेंट मेल, भोपाल। प्रदेश में होने वाले कैबिनेट विस्तार से पहले बीजेपी के बीच दावेदारों की जंग तेज हो गई है। पार्टी में एक अनार सौ बीमार की तर्ज पर मंत्रिमंडल के खाली तीन पदों के लिए डेढ़ दर्जन से ज्यादा दावेदार मैदान में हैं, लेकिन असल परेशानी पार्टी को उन विधायकों से है, जो वरिष्ठ नेताओं के पुत्र हैं और लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। 

पार्टी के सामने अब ये संकट है कि इन नेताओं को दरकिनार करने से पार्टी को चुनावी दौर में खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इधर, सियासी दिग्गजों के परिवार से नाता रखने वाले ये विधायक अब दूसरे नेता पुत्रों का हवाला देते हुए संगठन और सरकार के सामने मंत्री पद की दावेदारी कर रहे हैं। इनमें से कई विधायकों की दावेदारी सियासी नजरिए से मजबूत भी दिखाई दे रही है। 

केवल दो सीटों के लिए है जंग 

प्रदेश कैबिनेट में कुल तीन सीट खाली हैं। इसमें से गोपीलाल जाटव को मंत्री बनाने की बात शिवराज सिंह चौहान पहले ही कह चुके हैं। अजा कोटे से आने वाले गोपीलाल जाटव अशोकनगर के विधायक हैं और मुंगावली-कोलारस की आचार संहिता के चलते उनका मंत्री पद विवादों में अटक गया था। शिवराज चुनावी साल होने के नाते किसी भी मंत्री को कैबिनेट से बाहर करने का रिस्क भी नहीं लेगें, ऐसे में बचने वाली दो सीटों पर घमासान मचना तय है। कैबिनेट में जगह हासिल करने के लिए एक दर्जन पूर्व मंत्री भी कतार में हैं। इधर कई विधायक मंत्रिमंडल विस्तार की आहट के बाद से ही बेहद सक्रिय हैं और संगठन और पार्टी के स्तर पर अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। 

इन विधायकों की दावेदारी मजबूत 

नीमच जिले की जावद सीट से पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरेंद्र कुमार सखलेचा के पुत्र ओमप्रकाश सखलेचा का दावा बेहद मजबूत माना जा रहा है। इस अंचल से फिलहाल एक भी मंत्री नहीं है, लिहाजा सखलेचा को इंकार कर पाना पार्टी के लिए बेहद मुश्किल होगा। वे वरिष्ठता के मानक पर भी खरा उतरते हैं और लगातार तीन बार से विधायक हैं। इधर रतलाम जिले की जावरा सीट से विधायक राजेंद्र पांडे भी कैबिनेट के अहम दावेदार हैं। वे मंदसौर से सात बार सांसद और पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय डॉ. लक्ष्मी नारायण पांडे के सुपुत्र हैं। वे दो बार के विधायक हैं। इसके साथ ही आदिवासी महिला कोटे से निर्मला भूरिया भी मंत्री पद की प्रबल दावेदार हैं। वे बीजेपी के वरिष्ठ नेता रहे स्वर्गीय दिलीप सिंह भूरिया की बेटी हैं और अब तक चार बार चुनाव जीत चुकी हैं। फिलहाल पूर्व सांसद कैलाश सारंग के पुत्र विश्वास सांरग, पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी और पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा को मंत्री बनाया जा चुका है। 

एक्सपर्ट कमेंट  

ये सही है कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के परिजन भी राजनीतिक तौर पर परिपक्व हो गए हैं और कैबिनेट के लिए उनकी दावेदारी बेहद मजबूत है। पार्टी को चुनावी साल में इन विधायकों की दावेदारी के बारे में गंभीरता से सोचना होगा। इतना तो तय है कि अगर इन नेताओ को दरकिनार किया गया तो इसका विपरीत परिणाम पार्टी को भुगतना पड़ सकता है। 

- शिव अनुराग पटैरिया, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक

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