10 बिस्तरों में सिमट कर रह गया 100 बिस्तर वाले अस्पताल का प्लान

By Independent Mail | Last Updated: Mar 17 2018 6:37PM
10 बिस्तरों में सिमट कर रह गया 100 बिस्तर वाले अस्पताल का प्लान

 

इंडिपेंडेंट मेल, भोपाल। ग्रामीण क्षेत्रों में उपचार की आसान व्यवस्था बनाने के लिए लाई गई 100 बिस्तर की योजना को शासन ने झटका दे दिया है। अब सौ बिस्तरों के अस्पताल का प्लान 10 बिस्तरों में सिमटकर रह गया है।

राज्य सरकार के प्रयासों को शासन की शर्तों से मिले इस झटके के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र निवेश प्रोत्साहन योजना फेल हो गई है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सौ से अधिक बिस्तरों का मल्टीस्पेशलिटी चिकित्सालय शुरू करने के लिए राज्य सरकार की स्वास्थ्य क्षेत्र निवेश प्रोत्साहन योजना फ्लॉप हो गई। अब स्वास्थ्य विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में दस बिस्तरों के अस्पताल खोलने के लिए 50 फीसदी तक अनुदान देने का प्लान तैयार करेगा। स्वास्थ्य क्षेत्र निवेश प्रोत्साहन योजना में मल्टीस्पेशलिटी, सुपर स्पेशलिटी और मेडिकल कॉलेज के लिए निजी निवेशकों को प्रोत्साहित करने जमीन देने और पांच करोड़ रुपए तक अनुदान देने की योजना है। इस योजना के तहत अभी तक सिर्फ नर्मदा अस्पताल भोपाल को 2.82 करोड़, बंसल अस्पताल भोपाल को पांच करोड़ और शैलवी अस्पताल जबलपुर को पांच करोड़ मिले हैं, जबकि शैलजी अस्पताल इंदौर पांच करोड़ और सार्थक अस्पताल सतना तीन करोड़ मिलने के इंतजार में हैं। बाकी 47 जिलों में एक भी निवेशक आगे नहीं आए हैं।

ये है वजह...

सुपर स्पेशलिटी के लिए करीब 60 करोड़ की लागत आती है। एनएबीएच के लिए 6 से 8 माह का समय लगता है। 100 से अधिक बिस्तर वाले अस्पताल होने, शासकीय भूमि में रियायत भूमि के मूल्य को छोड़कर कुल परियोजना लागत की 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होने और आवंटित भूमि पर परियोजना निर्माण का कार्य एक वर्ष में प्रारंभ करने की अनिवार्यता संबंधी शर्तें इसके आड़े आ रही हैं। मल्टीस्पेशलिटी चिकित्सालय के लिए तीन या तीन से अधिक स्पेशलिटी सेवाएं होने तथा कम से कम 100 बिस्तर का होने संबंधी शर्त होना भी जरूरी है।

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