गंगा के राजनीतिक इस्तेमाल के लिए मोदी की निंदा

By Independent Mail | Last Updated: Oct 15 2018 10:38PM
गंगा के राजनीतिक इस्तेमाल के लिए मोदी की निंदा

अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन की राष्ट्रीय सचिव सुमन आर. अग्रवाल ने लिखा खत

एजेंसी, मुंबई। अग्रवाल समाज ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर गंगा नदी के मुद्दे को राजनीतिक मकसद के लिए इस्तेमाल करने और पिछले चार वर्षों में पवित्र नदी की सफाई के वादे को पूरा नहीं करने को लेकर निशाना साधा। मोदी को लिखे एक पत्र में अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन (एबीएएस) की राष्ट्रीय सचिव सुमन आर. अग्रवाल ने कहा कि गांगा के लिए 111 दिनों का लंबा उपवास रखने के बाद नौ अक्टूबर को इंजीनियर से पर्यावरणविद् बने जी.डी. अग्रवाल का निधन हो गया। अपने उपवास के दौरान, उन्होंने तीन बार मोदी को खत लिखा, लेकिन सरकार ने उन्हें जवाब देना मुनासिब नहीं समझा। लेकिन अग्रवाल के निधन के बाद मोदी, सभी मंत्रियों और सरकार ने प्रकृति एवं पर्यावरण में उनके महान योगदान को लेकर ट्वीट किए।

प्रधानमंत्री ने नहीं की एक बार भी मुलाकात

अग्रवाल ने कहा, अगर सरकार अग्रवाल के निधन को लेकर इतना ही दुखी है तो क्यों प्रधानमंत्री ने उनसे एक बार भी मुलाकात नहीं की और उनकी वास्तविक मांगों को क्यों नहीं स्वीकारा या कम से कम उनके किसी खत का तो जवाब देते? मोदी सरकार क्यों इस तरह का पाखंड और दोहरा चरित्र दिखा रही है। उन्होंने कहा कि दिवंगत जी.डी. अग्रवाल ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने खत में विश्वास जताया था कि मोदी के 2014 में सत्ता संभालने के बाद गंगा की सफाई को लेकर ठोस कदम उठाए जाएंगे, लेकिन उन्हें बाद में अहसास हुआ कि पिछले साढ़े चार साल में कुछ भी नहीं हुआ।

चुनावी एजेंडे में लिया था मुझे गंगा मां ने बुलाया का नारा

इन उम्मीदों को बल उस वक्त मिला, जब मोदी ने 2014 में अपने पूरे चुनावी एजेंडे को मां गंगा के मुद्दे पर केंद्रित कर दिया और कहा कि 'न मैं आया हूं, न ही भेजा गया हूं : मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है। सुमन ने अपने खत में कहा है, क्यों मां गंगा ने 2014 में स्वघोषित बेटे नरेंद्र मोदी को सत्ता की चाबी देने के बाद दोबारा नहीं बुलाया? मोदी ने उसके बाद सिर्फ 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान गंगा मां को याद किया।

मनमोहन सिंह ने लिया था कई बार संज्ञान

इसके विपरीत दिवंगत अग्रवाल ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि कैसे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनके कई उपवासों पर संज्ञान लिया और गंगा की खातिर एक बड़ी परियोजना में सभी गतिविधियों को बंद करवा दिया या रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि 10 करोड़ की आबादी वाला अग्रवाल समुदाय पर्यावरणविद् के निधन पर खुद को अनाथ महसूस कर रहा है। उन्होंने चेताया कि वे इसे याद रखेंगे और 2019 चुनाव में अपनी भावनाओं का इजहार करेंगे।

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