सुनवाई से पहले सरकारें सुधार लें आंकड़े

By Independent Mail | Last Updated: Mar 15 2019 6:33AM
सुनवाई से पहले सरकारें सुधार लें आंकड़े

इंडिपेंडेंटमेल, भोपाल। गैस पीड़ितों के चार संगठनों ने गुरुवार को पत्रकार कॉन्फ्रेंस आयोजित कर कहा कि केंद्र और राज्य सरकार गैस कांड मामले में अतिरिक्त मुआवजे के लिए लगाई गई सुधार याचिका में मौतों और बीमारियों के आंकड़े उच्चतम न्यायालय में अगले महीने होने जा रही सुनवाई के पहले सुधार लें। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के प्रतिनिधियों ने भोपाल के हर गैस पीड़ित को मुआवजे में 5 लाख रुपये दिलवाने का वादा किया है, लेकिन केंद्र तथा प्रदेश सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत मौतों और बीमारियों के आंकड़े सुधारने के बाद ही यह वादा पूरा किया जा सकता है। डाउ कार्बाइड के खिलाफ 'बच्चे' नामक संगठन की नौशीन खान ने कहा कि उदासीन सरकारों के संवेदनहीन मंत्रियों से किया गया पत्राचार बहुत निराशाजनक है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा कि पिछले साल दिसंबर में हमने प्रधानमंत्री से भोपाल गैस कांड के संबंध में कार्य करने के लिए अधिकृत केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय को यह निर्देश देने की गुजारिश की थी, कि वह वैज्ञानिक तथ्यों और सरकारी दस्तावेजों के आधार पर सुधार याचिका में अपेक्षित सुधार करें, लेकिन आज तक उन्हें प्रधानमंत्री के दफ्तर से कोई जवाब नहीं मिला।

पत्र का आज तक नहीं मिला जवाब

गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने कहा कि इस साल जनवरी में प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को भेजी चिट्ठी का भी जवाब नहीं आया। हमने अपनी चिट्ठी में उन दस्तावेजी सबूतों का जिक्र किया था, जो यह दिखाते हैं कि जहरीली गैस की वजह से पीड़ितों को पहुंचे नुकसान की सही जानकारी प्रदेश सरकार जानबूझकर छिपा रही है और सर्वोच्च न्यायालय को गुमराह कर रही है। हमने सरकारी दस्तावेजों और अस्पतालों के रिकॉर्ड में गैस कांड की वजह से हुई मौतों और बीमारियों के सही आंकड़े जुटाने के लिए चिट्ठी लिखी, लेकिन आज तक उनका जवाब नहीं आया।

सड़क पर उतरकर लड़ेंगे लड़ाई

भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना ढींगरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस साल जनवरी में हमने भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री को भी चिट्ठी लिखकर मौतों और बीमारियों के सही आंकड़े जुटाने के साथ-साथ इन आंकड़ों को रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय को उपलब्ध करने की मांग की थी। पर आज तक जवाब नहीं मिला। इस मुद्दे पर मंत्री की चुप्पी रहस्यमय है, क्योंकि उनका यह दावा है कि विपक्ष में रहते हुए उन्होंने विधानसभा में हर गैस पीड़ित को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग हमेशा उठाई है। केंद्र और प्रदेश की सरकारों ने यदि हमारी मांग पर गौर नहीं किया तो सभी संगठन इस लड़ाई को कानूनी तौर पर और सड़कों पर लड़ेंगे।

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