काला मोतिया में दवा से ज्यादा असरकारक है ध्यान

By Independent Mail | Last Updated: Oct 20 2018 9:09PM
काला मोतिया में दवा से ज्यादा असरकारक है ध्यान

एजेंसी, नई दिल्ली। ग्लूकोमा से पीड़ित मरीजों को ध्यान लगाने से आंख के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। यह दावा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के राजेंद्र प्रसाद केंद्र के चिकित्सकों ने अपने हालिया अध्ययन के बाद किया है। यह अध्ययन एम्स के समग्र स्वास्थ्य क्लीनिक, शारीरिक विज्ञान विभाग और जेनेटिक्स लैब विभाग ने मिलकर किया है। ग्लूकोमा या काला मोतिया भारत में दृष्टिहीनता का प्रमुख कारण है, जिससे एक करोड़ 20 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं।

एक मात्र उपचार

एम्स के नेत्र विज्ञान के आरपी सेंटर के प्रोफेसर डाॅ. तनुज दादा ने कहा कि इंट्राओकुलर दबाव (आईओपी) को कम करना ग्लूकोमा का एकमात्र उपचार है और यह वर्तमान में आंखों की बूंदों, लेजर थेरेपी या सर्जरी के जरिए हासिल किया जाता है। आंखों की बूंदें महंगी हैं और पूरे शरीर पर इनसे बुरा असर पड़ सकता है। सर्जरी की सफलता की भी कोई गारंटी नहीं। ध्यान एकमात्र उपचार है, जो इस बीमारी पर कारगर असर करता है।

ऐसे किया अध्ययन

जर्नल ऑफ ग्लूकोमा में प्रकाशित हुए इस अध्ययन के लिए 90 मरीजों को चुना गया और उन्हें दो समूहों में बांटा गया। अध्ययन के अनुसार एक समूह ने ग्लूकोमा की दवाओं के साथ योग के एक प्रशिक्षक की निगरानी में 21 से अधिक दिनों तक हर सुबह 60 मिनट तक ध्यान लगाया और प्राणायाम किया, जबकि दूसरे समूह ने किसी ध्यान के बिना केवल दवाएं लीं। तीन सप्ताह के बाद ध्यान लगाने वाले समूह में इंट्राओकुलर दबाव (आंखों के दबाव) में महत्वपूर्ण कमी देखी गई और यह 19 एमएमएचजी से 13 एमएमएचजी पर आ गया।

ग्लूकोमा को लेकर दुनिया का पहला शोध

एम्स में फिजियोलॉजी विभाग, इंटीग्रल हेल्थ क्लीनिक के प्रभारी प्रोफेसर डाॅ. राज कुमार यादव ने कहा कि दुनिया में यह पहला अध्ययन है, जो मस्तिष्क को लक्षित करके ध्यान लगाने से आंखों के दबाव को कम करने और रोगियों के सामान्य स्वास्थ्य में सुधार के लिए मजबूत वैज्ञानिक साक्ष्य प्रदान करता है। दुनिया का पहला शोध है, जो ग्लूकोमा के मरीजों को ध्यान में रखकर उन्हीं पर किया गया है।

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