अब खुल कर उड़ाओ ड्रोन

By Independent Mail | Last Updated: Nov 24 2017 4:26PM
अब खुल कर उड़ाओ ड्रोन

इंडिपेंडेंट मेल. ड्रोन दुनिया भर में मनोरंजन, निगरानी, फोटोग्राफी, सेना, डेटा कलेक्शन आदि तमाम चीजों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. यहाँ तक कि ड्रोन से ई-कॉमर्स कम्पनियाँ अपने उत्पाद ग्राहकों के दरवाजे तक डिलीवर कर रही हैं. भारत में ड्रोन सिर्फ खिलौने या शादी-ब्याह जैसे निजी समारोहों में फोटोग्राफी तक सीमित है लेकिन अब सरकार कुछ नियमों के तहत ड्रोन के इस्तेमाल को मंजूरी देने जा रही है. वर्ष 2014 में आम नागरिकों और निजी कंपनियों पर ड्रोन उड़ाने पर रोक लगा दी गयी थी. मुमकिन है कि सरकार की इजाजत के बाद अब भारत में भी बाकी दुनिया की तरह पिज्जा या अन्य सामानों की डिलीवरी ड्रोन के जरिए की जा सकेगी.

क्या नया होने वाला है भारत में

ड्रोन का इस्तेमाल कौन करे और कैसे करे, इसके बारे में सरकार नीति बना रही है और फिलहाल नियमों का एक ड्राफ्ट जारी किया गया है. नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने जो नियम तैयार किये हैं उसके मुताबिक अब हर व्यक्ति या एजेंसी को ड्रोन यानी अनमैंड एरियल सिस्टम (यूएएस) को चलाने से पहले उसका रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा.

5 तरह के ड्रोन

डीजीसीए ने ड्रोन को उनके वजन के आधार पर पांच श्रेणियों में बांटा है. नैनो ड्रोन (250 ग्राम) उड़ाने के लिए किसी की मंजूरी जरूरी नहीं है. नैनो ड्रोन 50 फुट तक उड़ सकेगा. माइक्रो श्रेणी के लिए सिक्योरिटी क्लीयरेंस लेना अनिवार्य होगा. इसके साथ यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर लेना होगा. मिनी और उसके ऊपर आकार के ड्रोन के उपयोग के लिए तय शर्तें और मंजूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी. जबकि सरकारी एजेंसी को ड्रोन के इस्तेमाल पर किसी प्रकार की मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी. हालांकि स्थानीय पुलिस व एटीसी को इसकी सूचना देनी होगी. नई नीति लागू होने के बाद ई-कॉमर्स कंपनियां इलेक्ट्रिानिक सामान, ब्रांडेड कपड़े, जूते और अन्य वस्तुएं ड्रोन के जरिये लोगों तक पहुंचा सकेंगे. विभिन्न श्रेणी के ड्रोन में दो किलो से 20 किलो तक भार ले जाने की क्षमता होगी. सामान नियमों के अनुसार ढो सकेंगे. इनको 50 से 200 फुट की ऊंचाई पर उड़ाया जाएगा.

दो किलो से ज्यादा वजन के ड्रोन को जब भी इस्तेमाल किया जाएगा तो उसके ऑपरेटर को सुरक्षा संबंधी मंजूरी लेनी होगी. डीजीसीए के मुताबिक इसके लिए ऑपरेटर परमिट भी लेना होगा जिसे सरकार दो से सात दिन के भीतर जारी करेगी.

वजन के हिसाब से ड्रोन की श्रेणियां

नैनो ड्रोन    : 250 ग्राम

माइक्रा ड्रोन  :  250 ग्राम से दो किलो

मिनी ड्रोन   : दो किलो से 25 किलो

स्माल ड्रोन  :  25 किलो से 150 किलो

लार्ज ड्रोन   : 150 किलो

चिंता सुरक्षा की

असल में सरकार की चिंता सुरक्षा संबंधी है कि कहीं ड्रोन और ड्रोन कमरों का गलत इस्तेमाल न किया जाये. इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए भी कई प्रतिबंध प्रस्तावित हैं. इसके लिए ‘नो ड्रोन जोन’ का प्रस्ताव भी दिया गया है जिसमें अंतरराष्ट्रीय सीमा का 50 किमी का दायरा भी शामिल होगा. इसके अलावा हवाई अड्डों, सैन्य क्षेत्र, संसद और अन्य प्रतिबंधित क्षेत्र के पांच किलोमीटर के दायरे में ड्रोन के उड़ने पर रोक होगी. दरअसल ड्रोन के जरिए आसानी से जासूसी की जा सकती है. दुश्मन देश और घुसपैठ कर बैठे आतंकवादी भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. लिहाजा डर ख्याली नहीं है और मामला सिर्फ सुरक्षा का नहीं बल्कि प्राइवेसी की रक्षा का भी है.

अभी क्या है स्थिति

इस समय ड्रोन के इस्तेमाल से लेकर इनको बेचने-खरीदने के कोई नियम नहीं हैं. हालांकि उड्डयन नियामक डीजीसीए ने अक्टूबर 2014 में आम नागरिकों और निजी कंपनियों द्वारा ड्रोन व मानव रहित विमान उड़ाने पर रोक लगा दी थी.

ड्रोन से नौकरियों पर संकट

ड्रोन और रोबोट्स का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ रहा है. इससे जहाँ बहुत से काम आसान हो रहे हैं वहीं इंसानों पर नौकरियों का संकट छा गया है. ड्रोन और रोबोट्स बहुत से ऐसे काम निपटा रहे हैं जो अभी तक इंसान किया करते थेI आज दो ड्रोन मिलकर सौ लोगों के बराबर काम उसी वक़्त में निपटा देते हैं. इस साल अप्रैल से अक्तूबर के बीच ड्रोन और रोबोट मिलकर 89 हज़ार अमरीकियों की नौकरी खा गए और एक अनुमान है कि अगले दस सालों में 17 फीसदी नौकरियां ड्रोन और रोबोट चट कर जायेंगे. ड्रोन बनाने वाली बहुत-सी कंपनियां तो कहती हैं कि उनके ड्रोन सौ फीसदी परफेक्ट काम करते हैं. बहुत सी कंपनियां रख-रखाव यानी लॉजिस्टिक्स के लिए ड्रोन और रोबोट का इस्तेमाल कर रही है. रोबोट पैकिंग करते हैं और ड्रोन डिलीवरी कर देते हैं.

अमेरिका में बढ़ेगा ड्रोन का इस्तेमाल

अमेरिकी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राज्य और राज्यों की सरकारों को ड्रोन संचालन में उल्लेखनीय रूप से विस्तार करने की अनुमति दे दी है. फेडरल एविएशन एडमिनस्ट्रेशन को बतौर पायलट प्रोग्राम के तहत स्थानीय बस्तियों में प्रस्तावित ड्रोन ऑपरेशन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके जरिए लोगों के घरों के ऊपर से ड्रोन को उड़ाने, रात के समय भी संचालन और इंसानी नजर से दूर ड्रोन की उड़ान शामिल है. अभी इन सब पर रोक है.

क्या क्या हो रहा दुनिया में

ड्रोन सिर्फ फोटोग्राफी या पिज़्ज़ा पहुंचाने का ही काम नहीं करता बल्कि वो आसमान में कई सरकारों, खुफिया एजेंसियों और सेनाओं की आंख है. इसके जरिये खेती की निगरानी की जा रही है. कई देशों में ड्रोन रेसिंग लीग हो रही है. लोग रोजमर्रा के काम में ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत में भी डिफेन्स के क्षेत्र में इसका इस्तेमाल खूब हो रहा है. खासकर सरकारी सर्वे और सैन्य बल निगरानी के लिए. गेल इंडिया ने ड्रोन से पाइपलाइंस की निगरानी के लिए टेंडर निकाले हैं. दंगों या तनाव की स्थिति में राज्यों की पुलिस ड्रोन से निगरानी करती है. कई नगर निगम ड्रोन से मकानों आदि की गिनती का काम करते हैं.

ड्रोन के इस्तेमाल

·         पशुपालन और खेती में फसल और पशुओं की निगरानी मेहनत और थकाने वाले काम होता है. ड्रोन के जरिये घर बैठे ही फसल देखी जा सकती है और उनपर कीटनाशक आदि का छिड़काव किया जा सकता है. इससे किसान की मशक्कत बचती है, और बेहतर भूमि प्रबंधन किया जा सकता है.

·         पुलिस ड्रोन से निगरानी, तलाश आदि काम बेहतर और सुरक्षित तरीके से कर सकती है, अब तो आंसू गैस फेंकने वाले ड्रोन भी बन रहे हैं.

·         सीमाओं की निग्राने ड्रोन के जरिये बेहतर ढंग से की जा सकती है.

·         सुरक्षित ढंग से मौसम की जानकारी एकत्र करने के लिए ड्रोन प्रयोग किये जा रहे हैं.

·         वन्य जीवों को ट्रैक करने के काम में ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है और इसके अलावा जंगलों में अवैध शिकारियों पर नज रखने का काम किया जा रहा है. गूगल ने वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फण्ड को इस काम में सहयोग भी दिया है.

·         सिनेमा और अन्य प्रकार की शूटिंग में ड्रोन का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जा रहा है.

ड्रोन फैक्ट फाइल

·         रोबोट बनाने वाली कंपनी पिंक हाइड्रोजन फ़्यूल सेल से चलने वाले ड्रोन बनाती है, ये बैटरी से चलने वाले ड्रोन के मुक़ाबले ज़्यादा देर तक काम कर सकते हैं

·         फ़्रांस की कंपनी हार्दिस ग्रुप ने सामान की गिनती करने वाला ड्रोन ‘आईसी’ बनाया हैI एंड्रॉयड से चलने वाले इस ड्रोन में उड़ने का डेटा भर फ़ीड करना होता है फिर सारा काम ये ख़ुद करता है

·         ड्रोन बनाने वाली चीन की कंपनी डीजेआई ने पिछले दस साल में 10 अरब डॉलर का कारोबार किया है

·         दुनिया में हर साल करीब 5 अरब डॉलर का ड्रोन कारोबार हो रहा है

·         चीन की डीजेआई टेक्नोलॉजी दुनिया की सबसे बड़ी उपभोक्ता ड्रोन निर्माता है. इसके फैंटम और इंस्पायर ब्रांड प्रसिद्ध हैं। भारत में दमकल और वन विभाग द्वारा इनका प्रयोग किया जाता है

क्या है ड्रोन

वेनिस पर 1848 में ऑस्ट्रिया ने बैलून बम का इस्तेमाल किया और यहीं से ड्रोन के सपने को विज्ञान ने हकीकत की शक्ल देना शुरू किया. अमेरिकी वैज्ञानिकों ने इस सपने को जमीन पर उतारा और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान कैमरे वाला ड्रोन बनकर तैयार हुआ. पहली बार ड्रोन से जापान पर हमला किया गया। लेकिन आज का ड्रोन इंजीनयर अब्राहम करीम के दिमाग की उपज है. इजरायल से अमेरिका आए अब्राहम करीम ने पेंटागन में तीन लोगों की टीम के साथ ड्रोन के मिशन को पूरा किया.

ड्रोन एक ऐसा विमान है जिसमें कोई पायलट नहीं होता है बल्कि यह कहीं दूर से रिमोट या कंप्‍यूटर द्वारा ऑपरेट किया जा सकता है. एक बेसिक ड्रोन डिजायन चार विंग्स यानी पंखोंवाला होता है इसलिये इसे ‘क्‍वाड कॉप्‍टर’ भी कहते हैं. ड्रोन शब्द अंग्रेजी भाषा का शब्द है जिसका हिंदी में अर्थ होता है नर मधुमक्‍खी। असल में यह नाम इसके उड़ने के कारण इसे मिलाI यह बिलकुल एक मधुमक्‍खी की तरह ही उड़ता है, एक जगह पर स्थिर भी रह सकता है यानी मंडरा सकता है.

ड्रोन में होता क्या है

ड्रोन कोई जटिल मशीन नहीं है बल्कि यह बहुत आसन तकनीक और सामान्य पुर्जों से चलने वाली मशीन होती है. एक सामान्य ड्रोन में डीसी मोटर, प्लास्टिक फैन ब्लेड्स, ब्लेड प्रोपेलर, कॉप्टर कंट्रोलर, मिनी ट्रांसमीटर और एक कैमरा लगा होता है. एक सामान्य ड्रोन बहुत हलके मटेरियल से बना होता है ताकि इसका वजन कम रहे और यह आसानी से उड़ाया जा सके. डिफेन्स के काम में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन में इन्फ्रा रेड कैमरे, जीपीएस, लेज़र भी लगे होते हैं. छोटे ड्रोन हाथ से ही लांच किये जा सकते हैं जबकि बड़े आकार के ड्रोन उड़ाने के लिए छोटे रनवे की जरूरत होती है.

भारत में ऑनलाइन मिल रहे ड्रोन

स्टॉकहोम इंटरनैशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार 1985 से 2014 के बीच भारत ड्रोन का सबसे बड़ा आयातक था. भारत में पिछले 2 साल में 40 करोड़ रुपये कीमत के ड्रोन बिके जिनमे खिलौने वाले ड्रोन शामिल थे. एक अनुमान है कि भारत में कोई 40 से 50 हजार के बीच ड्रोन हैं.  

अमेज़न, ईबे आदि तमाम साइट्स पर तरह तरह के ड्रोन उपलब्ध हैं. इनमें खिलौने से ले कर व्यापक इस्तेमाल वाली मशीनिं शामिल हैं और इनके दाम 750 रुपये से 65 हजार रुपये तक हैं. जैसे कि डीजेआई का लोकप्रिय मॉडल फैंटम 3 स्टैण्डर्ड का दाम 64,990 रुपये है. इसमें कैमरा लगा हुआ है और साउंड रिकॉर्डिंग, लाइटिंग, जीपीएस की सुविधा है. सिग्नल संपर्क टूटने पर यह ड्रोन स्वतः लौन्चिंग वाली जगह पर लौट आता है. वैसे डीजेआई के क्वॉडकोप्टर की कीमत 5,00,000 रुपये तक की है. इसका उड़ान दायरा 400 मीटर से लेकर चार किलोमीटर तक रहता है. रेडियो कंट्रोल्ड खिलौनों की तरह क्वॉडकॉप्टर 2.4 गीगाहर्ट्ज़ तरंगों पर काम करता है जो लाइसेंस-फ्री बैंड होता है. इसके अतिरिक्त ये क्वॉडकॉप्टर ‘नो फ्लाई जोन’, इन-बिल्ट सॉफ्टवेयर की विशेषता के साथ आते हैं और नो फ्लाई जोन में प्रवेश ही नहीं करते.

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