ममता के हिंदीभाषी प्रेम के मायने

By Independent Mail | Last Updated: Sep 9 2018 5:38PM
ममता के हिंदीभाषी प्रेम के मायने

एक समय पश्चिम बंगाल औद्योगिक रूप से सबसे ज्यादा समृद्ध था। दरअसल, अंग्रेजों ने कोलकाता को अपनी राजधानी बनाया था, इसलिए उन्होंने इस शहर के आसपास के इलाकों का औद्योगिक विकास भी खूब किया था। यह वह समय था, जब रोजगार की खोज में दूसरे राज्यों के लोग पश्चिम बंगाल पहुंचे और बस गये। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से यहां आने वालों की तादाद अधिक थी। इसके अलावा पंजाबी, मद्रासी समेत अन्य बोलचाल वाले लोग भी यहां आकर रहने लगे। विभिन्न जातियों-धर्मों और भाषाओं के लोगों की माैदूगी के कारण पश्चिम बंगाल को आज भी 'मिनी भारत' कहा जा सकता है। अलबत्ता, वहां हिंदीभाषियों को खास पहचान कभी नहीं मिली। कोलकाता व आसपास के क्षेत्रों में इनकी संख्या एक करोड़ से अधिक होने के बावजूद ये पश्चिम बंगाल में हमेशा राजनीतिक रूप से हाशिये पर रहे। अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंदीभाषियों के महत्व को समझ लिया है और उनकी अहमियत को भी खुलकर स्वीकारा है। वह बिहारी समाज की ओर से आयोजित हिंदी उत्सव में शामिल हुईं। ममता ने इस मौके पर हिंदीभाषियों, खासकर बिहारियों की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि हिंदीभाषी काफी मेहनती होते हैं। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे किसी काम को करने के लिए कभी न नहीं बोलते। हिंदीभाषियों के इस स्वभाव पर उन्हें गर्व है। इसी सभा में ममता बनर्जी ने भेदभाव और धर्म के नाम पर लोगों को बांटने की राजनीति का भी मुद्दा उठाया और कहा कि वह पश्चिम बंगाल में ऐसा नहीं होने देंगी। बहरहाल, अब ममता बनर्जी के हिंदीभाषी-प्रेम के राजनीतिक निहितार्थ तलाशे जा रहे हैं। दरअसल, राज्य में भाजपा अब तेजी से पांव पसारने लगी है। हिंदीभाषी पश्चिम बंगाल में भाजपा के विचारों के प्रसार में सहायक हो रहे हैं। यही वह तथ्य है जो ममता की समझ में आ गया है। एक तथ्य यह भी है कि बांग्लाभाषी समाज मराठीभाषियों की तरह भाषाई दुराग्रह नहीं रखता है। जैसे महाराष्ट्र में भाषा के नाम पर दंगे होते हैं, उस तरह पश्चिम बंगाल में कभी नहीं हुए। इसलिए ममता जानती हैं कि वह अगर हिंदीभाषियों को लुभाने की कोशिश करेंगी, तो इससे बांग्लाभाषियों पर कोई खराब असर नहीं पड़ेगा, वे उनसे नाराज नहीं होंगे। उनकी समझ में यह भी आ गया है कि अगर उन्होंने वामपंथियों की तरह हिंदीभाषियों की उपेक्षा की, तो फिर भाजपा को रोकना जरा मुश्किल हो जाएगा। यही कारण है कि ममता का अब हिंदीभाषियों पर प्रेम उमड़ने लगा है।

  • वरिष्ठ पत्रकार उज्जवल भट्टाचार्य के फेसबुक पेज से
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