ज्यादा लाड़-प्यार बच्चों को बना सकता है जिद्दी, अपनाएं ये टिप्स

By Independent Mail | Last Updated: Feb 25 2019 8:34PM
ज्यादा लाड़-प्यार बच्चों को बना सकता है जिद्दी, अपनाएं ये टिप्स

अक्सर देखा जाता है कि इकलौते बच्चे गुमशुम, शर्मीले या फिर हाइपर एक्टिव होते हैं। ज्यादा लाड़-प्यार मिलने से कभी-कभी वह जिद्दी भी बन जाते हैं और किसी भी बात पर बहुत ज्यादा रिएक्ट करते हैं। अगर वह किसी बात की जिद पकड़ लें तो उन्हें मनाना पैरेंट्स के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में उन्हें केयरिंग और शेयरिंग सिखाना बेहद जरूरी है। इसे लेकर एक्सपर्ट ने बच्चों की परवरिश को लेकर कुछ टिप्स शेयर किए हैं।

बच्चों की हर बात सुनें

कोशांबी स्थित यशोदा सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल की कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट डॉ. रीमा सहगल कहती हैं कि हर बच्चे को माता-पिता का समय चाहिए होता है। उनके मन में बहुत सारी बातें होती हैं, जिसे वह बयां नहीं कर पाते। आजकल के पैरंट्स के पास उनकी पूरी बातें सुनने का समय भी नहीं होता है। ऐसे में बच्चों को भावनात्मक रूप से संतुष्ट करने के लिए अभिभावकों को अच्छा श्रोता होना बहुत जरूरी है। आप बच्चे को दिन में एक बार यह जरूर महसूस करवाएं कि वह आपके लिए बहुत स्पेशल हैं।

अपना पूरा समय दें

राज नगर एक्सटेंशन की रहने वाली प्रेरणा अरोड़ा का कहना है कि बच्चों को कीमती खिलौने और मोबाइल की जरूरत से ज्यादा आपका समय चाहिए होता है। अगर आप वर्किंग कपल हैं, तो कोशिश करें कि बच्चे को पूरा समय दें। उनके साथ खेलें। उनके साथ उनकी किताबों या कपड़ों की अलमारी साफ करें। किचन में कुछ-कुछ नई चीजें सिखाएं। सोते समय अच्छी कहानियां सुनाएं। उन्हें बाहर खेलने भेजें, उनका सोशल दायरा भी बढ़ाना जरूरी है।

दोस्त की तरह साथ दें

रीडर अंजलि के मुताबिक, इकलौते बच्चे के साथ दोस्त की तरह रहें। वह कहती हैं, मेरा बेटा तीन साल का है और प्रीमेच्योर स्पेशल चाइल्ड है। इस कारण से हमने तय कर लिया कि बस एक ही संतान रखेंगे। जब ये पैदा हुआ तो डॉक्टर ने कहा कि वह न कभी बोल पाएगा, न बैठ पाएगा और न चल पाएगा। लेकिन पॉजिटिव सोच के साथ मैं उसकी दोस्त बनी और आज वह बोल और चल सकता है। इकलौते बच्चों में आत्मविश्वास की कमी होती है, ऐसे में हमें उसे प्रोत्साहित करना चाहिए।

जिम्मेदारियों का अहसास कराएं

गाजियाबाद की निशा शर्मा कहती हैं कि बच्चे को लाड़-प्यार जरूर दें, लेकिन उन्हें जिम्मेदारियों का अहसास भी कराएं। उन्हें जीवन की वास्तविकता के बारे में बताएं। उसे छोटी-छोटी जिम्मेदारी दें और कुछ मामलों पर उसकी राय लें, ताकि उसे महसूस हो कि वह आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बचपन से उसे कुछ छोटे-मोटे काम देकर उसकी जिम्मेदारी तय करें, इससे उसमें आत्मविश्वास बढ़ेगा। बच्चा जिद्द करे तो उसके साथ प्यार से पेश आएं।

शेयरिंग-केयरिंग मंत्र

जब अकेला बच्चा होता है तो घर के सभी सदस्य उसके आगे-पीछे घूमते हैं, लेकिन बच्चे के साथ खेलते-खेलते उसे शेयरिंग और केयरिंग भी सिखानी जरूरी है। घर में दादी-दादा का आदर सम्मान, सेवा भाव और अपनी चीजें दूसरे के साथ शेयर करने की आदत सिखाएंगे तो वह जिद्दी नहीं बनेगा।

बच्चों में संवेदनाएं जगाएं

इंदिरापुरम, गाजियाबाद की विमला पांडेय कहती हैं कि माता-पिता बच्चे से संवाद करें। उससे हेल्दी डिस्कशन करके संवेदनशील इंसान बनाया जा सकता है। उनकी कोमल मन की भावनाओं को पहचानें और उसके मुताबिक प्रतिक्रिया दें ,ताकि वह चिड़चिड़ेपन, उत्साह, घबराहट और डर जैसी भावनाओं को भी समझ सकें। बच्चे के मन में कोई बात दबी न रहने दें, उसे बोलने का अवसर दें और सुनते समय अपनी दिलचस्पी जाहिर करें।

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