जी-20 में सुनी गई भारत की धमक

By Independent Mail | Last Updated: Dec 3 2018 11:26PM
जी-20 में सुनी गई भारत की धमक

अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में दुनिया के प्रमुख देशों जी-20 के सम्मेलन में भारत का प्रभाव साफ-साफ देखा गया। वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न केवल ध्यान से सुना गया, बल्कि उनकी बातों पर गौर भी किया गया। मोदी ने भी अपनी तरफ से यह संकेत देने में कोई कमी बाकी नहीं रहने दी कि अब भारत बदल गया है और दुनिया के ताकतवर देशों को उसे गंभीरता से लेना पड़ेगा। उन्होंने एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक की, तो दूसरी ओर जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे से भी वह मिले। चीन और रूस के राष्ट्रपतियों के साथ भी उनकी बैठक हुई। दुनिया की बड़ी ताकतों में गिने जाने वाले सभी चुनिंदा देशों के साथ बढ़ती साझेदारी भारत की सफलता को ही बयां करती है। मोदी ने अपने भाषण में संयुक्त राष्ट्र के साथ-साथ विश्व व्यापार संगठन में भी सुधार पर जोर दिया। यह इसलिए जरूरी था, क्योंकि अब मुक्त व्यापार के मामले में मनमानी होती दिख रही है और यह मनमानी अमेरिका कर रहा है। मोदी ने भगोड़े आर्थिक अपराधियों की नकेल कसने पर भी अपने भाषण में जोर दिया। इस जरूरत को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने न केवल जी-20 देशों के बीच सहयोग को जरूरी बताया, बल्कि इस संदर्भ में एक नौ सूत्रीय एजेंडा भी पेश किया। अब उम्मीद की जानी चाहिए कि इस एजेंडे पर बड़े देशों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र और साथ ही फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स भी गौर करेगी, ठीक वैसे ही, जैसे काले धन के कारोबार को नियंत्रित करने के भारत के सुझावों पर ध्यान दिया गया। जी-20 के देश इससे अनभिज्ञ नहीं हो सकते कि आर्थिक अपराध कर विदेश भागने वाले तत्वों से भारत के साथ दुनिया के सभी देश भी परेशान हैं। चिंता की बात यह है कि ऐसे तत्वों के पसंदीदा ठिकाने जी-20 के ही कई देश हैं। यह भी एक विडंबना है कि आतंकवाद की तरह आर्थिक अपराध की भी दुनिया अब तक कोई परिभाषा तय नहीं कर पाई है। आर्थिक अपराध की हर देश की अपनी अलग-अलग परिभाषा है। यही कारण है कि तमाम आर्थिक अपराधियों को दंडित करने में कठिनाई पैदा हो रही है। बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ब्यूनस आयर्स का दौरा केवल इसलिए ही उल्लेखनीय नहीं कि उन्होंने जी-20 के मंच से भारतीय कूटनीति को एक नई धार दी, बल्कि इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि वह वहां विभिन्न देशों के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करते दिखे। यह एक बड़ी उपलब्धि है कि चीन भारत से आयात बढ़ाने पर सहमत हुआ। इसके बाद उसके साथ भारत का व्यापार घाटा कम होने की उम्मीद बढ़ गई है। यह व्यापार घाटा लंबे समय से भारत को परेशान और चिंतित करता रहा है।अब जबकि चीन भारत की इस चिंता को दूर करने के लिए तैयार दिख रहा है, तो इसकी भी आशा की जा सकती है कि वह भारत की अन्य चिंताओं के प्रति भी संवेदनशीलता का परिचय देगा। भारत के लिए सबसे ज्यादा चिंता का विषय चीन का वह रवैया है, उसने पाकिस्तान के प्रति दिखाया है। पाकिस्तान के कब्जे वाले हमारे कश्मीर में वह कई तरह के निर्माण कार्य तो कर ही रहा है, आतंकवादियों को भी शह दे रहा है। जब मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई, तो निश्चित ही इस विषय पर भी दोनों में बात हुई होगी। हालांकि, चीन के मिजाज में कोई बदलाव आता है या नहीं, इसका पता तो बाद में चलेगा, लेकिन जिनपिंग को मोदी ने अपनी चिंताओं से अवगत कराया जो अच्छी बात है। इस तरह कहा जा सकता है कि जी-20 में भारत ने अपनी सभी क्षमताओं का इस्तेमाल देश के हक में किया। इसके लिए मोदी की तारीफ होनी चाहिए।

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