माल्या पर कसता जा रहा है शिकंजा

By Independent Mail | Last Updated: Jan 7 2019 6:10PM
माल्या पर कसता जा रहा है शिकंजा

 

अब विजय माल्या अपनी संपत्ति नहीं बचा पाएगा। दरअसल, उसे विशेष प्रिवेंशन एंड मनी लॉन्ड्रिग एक्ट (पीएमएलए) अदालत ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया है। विजय माल्या को 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम-2018' के तहत भगोड़ा घोषित किया गया है। माल्या वह पहला आर्थिक अपराधी है, जिसे नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा बनाए गए इस सख्त कानून के तहत भगोड़ा घोषित किया गया है। इसके बाद माल्या की देश एवं विदेशों में मौजूद संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार जांच एजेंसियों को मिल गया है। ये एजेंसियां अगर चाहें, तो जब्त की गई संपत्तियों को बेच भी सकेंगी। इस तरह माल्या को दूसरा बड़ा झटका लग गया है। इससे पहले लंदन के एक न्यायालय ने उसे भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश दे दिया, जो ब्रिटेन सरकार के पास पहुंच चुका है। अगर माल्या ने ऊंची अदालत में अपील नहीं की, तो उसका भारत आना तय है। बहरहाल, इसमें कोई संदेह नहीं है कि माल्या के बाद भारत को लूटकर विदेश भाग गए अन्य अपराधी भी इस कानून की चपेट में शीघ्र ही आएंगे। माल्या पर कई आर्थिक अपराधों के मुकदमे चले रहे हैं। इनमें किंगफिशर एयरलाइंस के लिए बैंकों से लिए गए कर्ज को वापस न करना और इस कर्ज को दूसरे कार्यों में खर्च करने के मुकदमे भी शामिल हैं। इसके साथ हवाला के जरिये धन विदेश भेजने, कर वंचना, शेयरों की हेराफेरी जैसे गंभीर मामले भी उस पर चल रहे हैं। प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई एवं आयकर विभाग द्वारा माल्या के काले कारनामों की जांच की जा रही है। मार्च 2016 से वह लंदन में रह रहा है। हालांकि, लंदन में रहते हुए भी वह भारत में चल रहे मुकदमों की पैरवी कर रहा है। लेकिन अभी तक उसकी एक भी दलील को न्यायालय ने स्वीकार नहीं किया। माल्या सहित नीरव मोदी, मेहुल चोकसी आदि का मामला बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। अगर यह मामला राजनीतिक नहीं बनता, तो इसका समाधान हो सकता था। माल्या ने लंदन भागने से पहले भी बैंकों को उनका मूलधन वापस करने का प्रस्ताव दिया था। अगर उसे स्वीकर कर किश्त बना दी जाती, तो अभी तक काफी पैसा लौट चुका होता। बैंक डूबे हुए कर्ज की वसूली के लिए कर्जदारों के साथ मोलभाव करके मामला इसी तरह सेटल करते हैं। व्यवहारिकता तो इसी में है कि माल्या से रकम वापस ली जाए। यह तभी संभव हो सकता था, जब राजनीतिक की बजाय व्यावहारिक रुख अपनाया जाता। लेकिन अब यह असंभव है। माल्या ने पिछले साल के नवंबर माह में भी बैंकों का मूलधन वापस करने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन उसे भी स्वीकार नहीं किया गया। अगर सरकार उसके प्रस्ताव को स्वीकार करती, तो विपक्ष को उस पर हमला करने का मौका मिल जाता। ऐसे में अब कानूनी कार्रवाई का ही सहारा है। जब विजय माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर ही दिया गया है, तो जांच एजेंसियां उसकी संपत्तियों की जब्ती के प्रयास भी शीघ्र करें। बैंकों को हुए नुकसान की भरपाई का यही एकमात्र उपाय है। नीरव मोदी, मेहुल चोकसी और ललित मोदी जैसे आर्थिक अपराधियों पर भी शिकंजा कसा जाना चाहिए। हालांकि, ललित मोदी का मामला नीरव मोदी या विजय माल्या से अलग है। इन दोनों ने जहां बैंकों को चूना लगाया है, वहीं ललित मोदी पर आईपीएल क्रिकेट में दंद-फंद करने का आरोप है। लेकिन अंतत: ललित मोदी भी आर्थिक अपराधी ही है। देखना है कि 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम-2018' का वैसा ही फंदा तमाम भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर कब कसता है, जैसा माल्या पर कसा गया।

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