युवा तेजी से हो रहे हैं एंकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के शिकार

By Independent Mail | Last Updated: Apr 4 2019 11:32PM
युवा तेजी से हो रहे हैं एंकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के शिकार

 बिगड़ते लाइफस्टाइल और खराब खानपान के चलते युवा कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। आज के समय भारत में सौ में से एक आदमी एंकायलोज़िंग स्पांडिलाइटिस से पीड़ित है। युवा तेजी से एंकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस के शिकार हो रहे हैं। इस रोग में रीढ़ की हड्डी बढ़ जाती है जिसके चलते पीड़ित मरीज व्यक्ति चलने-फिरने, उठने बैठने और सही तरह से खड़े होने में भी दिक्कत महसूस करता है।

हमारे देश में रीढ़ की हड्डी और जोड़ों के दर्द की शिकायत करने वाले गठिया के मरीज काफी कठिनाइयों में जिंदगी बिताते हैं। अगर एंकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस का सही समय पर इलाज न किया जाए तो व्यक्ति की स्थिति खराब हो जाती है। यह बात रूमैटोलॉजी के भारतीय जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में भी कही गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का डब्ल्यूएचओ क्यूओएल-बीईआरएफ सूचकांक यह दर्शाता है कि मनोवैज्ञानिक और पर्यावरणीय कारकों का जीवन की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। एंकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस सूजन-संबंधी और ऑटोइम्यून बीमारी है जो रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है। एंकायलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से पीड़ित युवाओं की अकादमिक और पेशेवर प्रदर्शन के साथ-साथ उनकी मानसिक सेहत भी प्रभावित होती है।

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