अजीब हालात: सीएस व एडीजी की जांच की फाइल एक दूसरे के पास

By Independent Mail | Last Updated: Jan 22 2018 8:24PM
अजीब हालात: सीएस व एडीजी की जांच की फाइल एक दूसरे के पास
इंडिपेंडेंट मेल, रांची। झारखंड बजट सत्र के चौथे दिन सोमवार को सीएस मामले पर हंगामा होने के बाद सीएम रघुवर दास ने सदन में कहा कि मामले की जांच स्पेशल ब्रांच को दी गई है। विभाग अपना काम कर रहा है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। दरअसल इंडसइंड बैंक के अधिकारी अद्वैत हेबर ने एक ट्वीट किया था। ट्वीट में उन्होंने लिखा था कि सीएस पैसा रिलीज करने के एवज में अपने बेटे की कंपनी में निवेश करने को कह रही हैं। मामले पर 31 अगस्त को सरयू राय ने सीएम को एक खत लिखा, जिसमें पूरे प्रकरण की जांच करने को लिखा गया था। पत्र के आलोक में सीएम ने स्पेशल ब्रांच के एडीजी अनुराग गुप्ता को जांच के लिए लिखा, लेकिन अभी तक विभाग के तरफ से जांचकर्ता तक नियुक्त नहीं किया गया है।
 
स्पेशल ब्रांच नहीं करती भ्रष्टाचार की जांच
किसी भी राज्य में स्पेशल ब्रांच का काम किसी भ्रष्टाचार से जुड़े मामले की जांच करना नहीं होता है। स्पेशल ब्रांच का काम शासन के खिलाफ चल रही गतिविधियों की जानकारी सरकार को देना होता है। राजनीति से जुड़ी सूचनाओं को इक्कट्ठा करना भी स्पेशल ब्रांच का ही काम  होता है। संयुक्त बिहार के वक्त इस विभाग को नक्सल गतिविधी से जुड़े मामलों पर भी काम करने का जिम्मा सौंपा गया, लेकिन इस विभाग से कभी भी क्राइम या भ्रष्टाचार से जुड़े मामले पर काम करने को नहीं कहा गया। ना ही विभाग ने अपनी तरफ से कभी ऐसा काम किया। ऐसे कामों के लिए राज्य में विजिलेंस और सीआईडी पहले से ही मौजूद है।
 
चुनाव आयोग भी लिख चुका है पत्र
राज्यसभा चुनाव के वक्त हॉर्स ट्रेडिंग के मामले में चुनाव आयोग की तरफ से सरकार को एक चिट्ठी लिखी गयी थी। चिट्ठी में स्पेशल ब्रांच के एडीजी अनुराग गुप्ता पर एफआईआर करने की बात लिखी हुई थी। ये फाइल राज्य की सीएस राजबाला वर्मा के पास है। वहीं सीएम रघुवर दास ने ट्वीट मामले में सीएस राजबाला वर्मा की जांच का जिम्मा स्पेशल ब्रांच के एडीजी अनुराग गुप्ता को दे दिया। ऐसे में दोनों पदाधिकारियों के टेबल पर एक-दूसरे के मामले के जांच की फाइल पड़ी हुई है। ना ही अनुराग गुप्ता पर एफआईआर दर्ज हुई है और ना ही सीएस मामले में जांच के लिए कोई जांचकर्ता ही नियुक्त किया गया है।
 
अब जबकि सीएस के पास एडीजी की फाइल पड़ी हुई है और एडीजी के पास सीएस की फाइल, ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि कैसे दोनों में से कोई अधिकारी एक-दूसरे के खिलाफ कार्रवाई करता है।
 
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