बंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने किया मीटू अभियान का समर्थन

By Independent Mail | Last Updated: Oct 12 2018 10:14PM
बंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने किया मीटू अभियान का समर्थन

एजेंसी, मुंबई। बंबई उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति गौतम पटेल देश में चल रहे 'मी टू' अभियान के समर्थन में खुल कर आए हैं और कहा है कि पितृसत्तात्मक दुनिया महिलाओं को खुल कर बोलने की अनुमति नहीं देती है। न्यायमूर्ति पटेल ने गुरुवार को कहा कि वह उन महिलाओं का 'पूरी तरह समर्थन' करते हैं जिन्होंने यौन उत्पीड़न के अनुभवों को साझा करने और प्रताड़ित करने वालों का नाम उजागर करने का निर्णय किया है।इंडियन मर्चेंट चैम्बर की महिला शाखा की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति पटेल ने अमेरिकी हास्य अभिनेता बिल कॉस्बी के मामले का हवाला दिया । बिल को 14 पहले की यौन हिंसा की घटना के सिलसिले में पिछले महीने सजा हुई है। उन्होंने कहा, मैं उन महिलाओं का पूरी तरह समर्थन करता हूं जो सामने आ रही हैं और जिनके पास बोलने का साहस है क्योंकि किसी वक्त बोलने के लिए बहुत अधिक साहस की जरूरत होती है।

महिलाओं का आगे न आना गंभीर समस्या:

पटेल ने कहा, महिलायें आगे क्यों नहीं आती है, यह एक गंभीर समस्या है । इसका कारण है हमारी दुनिया का पितृसत्तात्मक होना । यह इतना पितृसत्तात्मक है और पूर्वाग्रह से ग्रसित है कि महिलाओं को कई बार बोलने की इजाजत नहीं देता जब उन्हें बेालना चाहिए या वे बोल सकती थीं। उन्होंने कहा, अब हमें इस पर चर्चा करने की आवश्यकता है कि पूरी तरह इस छिन्न भिन्न और आस्यास्पद बन चुकी व्यवस्था से कैसे निताज पायी जाए और हमें ही इसकी पहचान करनी है। न्यायमूर्ति पटेल ने कहा कि न्यायपालिका में भी बड़े पैमाने पर इस तरह की घटनायें हो रही है और यह भी पितृसत्तात्मक संस्कृति से घिरी हुई है।

अदालतों पर बढ़ रहा बोझ:

पटेल ने इस दौरान अदालतों में बढ़ते बोझ की तरफ भी ध्यान आकर्षित कराने की कोशिश की जो देश की न्यायपालिका के समक्ष एक अन्य समस्या है। उन्होंने कहा, दिसंबर 2019 तक बंबई उच्च न्यायालय के 11 न्यायाधीश अवकाश ग्रहण करेंगे और अभी केवल चार नामो को अंतिम रूप दिया गया है । हम एक बड़ी समस्या का सामना करने जा रहे हैं

यौन उत्पीड़न को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए: संरा महासभा प्रवक्ता

एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा की प्रवक्ता ने कहा है कि पत्रकारों और मीडिया के अन्य सदस्यों के यौन उत्पीड़न और शोषण को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। भारत में मी टू आंदोलन के जोर पकड़ने के संबंध में पूछे गए सवाल के जवाब में प्रवक्ता का यह बयान आया है । देश में मीडिया, मनोरंजन और पत्रकारिता क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं ने आगे आ कर अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न एवं शोषण की बात लोगों से साझा की है । इन महिलाओं के पुरुष बॉस और साथ काम करने वाले लोगों ने उनका उत्पीड़न एवं शोषण किया था। इसमें प्रमुख राजनेता और कलाकार भी शामिल हैं। मारिया की प्रवक्ता मोनिका ग्रेले ने गुरुवार को दैनिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, महासभा की अध्यक्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यौन उत्पीड़न, यौन शोषण तथा यौन हिंसा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा । चूंकि हम मीडिया के लोगों के बारे में बात कर रहे हैं, तो काम करने के दौरान पत्रकारों के साथ इस तरह के उत्पीड़न को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ।

इस अभियान में हिस्सा ले रही महिलाएं

मी टू अभियान के बाद बड़े पैमाने पर महिलायें सोशल मीडिया पर यौन उत्पीड़न करने वाले का नाम उजागर कर आपबीती बता रही हैं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग कर रही हैं । मोनिका ने कहा कि वह किसी विशेष मामले पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकती क्योंकि उन्हें इन मामलों की जानकारी नहीं है । उन्होंने कहा कि महासभा अध्यक्ष का रुख स्पष्ट है कि यौन उत्पीड़न कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा । प्रवक्ता ने कहा, इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिल्कुल नहीं, बिल्कुल नहीं। बिल्कुल नहीं से न कम न अधिक । यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है।

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