25 मार्च से होने वाली एमबीबीएस की काउंसलिंग ओबीसी के 14 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर होगी

By Independent Mail | Last Updated: Mar 21 2019 12:05AM
25 मार्च से होने वाली एमबीबीएस की काउंसलिंग ओबीसी के 14 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर होगी

इंडिपेंडेंटमेल, जबलपुर। कमलनाथ सरकार के ओबीसी को 14 की जगह 27 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले पर मंगलवार को हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। इसके साथ ही न्यायमूर्ति आरएस झा और न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि 25 मार्च से होने वाली एमबीबीएस की काउंसलिंग ओबीसी के 14 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर ही की जाएगी। बता दें कि कमलनाथ सरकार के ओबीसी आरक्षण की सीमा को बढ़ाने के फैसले को भोपाल निवासी ऋचा पांडेय, जबलपुर निवासी असिता दुबे और सुमन सिंह ने कोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-16 में प्रावधान है कि एससी-एसटी और ओबीसी को मिलाकर 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं दिया जा सकता। प्रदेश सरकार का यह फैसला अनुच्छेद-16 का उल्लंघन है। इस आरक्षण पर रोक लगाने के साथ ही अदालत ने प्रदेश सरकार और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को नोटिस भी जारी कर दिया है।

अभी किसका कितना कोटा

इस समय प्रदेश में अनुसूचित जातियों को 16, जबकि अनुसूचित जनजातियों को 20 फीसद आरक्षण मिलता है। दरअसल, प्रदेश में जनजातियों की आबादी 30 प्रतिशत के आसपास है। ओबीसी को प्रदेश में 14 फीसद आरक्षण मिलता है। राज्य सरकार ने आठ मार्च को अध्यादेश जारी करके पिछड़ों का आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसद कर दिया था। इस तरह प्रदेश में कुल आरक्षण 63 फीसद हो गया था। सरकार ने यह भी कहा था कि एमबीबीएस की 25 मार्च को होने वाली काउंसिलिंग 27 फीसद ओबीसी कोटे के आधार पर होगी। प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने नए ओबीसी आरक्षण के हिसाब से एमबीबीएस की काउंसिलिंग की अधिसूचना भी जारी कर दी थी।

अब आगे क्या

कानून के जानकारों का कहना है कि हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई करने के बाद तय करेगा कि प्रदेश में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है या नहीं। चूंकि तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों में आरक्षण की सीमा 50 फीसद से ऊपर जा चुकी है, इसलिए सरकार को राहत भी मिल सकती है।

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