चिंता की बात है जेट एयरवेज का बंद होना

By Independent Mail | Last Updated: Apr 18 2019 8:50PM
चिंता की बात है जेट एयरवेज का बंद होना
आर्थिक तंगी झेल रही जेट एयरवेज को स्टेट बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के समूह ने और कर्ज देने से मना कर दिया। जिसके बाद कंपनी ने विमान सेवा बंद करने की घोषणा कर दी है। मसलन 17 अप्रैल 2019 की तारीख देश के विमानन इतिहास में याद रखी जाएगी। दरअसल, इसी दिन जेट एयरवेज के विमान ने अपनी आखिरी उड़ान भरी। इसके बाद अनिश्चितकाल के लिए इस कंपनी की सेवाएं बंद हो गई हैं। 
अब अहम सवाल यह है कि जेट एयरवेज के 22 हजार कर्मचारियों का क्या होगा? आनन-फानन में विमान सेवा बंद होने के बाद टिकट खरीद चुके यात्रियों को भी समस्या झेलनी पड़ रही है। जेट के बंद होने से यात्रियों को अब महंगाई का सामना भी करना पड़ रहा है। स्वाभविक रूप से दूसरी विमानन कंपनी फायदा उठाने के चक्कर में है। 
बंद हो गई जेट एयरवेज के कर्मचारी संगठन ने सरकार से सवाल पूछा है कि वो कब 22 हजार कर्मचारियों की मदद करेंगे? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्तमंत्री अरुण जेटली को पत्र लिख कर कर्मचारी यूनियन ने जेट एयरवेज को फिर से शुरू करने की अपील की है। बैंक के द्वारा ऋण नहीं दिए जाने की इसे देश की ऐसी पहली घटना कही जा सकती है। दरअसल, विगत कुछ वषों में बैंक का एनपीए बड़ी तेजी से बढ़ा है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अब यह बढ़कर सात लाख तक पहुंच गया है। निजी कंपनियां बैंक से ऋण लेकर बैंक को गच्चा देती रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण नामी हीरा व्यापारी नीरव मोदी हैं। उन्होंने पंजाब नैशनल बैंक को करोड़ों रुपये का चुना लगाया है। अब वे देश छोड़कर भाग चुके हैं। इसी प्रकार कई कंपनियां बैंक से ऋण लेकर फरार हो चुकी है। बढ़ते एनपीए को देखते हुए बैंक ने जब कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई प्रारंभ की तो व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने आगाह किया था कि इससे देश में औद्योगीकरण की गति कमजोर पड़ जाएगी। बैंक अब कंपनियों को और ऋण देने में परहेज करने लगी है इसकी संभावना एक साल पहले व्यापारिक संगठनों ने व्यक्त कर दी थी और सरकार को चेतावनी दी थी कि यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित होगा। 
हालांकि बैंक के पास भी मजबूरी है। रिजर्व बैंक ने कई प्रकार के नियम-कानून लगा दिए हैं। यही नहीं बैंकों के सामने नकदी की भी समस्या खड़ी हो रही है। ऐसे में बैंक अब फूंक-फंूक कर कदम रख रही है। वैसे आज जेट एयरवेज को पूरी दुनिया जानती है। नरेश अग्रवाल एक प्रतिष्ठित एवं सफल व्यापारी हैं। उन्होंने 25 साल की मेहनत से जेट को खड़ा किया। ऐसे में बैंक को उनके साख पर प्रश्न नहीं खड़ा करना चाहिए था। इस मामले में बैंक के उपर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि बैंक उनसे तो पैसा वसूल नहीं कर पायी, जो घोटाला करके विदेश भाग गए लेकिन जो शख्स देश में मौजूद है और एक प्रतिष्ठित एयरलाइन का मालिक है उसको बैंक पैसा देने से मना कर रही है। अगर बैंक जेट एयरवेज को 400 करोड़ रुपये दे देते, तो फिर यह स्थिति नहीं होती जो आज है। 
वैसे इस मामले में केंद सरकार ने नियमों के तहत सभी तरह की मदद करने का आश्वासन  दिया है, ताकि कंपनी फिर से अपनी सेवाओं को चालू कर सके। नागर विमानन मंत्रालय ने कहा है कि इसके अलावा यात्रियों की भी हर तरह से मदद की जाएगी। मंत्रालय ने कहा है कि जिन यात्रियों ने पहले से जेट एयरवेज का टिकट बुक करा रखा है, उनको टिकट का रद्दीकरण, रिफंड या फिर दूसरी एयरलाइंस पर शिफ्ट करने के लिए डीजीसीए नजर बनाए हुए है। मंत्रालय ने कहा कि एसबीआई की अगुवाई में बैंकों के समूह ने जो निविदाएं मंगाई थी उनका सारा प्रोसेस 10 मई तक पूरा हो जाएगा। 
कुल मिलाकर देश की अर्थव्यवस्था के लिए यह ठीक नहीं है। इसे सरकार, बैंक और निजी क्षेत्र की कंपनियों को गंभीरता से लेना चाहिए। अगर ऐसा ही होता रहा तो एक-एक कर देश की कंपनियां दिवालिया होती चली जाएगी। याद रहे देश के आर्थिक विकास में सार्वजनिक कंपनियों के साथ ही साथ निजी कंपनियों की भी अपनी अहम भूमिका होती है। कोई भी निजी या फिर सार्वजनिक कंपनियां बिना सरकारी सहयोग से जीवित नहीं रह सकती। इस मामले में सरकार को आगे आना चाहिए और देशी कंपनियों को दिवालिया होने से बचाना चाहिए। बैंक को भी इस मामले में लचीला रुख अपनाना चाहिए।
 
 
 
 
 
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