आम चुनाव: गठबंधन के मामले में यूपीए से आगे निकला एनडीए

By Independent Mail | Last Updated: Mar 11 2019 12:42AM
आम चुनाव: गठबंधन के मामले में यूपीए से आगे निकला एनडीए

महागठबंधन में अभी भी सीटों को लेकर चल रही माथापच्ची

एजेंसी, रांची। एनडीए ने झारखंड में लोकसभा चुनाव पूर्व की बाजी मार ली है। आजसू-भाजपा ने बिना शोर मचाए झारखंड में लोकसभा चुनाव के लिए समझौता कर लिया और इसकी सार्वजनिक घोषणा भी कर दी। दूसरी तरफ पिछले दो माह से महागठबंधन की कवायद में जुटे चार प्रमुख विपक्षी दलों के बीच अब भी सीट शेयरिंग फाइनल नहीं हो पाई है। इसकी वजह से महागठबंधन के दलों के बीच अलग -अलग सीटों को लेकर अब भी दावे किए जा रहे हैं। यही वजह है कि गोड्डा पर झाविमो लगातार अपना दबाव बढ़ाता जा रहा है तो दूसरी ओर झामुमो जमशेदपुर पर दबाव बढ़ा रहा है। कांग्रेस के भीतर अपने ही लोगों द्वारा जिस तरह से संसदीय क्षेत्र के लिए दबाव बनाया जा रहा है उससे भी पार्टी के राष्ट्रीय नेता असहज है। गोड्डा सीट के लिए पूर्व सांसद फुरकान अंसारी और उनके पुत्र सह विधायक डॉ. इरफान अंसारी का पार्टी के केंद्रीय नेताओं पर दबाव है उससे उन्हें निर्णय लेने में परेशानी हो रही है। फुरकान को गोड्डा का टिकट देने के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय मुख्यालय में भी केंद्रीय नेताओं की घेराबंदी की जा रही है। उनके समर्थक अल्पसंख्यक होने का हवाला देते हुए कांग्रेस के बड़े नेताओं पर यह दबाव बना रहे हैं कि कांग्रेस को एक अल्पसंख्यक सीट दी जानी चाहिए। गोड्डा इसके लिए सबसे बेहतर विकल्प है।

खूंटी सीट के लिए प्रदीप कुमार भी कर रहे जोरआजमाइश

इरफान अंसारी भी अपने हिसाब से आलाकमान के समक्ष पैरवी में लगे हैं। इसके अलावा राहुल गांधी की रांची में हुई रैली के दौरान भी उन्होंने इस संबंध में केंद्रीय नेतृत्व से बात करने का प्रयास किया था। जबकि दूसरी ओर झाविमो भी गोड्डा के लिए उसी रूप में अड़ा हुआ है। वैसे अब तक की स्थिति में गोड्डा झाविमो और जमशेदपुर झामुमो के खाते में ही जाता दिख रहा है। इधर, खूंटी संसदीय क्षेत्र को लेकर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सह प्रदीप कुमार बलमुचू काफी गंभीर हैं और लगातार तैयारी में लगे हुए हैं। बलमुचू को पार्टी के कुछ केंद्रीय नेताओं का समर्थन भी है। ऐसे में अगर कांग्रेस खूंटी अपने पास रखने का प्रयास करती है तो उसे हर हाल में जमशेदपुर सीट झामुमो को सौंपना पड़ेगा। कोल्हान की दूसरी सीट पर पूर्व सीएम मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा का उम्मीदवार बनना लगभग तय है। इसलिए झामुमो को खूंटी सीट नहीं मिलने पर उसका कोल्हान में जमशेदपुर सीट पर दावा मजबूत हो जाता है।

कांग्रेस अपने नेताओं को लेकर उहापोह की स्थिति में

इधर पूर्व डीजीपी राजीव कुमार के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब उनका भी दावा पलामू को लेकर है। जबकि पलामू सीट पर राजद काफी जोर है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस स्वयं इस उहापोह में है कि वह खास तौर पर गोड्डा, खूंटी, जमशेदपुर, पलामू जैसी सीटों पर क्या निर्णय करे। जब तक वह इस पर निर्णय नहीं ले पाती है तब तक सहयोगी दलों के बीच सीटों के शेयरिंग का मामला फंसा रहेगा। महागठबंधन के सहयोगी दलों का यह भी दबाव है कि जल्द से जल्द सीटों की शेयरिंग का मामला फाइनल कर दिया जाए। इधर, कांग्रेस के साथ विधानसभा चुनाव को लेकर भी परेशानी है। कांग्रेस के सहयोगी दल खासतौर पर झामुमो लोकसभा सीटों के साथ ही विधानसभा क्षेत्र की शेयरिंग और विधानसभा में नेतृत्व की घोषणा के लिए दबाव है। इसलिए कांग्रेस को महागठबंधन को मूर्त रूप देने के लिए लोकसभा के साथ ही विधानसभा सीटों की शेयरिंग को भी फाइनल करना होगा।

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