किस्सा एक पार्टी का

By Independent Mail | Last Updated: Dec 7 2017 2:34PM
किस्सा कांग्रेस पार्टी का

इंडिपेंडेंट मेल. राहुल गाँधी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष बनने वाले हैं. 11 तारीख को अध्यक्ष के नाम का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा. कांग्रेस की कमान संभालने वाले राहुल गाँधी इस परिवार के छठे सदस्य होंगे. वैसे कांग्रेस पार्टी की स्थापना से अब तक कुल 88 अध्यक्ष हो चुके हैं और राहुल 89वें अध्यक्ष होंगे. कांग्रेस पार्टी का इतिहास बहुत पुराना है और यह कहा जा सकता है कि देश का सबसे पुराना दल यही है. इस संगठन को बनाने का आईडिया दिसंबर 1884 में मद्रास (अब चेन्नई) में ए.ओ. ह्यूम और 17 लोगों की एक बैठक में आया था. उस समय पार्टी का उद्देश्य सरकार में पढ़े लिखे भारतीयों की भागीदारी बढ़ाना और शिक्षित भारतीय व ब्रिटिश राज के बीच राजनीतिक विचार विमर्श करना था.

पार्टी की विधिवत स्थापना 28 दिसम्बर, 1885 को बम्बई में 72 सदस्यों को लेकर की गई थी. ए.ओ. ह्यूम 15 साल तक संगठन के महासचिव रहेI इसके प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चन्‍द्र बनर्जी बनाये गए थे. संगठन के महत्वपूर्ण सदस्यों में महत्वपूर्ण थे - दादाभाई नौरोजी, फ़िरोजशाह मेहता, दीनशा एदलजी वाचा, काशीनाथा तैलंग, वी. राघवाचार्य, एन.जी. चन्द्रावरकर और एस.सुब्रमण्यम आदि. 1905 तक पार्टी को जनता का ज्यादा सहयोग नहीं मिला हुआ था लेकिन जब लार्ड कर्जन ने बंगाल के बंटवारे की घोषणा की तो वरिष्ठ पार्टी नेता सुरेन्द्र नाथ बनर्जी और सर हेनरी कॉटन ने पार्टी को 'स्वदेशी मूवमेंट' से जोड़ दिया. महात्मा गांधी जब साउथ अफ्रीका से 1915 में वापस आये तब उसके बाद कांग्रेस ने उन्हें 1924 में अध्यक्ष चुन लिया. नेहरु परिवार के हाथ में कमान 1928 में आई. 1932 के बाद से कई और भी कांग्रेस अध्यक्ष हुए लेकिन 1978 से 1991 और फिर 1998 से नेहरु-गाँधी परिवार ही कांग्रेस के शीर्ष पर है.  कांग्रेस के संविधान के मुताबिक अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ता प्रतिनिधि चुनते हैं और वे प्रतिनिधि वोट देते हैं लेकिन यह तभी संभव है जब अध्यक्ष पद के लिए दो या अधिक प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हों.

क्या थे उद्देश्य

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को स्थापित करने के महत्त्वपूर्ण उद्देश्य ये थे :

·         देशहित की दिशा में प्रयत्नशील भारतीयों में परस्पर सम्पर्क एवं मित्रता को प्रोत्साहन देना.

·         देश में धर्म, वंश और प्रांत सम्बन्धी विवादों को खत्म कर राष्ट्रीय एकता की भावना बढ़ाना .

·         शिक्षित वर्ग की सहमति से महत्त्वपूर्ण और जरूरी सामाजिक विषयों पर विचार विमर्श करना.

·         यह निश्चित करना कि भारतीय जन-कल्याण के लिए किस दिशा में किस आधार पर काम किया जाए.

कांग्रेस की ख़ास घटनाएँ

·         कांग्रेस के संस्थापक ए.ओ. ह्यूम ने तत्कालीन वाइसराय लार्ड डफरिन की अनुमति के बाद बम्बई में संगठन का पहला अधिवेशन किया था जो 28 से 31 दिसंबर तक चला था .

·         कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष थीं एंनी बेसेन्ट और पहली भारतीय अध्यक्ष थीं सरोजिनी नाईडू .

·         आज़ादी के समय कांग्रेस अध्यक्ष थे आचार्य जे.बी. कृपलानी .

·         आजाद भारत में जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पहली बार चुनावी मैदान में उतरी तब इसका चुनावी चिन्ह बना दौ बैलों की जोड़ी. पहले लोकसभा चुनाब में कांग्रेस को संसद की 364 सीटों पर विजय प्राप्त हुई.

·         1967 में कांग्रेस पहली बार लोकसभा चुनाव हारी। संसद में कांग्रेस को मात्र 153 सीटें मिली. 1969 में कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई। के. कामराज की अगुवाई में कांग्रेस (ओ) बनी और इंदिरा गांधी के समर्थकों के साथ से बनी कांग्रेस आई.

·         कांग्रेस (ओ) और आई के बीच कई मुद्दों के साथ ही चुनाव निशान पर भी तकरार हुआ और कांग्रेस (ओ) को नया चुनाव निशान ‘चरखा’ मिला. कांग्रेस (आई) को ‘गाय बछड़े’ का निशान मिला.

·         इंदिरा गांधी पर 1975 में भ्रष्टाचार के आरोप साबित हुए. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उन्हें इस्तीफा देने और 6 साल तक चुनाव न लड़ने का फैसला सुनाया. इसका जवाब इंदिरा गांधी ने आपातकाल से दिया। 25 जून 1975 में इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगा दी.

·         18 जनवरी 1977 में इंदिरा गांधी ने इंमरजेंसी वापस लेने और देश में चुनाव कराने का ऐलान कर दिया. इसके बाद जब चुनाव हुए तो चुनाव आयोग ने कांग्रेस (आई) का चुनाव निशान ‘गाय बछड़ा’ ज़ब्त कर लिया और कांग्रेस (आई) को नया चुनाव निशान मिला हाथ यानी पंजा.

·         1977 चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई. लेकिन कांग्रेस ने 1980 में वापसी की. साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हो गई और उनकी कुर्सी संभाली राजीव गांधी ने.

·         21 मई 1991 में एक चुनावी रैली में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई. इसके बाद पार्टी की कमान आई पीवी नरसिंहा राव के हाथ.

·         इसके बाद पार्टी में बगावत और टूट-फूट का दौर शुरू हो गया था. एन.डी. तिवारी ने अपने समर्थकों के साथ तिवारी कांग्रेस बना ली वहीं ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस बना ली.

·         सोनिया गांधी की वापसी से पार्टी में नई जान आई और 2004 के आम चुनावों में सोनिया गांधी के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनी.

जानिए कांग्रेस को

·         2 करोड़ – सदस्य संख्या

·         सोनिया गाँधी - अध्यक्ष

·         मल्लिकार्जुन खरगे - लोक सभा में पार्टी के नेता

·         गुलाम नबी आजाद – राज्य सभा में पार्टी नेता

·         कांग्रेस सन्देश – पार्टी का अखबार

·         नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया – पार्टी की छात्र शाखा

·         इंडियन यूथ कांग्रेस – युवा शाखा

·         सुष्मिता देव – अध्यक्ष, आल इंडिया महिला कांग्रेस

·         इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) – श्रमिक शाखा

·         46 सदस्य – लोक सभा में

·         57 सदस्य – राज्य सभा में

अर्श से फर्श

·         1951 - 364 सीटें

·         1957 - 371 सीटें

·         1962 - 361 सीटें

·         1967 - 283 सीटें

·         1971 - 352 सीटें

·         1977- 153 सीटें

·         1980 - 351 सीटें

·         1984 - 415 सीटें

·         1989 - 197 सीटें

·         1991 - 244 सीटें

·         1996 - 140 सीटें

·         1998 - 141 सीटें

·         1999 - 114 सीटें

·         2004 - 145 सीटें

·         2009 - 206 सीटें

·         2014 - 44 सीटें

·         कांग्रेस पार्टी के पक्ष में मतदान का प्रतिशत जहाँ 1951 में 44.99 था वही पिछले लोक सभा चुनाव में 19.3 फीसदी हो गया जो अब तक का पार्टी का सबसे खराब प्रदर्शन था.

·         वर्तमान में कांग्रेस पार्टी मात्र 6 राज्यों तक सिमट गयी है और ये राज्य हैं - मिजोरम, मेघालय, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, पुद्दुचेरी और पंजाबI इनमें से हिमाचल प्रदेश में अभी चुनाव हुए हैं और इसी महीने रिजल्ट आना है.

हार गए थे गांधी

एक दौर ऐसा भी आया जब कांग्रेस के सबसे बड़े नेता रहे महात्मा गांधी को भी नैतिक रूप से हार का सामना करना पड़ा. यह था 1939 में कांग्रेस में अध्यक्ष पद का सबसे चर्चित चुनाव. इस चुनाव में सुभाष चंद्र बोस के खिलाफ महात्मा गांधी डा पट्टाभि सीतारमैया को मैदान में उतारा था. असल में गांधी सुभाष चन्द्र बोस के पिछले कार्यकाल से खुश नहीं ‌थे इसलिए उन्होंने सुभाष के सामने सीतारमैया को यह कहते हुए खड़ा किया कि उनकी हार मेरी हार होगी. चुनाव हुआ और सीतारमैया को हार मिली. बोस को 1580 और सीतारमैय्या को 1377 वोट मिले. गांधी के खुले विरोध से दुखी सुभाष बोस ने बाद में इस्तीफा दे दिया और पार्टी भी छोड़ दी.

नरम और गरम

1907 में सूरत (गुजरात) में हुआ कांग्रेस का अधिवेशन ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्त्वपूर्ण था. वजह यह थी कि कांग्रेस के भीतर वाले ‘गरम दल’ तथा ‘नरम दल’ के आपसी मतभेदों के कारण इस अधिवेशन में पार्टी दो भागों में विभाजित हो गई थी हालाँकि इसके बाद 1916 के लखनऊ अधिवेशन में पुन: दोनों दलों का आपस में विलय हुआ. कांग्रेस के भीतर वाला गरम दल आज़ादी के लिये आक्रामक रुख अपनाने का पक्षधर था जबकि नरम दल बातचीत और सुलह समझौते की राह चलना चाहता था.

स्वराज्य की प्राप्ति के लिए आन्दोलन और अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नरम दल तथा गरम दल दोनों में काफ़ी मतभेद था. गरम दल के पक्षधर सदस्यों ने सूरत कांग्रेस का अध्यक्ष पहले लोकमान्य तिलक को और बाद में लाला लाजपत राय को बनाना चाहा, परन्तु उदारवादी नरम दल ने डॉ. रासबिहारी घोष को अधिवेशन का अध्यक्ष बनाया।.अधिवेशन से पूर्व ही दोनों दलों में भयंकर मार-पीट हुई, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस का दो हिस्सों में विभाजन हो गया. उस मौके पर एनी बेसेंट ने कहा था - सूरत की घटना कांग्रेस के इतिहास में सबसे अधिक दुःखद घटना है. सूरत विभाजन के बाद गरम दल का नेतृत्व तिलक, लाला लाजपत राय एवं विपिन चन्द्र पाल (लाल, बाल, पाल) ने किया. नरम दल के नेता गोपाल कृष्ण गोखले थे।1916 में कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में पुनः दोनों दलों का आपस में विलय हो गया.

नेहरू परिवार के हाथ कमान

कांग्रेस की कमान लम्बे समय से नेहरु-गाँधी परिवार के हाथ में रही है जिसका सिलसिला मोतीला नेहरू से शुरू हुआ था.

मोतीलाल नेहरू

मोतीलाल, राहुल के परनाना और पंडित जवाहर लाल नेहरू के पिता थे. नेहरू परिवार में कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर सबसे पहली ताजपोशी उन्हीं की हुई थी. मोतीलाल को दो बार कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था. पहली बार 1919 में कांग्रेस के अमृतसर अधिवेशन में और दूसरी बार 1928 में वो पार्टी के अध्यक्ष बने थे.

जवाहरलाल नेहरू

मोतीलाल नेहरू के बाद जवाहरलाल नेहरू ने कांग्रेस की कमान संभाली थी. वो आठ बार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे. वह पहली बार 1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में अध्यक्ष बनाए गए. इसके बाद 1930, 1936, 1937, 1951, 1952, 1953 और 1954 में लगातार उन्हें पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया.

इंदिरा गांधी

इंदिरा नेहरू परिवार की तीसरी पीढ़ी के तौर पर कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं. इंदिरा गांधी को चार बार कांग्रेस की कमान सौंपी गई. वो पहली बार 1959 में कांग्रेस के दिल्ली के विशेष अधिवेशन में अध्यक्ष बनीं. इसके बाद पांच साल के लिए 1978 से 1983 तक उनको अध्यक्ष बनाया गया.

राजीव गांधी

इंदिरा गांधी की मौत के बाद राजीव गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बने. राजीव नेहरू परिवार की चौथी पीढ़ी के पार्टी अध्यक्ष थे और 1985 से 1991 तक इस पद पर रहे.

सोनिया गांधी

राजीव गांधी की मौत के बाद कांग्रेस की कमान सोनिया गांधी को सौंपी गई. सोनिया ने 1998 में पार्टी की कमान अपने हाथों में ली और अब तक वो ही अध्यक्ष हैं. नेहरू-गांधी परिवार की पांचवी पीढ़ी के रूप में सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष बनीं थीं.

 

 

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