क्या चीन बनेगा दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति?

By Independent Mail | Last Updated: Feb 7 2018 3:55PM
क्या चीन बनेगा दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति?

इंडिपेंडेंट मेल। दुनिया में चीन का बढ़ता आर्थिक दबदबा अति-विकसित देशों में भी बहस का विषय है। एशिया में तो चीन के प्रभाव पर चिंता व्यक्त की ही जाती है, और इस विशाल देश के सैन्य बल को देखते हुए अक्सर यह कहा जाता है कि कुछ सालों में चीन दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बन जाएगा।

चीन के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार वर्ष 2018 चीन की सुधार और खुलेपन की नीति लागू करने की 40वीं वर्षगांठ है। इसी वर्ष चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की 19वीं कांग्रेस की भावना को लागू करने की शुरूआत भी की जा रही है। चीन की केंद्रीय सरकार और उच्च स्तरीय थिंक टैंक के कई अधिकारियों और विद्वानों का कहना है कि इस वर्ष चीन की आर्थिक स्थिति स्थिर बनी रहेगी और उच्च गुणवत्ता वाले विकास का नया युग शुरू होगा।

सकारात्मक स्थिति

चीनी अर्थव्यवस्था के बारे में हाल ही में पेइचिंग में आयोजित एक मंच को संबोधित करते हुए चीनी राज्य परिषद के विकास अनुसंधान केंद्र के अध्यक्ष ली वेई ने कहा कि पिछले वर्ष चीन के अर्थतंत्र में लगातार 6 महीने की गिरावट के बाद अच्छी तरह विकास की सकारात्मक स्थिति बनी रही। इस वर्ष की स्थिति पर ली वेई का यह अनुमान है कि चीन का स्थिर आर्थिक विकास होगा और मध्यम व ऊंची वृद्धि दर रहेगी ।

यह जोर देकर कहा जा रहा है कि चीन में खुलेपन का द्वार बन्द नहीं होगा और यह द्वार दिनों दिन बड़ा होता जाएगा। चीन विदेशों के लिए द्वार खोलने की बुनियादी राष्ट्रीय नीति पर कायम रहेगा। नए युग में कैसे खुपेलन की नीति पर कायम रहा जाए और इस नीति को कैसे आगे बढ़ाया जाए इसी पर चीन में विचार-विमर्श चल रहा है।

आकर्षित हो रहा पूंजी निवेश 

विश्व के सबसे बड़े उत्पाद व्यापार के निर्यातक देश और दूसरे बड़े आयातित देश के रूप में चीन सबसे अधिक विदेशी पूंजी निवेश आकर्षित करता है और विदेशों में भी अधिक निवेश करता है। उदारीकरण की दिशा में नए क्षेत्रों में चीन द्वारा वित्तीय उद्योगों को खोलने का बड़ी तादाद में विस्तार किया जाना, चीन के प्रतिभूति, बीमा, बैंकिंग, फंड आदि उद्योगों में विदेशी संस्थानों के इक्विटी और निवेश का बड़े स्तर पर विस्तार किया जाना शामिल है। पहले लगाए गए प्रतिबंधों को भी कम किया गया है। नए तरीके का मतलब है कि पहले के परंपरागत क्षेत्रों में अब कई नए माध्यम से विदेशी पूंजी निवेश आकर्षित की जाती है।

सबसे पहले चीनी बाज़ार में प्रवेश करने वाली अंतर्राष्ट्रीय व्यावसायिक सेवा कंपनियों में से एक के रूप में अर्नेस्ट एंड यंग ऑडिट कंपनी का कहना है कि तेज़ आर्थिक विकास के साथ चीन के बाज़ार में आए सकारात्मक बदलाव से भविष्य में चीन को बहुत लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में चीन में मुक्त व्यापार क्षेत्र की स्थापना की गई, नकारात्मक सूची में शामिल धाराओं को भी कम किया जा रहा है। अब अधिक विदेशी कंपनियां चीनी बाजार में प्रवेश कर रही है।

वर्तमान में चीन में 11 मुक्त व्यापार क्षेत्र स्थापित हुए हैं। शांगहाई और अन्य क्षेत्र अधिक खुले मुक्त व्यापार बंदरगाह की स्थापना की कोशिश कर रहे हैं। चीनी वाणिज्य मंत्रालय के अनुसंधान केंद्र की अकादमिक समिति के उपाध्यक्ष च्यांग चिएफिंग का विचार है कि खुलापन और सुविधा के क्षेत्रों में मुक्त व्यापार बंदरगाह में नई प्रगति होगी।

उन्होंने कहा कि वर्तमान मुक्त व्यापार परीक्षण क्षेत्र में टैक्स व्यवस्था नहीं है। भविष्य में अगर पोर्ट ऑफ दुबई और पोर्ट ऑफ सिंगापुर के तरीके से चीन के मुक्त व्यापार बंदरगाह का संचालन किया जाए, तो टैक्स, कर्मियों के कारोबार और अंतरिक्ष के विस्तार जैसे पहलुओं में नई प्रगति होगी।

एक पट्टी एक मार्ग

मुक्त व्यापार परीक्षण क्षेत्र चीन में खुलेपन के लिए कोशिश का एक प्रतीक है। विशेषज्ञों का विचार है कि चीन में "एक पट्टी एक मार्ग" (वन बेल्ट, वन रोड) प्रस्ताव पर पूरी तरह प्रवेश करने से पहले राष्ट्रीय उपचार और नकारात्मक सूची प्रबंधन जैसी व्यवस्था लागू की जाएगी, ताकि आगे देश का द्वार खोला जा सके। चीन के रेनमिन विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय संबंध संस्थान के प्रोफेसर वांग यी वेई का विचार है कि आने वाले समय में चीन का खुलापन उसे विश्व में और अधिक प्रभावशाली बनाएगा।

मेड इन चाइना

चीन में 2025 को मेड इन चाइना वर्ष घोषित किया गया है। इसके रोडमैप के अनुसार वर्ष 2025 में चीन के दूर संचार उपकरण, रेल परिवहन व बिजली उपकरण तीन क्षेत्र विश्व के सबसे आगे बढ़ेंगे। साथ ही 5G, हरित (प्रदूषण मुक्त) परिवहन तकनीक समेत सिलसिलेवार तकनीकों की उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल होंगी। पहला रोड मैप वर्ष 2015 में जारी हुआ था, जिसमे चीन के विनिर्माण व्यवसाय को अनुसंधान से जुड़े पूंजी-निवेश व तकनीक सृजन के लिए बड़ा योगदान दिया गया।

आर्थिक प्रगति

नवीनतम आंकड़ों के अनुसार चीन की मुख्यभूमि की जनसंख्या 1 अरब 39 करोड़ तक जा पहुंची है। पिछले 5 वर्षों में विश्व आर्थिक वृद्धि में चीन की योगदान दर 30 प्रतिशत से भी अधिक रही, जिससे वैश्विक शासन व्यवस्था में चीन के बात करने का अधिकार उल्लेखनीय रूप से बढ़ रहा है। सरकारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 के पिछले 11 महीनों में चीन में विदेशी निवेश की वास्तविक राशि 8 खरब युआन से भी अधिक रही, जो इस से पिछले वर्ष की इसी अवधि से 9.8 प्रतिशत रही। चीन के लिए विदेशी पूंजी निवेश का कारगार और सकारात्मक रूप से उपयोग करना दीर्घकालिक रूप से पालन किया जाने वाला एक रणनीतिक सिद्धांत बन गया है।

चीनी वित्त मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2017 में चीन की वित्तीय आय में 7.4 प्रतिशत का इजाफ़ा हुआ है, जो कि वर्ष 2016 की तुलना में 2.9 प्रतिशत अधिक रहा। चीन में वित्तीय खर्च पहली बार 2 अरब चीनी युआन को पार कर गया। वर्ष 2017 में चीन के आम सार्वजनिक बजट की आमदनी 1.7 अरब चीनी युआन को पार कर गई थी, जो 2016 की तुलना में 7.4 प्रतिशत अधिक थी। चीनी वित्त मंत्रालय के संबंधित अधिकारी लो होंग ने कहा कि वित्तीय आय में अपेक्षाकृत तेज़ विकास से यह साबित हुआ है कि चीन का अर्थतंत्र स्थिरता के साथ विकसित हो रहा है। यह चीन में सप्लाई पक्ष में हुए सुधार लागू करने का अच्छा परिणाम है और देश-विदेश की मांग में इज़ाफा देने का परिणाम भी है। सामाजिक उपभोक्ता वस्तुओं की कुल खुदरा बिक्री में 10.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। लोहा व इस्पात, कोयला और रियल एस्टेट की बिक्री मात्रा भी संतोषजनक रही है।

केंद्रीय कारोबारों के प्रमुख प्रचालन से जुड़े सूचकांक अच्छा रहा, साल भर में ऑपरेटिंग आय 264 खरब युआन रही। हरेक तिमाही में ऑपरेटिंग आय की वृद्धि दर दो अंकों में बरकरार रही।

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017 में चीनी विदेशी व्यापार दो सालों की मंदी से बाहर निकल कर अनुमान से वृद्धि हुई। पिछले दो सालों में चीनी विदेशी व्यापार मंदी में फंसा हुआ था, लेकिन वर्ष 2017 में आयात निर्यात की कुल रकम 277.9 खरब युआन रही, जो वर्ष 2016 की तुलना में 14.2 प्रतिशत से अधिक थी। यह गति पिछले छह सालों में एक रिकॉर्ड है। विश्व बैंक द्वारा जारी नवीनतम 2018 विश्व आर्थिक आउटलुक के मुताबिक 2018 में विश्व आर्थिक वृद्धि 3.1 प्रतिशत होगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष समेत कई संस्थाओं ने साल 2018 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर आशावान अनुमान लगाया।

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