जाने सांस लेने का सही तरीका रहेंगे हमेशा स्वस्थ, होंगे कई लाभ

By Independent Mail | Last Updated: Apr 7 2019 2:08AM
जाने सांस लेने का सही तरीका रहेंगे हमेशा स्वस्थ, होंगे कई लाभ

न्यूरोसाइंटिस्ट वेगस तंत्रिका (वेगस अर्थात यात्री) को शरीर की सबसे महत्वपूर्ण नस या तंत्रिका मानते हैं। यह नस शरीर व मन के संयोजन के लिए जिम्मेदार है। शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंगों तक जाती है- जैसे दिमाग, आंतें, दिल, जिगर, अग्नाशय, गुर्दा, तिल्ली, फेफड़े, जानेद्रियां, यहां तक कि जीभ भी, और इस सभी अंगों के चलन पर यह प्रभाव डालती है। वेगस दिमाग और मन पर अवसाद और व्यग्रता में प्रभाव डाल सकती है, आंतो में इसका प्रभाव पाचक रस के स्राव पर पड़ता है; दिल की धड़कन के चालन पर; शरीर में शर्करा अर्थात ग्लूकोस की मात्रा पर; पित्त की संरचना में; गुर्दे के कार्य में, स्त्रियों में जनन क्षमता पर इसका प्रभाव है; स्वाद लेने में और थूक की संरचना में भी इसका प्रभाव है; परन्तु सबसे अधिक शारिरिक और मानसिक संयुक्ता और परोपकारी व्यवहार तक इससे प्रभावित होता है। वेगस तांत्रिका की उत्तेजना का सीधा सम्बन्ध आपके स्वास्थ्य से है। जितनी स्वस्थ आपकी वेगस नस होगी, उतने ही आप शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे। जिस भी अभ्यास से वेगस नस की उत्तेजना होती है, उससे शरीर और मन की संयुक्ता में सुधार होता है, वह इसलिए क्योंकि वेगस नस शरीर और मन के बीच की कड़ी को दर्शाता है। कुछ आसन अभ्यास, जैसे गहरी मध्यपटीय श्वास या फिर सुदर्शन क्रिया करने से यह पाया गया है कि वेगस नस उत्तेजित होती है, और इससे आनन्द व स्वास्थ्य का स्तर बढ़ता है। वेगस की उत्तेजना में गहरी, उदरीय श्वासों को कई बार पेसमेकर का विकल्प माना गया है। प्राणायाम कुछ ऐसी प्राचीन भारतीय तकनीकें हैं जिन्हें करने से भी हम श्वास को अपने स्वास्थ्य के लिए उपयोग कर सकते हैं।  सुदर्शन क्रिया रोज करने से भी यह पाया गया है कि वेगस नस उत्तेजित रहती है। "विश्राम और पाचन" सम्बंधित (पैरासिम्पथेटिक) तंत्रिका तंत्र की उत्तेजना के साथ-साथ, यह शक्तिशाली प्राणायाम प्रोलैक्टिन (स्वास्थ्य सम्बंधित हॉर्मोन) के स्राव में भी 50 प्रतिशत बढ़ोतरी करता है, गहरी नींद की अवस्था में बिताए हुए समय में 218 प्रतिशत बढ़ोतरी करता है, और पूरे विश्व में अवसाद, चिंता और तनाव को इस प्रक्रिया ने खत्म किया है। डॉक्टर निशा मणिकंठन, विश्व प्रसिद्ध आयुर्विज्ञानिक व आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री तत्व हॉस्पिटल की निदेशिका कुछ सरल और प्राकृतिक अभ्यास बताती हैं जिन्हें आप अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं, जिनमें प्राणायाम, योग व भोजन सम्मिलित हैं। 

भस्त्रिका प्राणायाम करने का तरीका 

अपने दिन की शुरूआत भस्त्रिका प्राणायाम से करें, जो कि एक बहुत शक्तिशाली प्राणायाम है अपने घुटनों को मोड़ लें और अपने कूल्हों पर बैठ जाएं। अपने हाथों की मुट्ठी बना लें और उन्हें अपने दोनों कन्धों के सामने ले आएं। जब आप श्वास भरें, अपने हाथों को ऊपर ले जाएं और अपनी मुट्ठियाँ खोल दें। जब आप श्वास छोड़ें, अपने हाथों को नीचे ले आएं और पुन: अपने हाथों की मुट्ठियाँ बना लें। यह एक क्रम है। आपको ऐसे बीस क्रम करने हैं। आप तीन चक्र करें, हर एक चक्र में ऐसे बीस क्रम हों और दो चक्रों के बीच में पांच मिनट का अंतराल रखें। अपनी आंखें बन्ध रखते हुए बैठें और शरीर में ऊर्जा के प्रवाह हो महसूस करें।

आंतों के लिए उष्ट्रासन

आंतों के स्वास्थ्य के लिए योग उष्ट्रासन एक बहुत सरल आसन है और यह पाचनशक्ति में सुधार लाता है, जो कि वेगस के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। अपनी चटाई पर घुटने टिका दें और अपने दोनों हाथों को कूल्हों पर रख लें। आपके घुटने और कंधे एक सीध में होनें चाहिए और आपके तलवे छत की ओर होने चाहिए। जब आप श्वास भरें, अपने गुदास्थि को जघनरोम की ओर खींचें, जैसे को कोई आपको नाभि से खींच रहा हो। साथ ही साथ, अपनी पीठ से गोला बनाएं और अपने हाथों को अपने पैरों पर सरका दें तब तक जब तक आपके दोनों हाथ सीधे न हों। अपनी गर्दन को ज्यादा झटका न दें और उसे सामान्य ही रखें। 

शाकाहारी भोजन

चपातियों का स्वादिष्ट परिपूरक सामग्री: 1 3/4 कप गैंदे के बीज 1/2 कप खमीर 1/4 चमच नमक 2 चमच नींबू का रस 2 से 3 लौंग 2 चमच सावा के पत्ते 1/4 चमच काली मिर्च प्रक्रिया: गैंदे के बीजों को 8 घण्टों के लिए भिगो दें। सभी सामग्रियों का मिश्रण बना लें। 1 घण्टे तक फ्रिज में ठंडा कर लें। ब्रेड/चपाती या सब्जियों के साथ परोसें। 

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