अब भी जिंदा हैं आतंकवाद के आका

By Independent Mail | Last Updated: Feb 27 2019 9:09PM
अब भी जिंदा हैं आतंकवाद के आका

भारत ने पुलवामा का बदला ले लिया। पुलवामा में 14 फरवरी को पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 44 जवान शहीद हो गए थे, जबकि लगभग इतने ही गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 11 दिन बाद 26 फरवरी को तड़के भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान स्थित जैश के आतंकी ठिकानों पर लगभग 1000 किलोग्राम के बम गिरा कर न सिर्फ आतंकी प्रशिक्षण शिविरों और ढांचे को तबाह कर दिया, बल्कि 200-300 के आसपास आतंकियों को भी मौत के घाट उतार दिया। मारे गए आतंकियों में जैश सरगना मसूद अजहर के साले युसूफ अजहर समेत कई आतंकी प्रशिक्षक भी शामिल हैं। ध्यान रहे कि पुलवामा पर आतंकी हमले के बाद खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सेना को खुली छूट दे दी गई है। इस जवाबी कार्रवाई से यही साबित होता है कि हमारा खुफिया तंत्र सटीक है और रक्षा तंत्र कारगर। मंगलवार को भारतीय वायुसेना की कार्रवाई के बाद विदेश सचिव विजय गोखले ने बेहद संयत और संतुलित टिप्पणी में कहा कि जैश द्वारा और नए आतंकी हमलों की साजिश की खुफिया सूचना मिलने के बाद भारतीय वायुसेना ने उन्हें नाकाम करने के मकसद से जैश के आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई को अंजाम दिया। यह अच्छी बात है कि हमने आतंकी हमलों की साजिश की भनक पाकर ही उसे नाकाम करने की सक्रिय पहल की, लेकिन उसके बाद सीमा पर जो तनाव है, अब उसे ठीक से नियंत्रित किया जाना चाहिए। दूसरी बात यह है कि पाकिस्तान में आतंकवाद के आका अब भी जिंदा हैं। हम से गलती यह हुई कि पिछले तीन दशकों में हम पाकिस्तान को यह संकेत नहीं दे पाए कि भारत कमजोर देश नहीं है। अगर दिया गया होता, तो पुलवामा जैसे हमले होते ही नहीं। जैसा कि खुद विदेश सचिव ने मंगलवार को मीडिया को ब्रीफ करते समय याद दिलाया कि वर्ष 2004 में पाकिस्तान ने द्विपक्षीय वार्ता में वचन दिया था कि वह भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों के लिए अपनी सरजमीं का इस्तेमाल नहीं होने देगा। फिर भारत को नापाक पाक की नीयत पहचान कर आत्मरक्षार्थ खुद पहल करने में डेढ़ दशक क्यों लग गया? यह सवाल अत्यंत महत्वपूर्ण इसलिए है कि पाकिस्तान का पूरा इतिहास ही विश्वासघात की अंतहीन दास्तान है। पाकिस्तान ने हर बार गले मिलते हुए पीठ में छुरा घोंपा है। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी दोस्ती का पैगाम लेकर बस यात्रा पर लाहौर गए थे, लेकिन बदले में कारगिल युद्ध मिला और जब कठोर माने जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अचानक तत्कालीन पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए वहां पहुंचकर पूरी दुनिया को चौंका दिया था, तब रिटर्न गिफ्ट के रूप में पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला हमें मिला था। पृथक राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आने के बाद से ही पाकिस्तान का एक सूत्रीय कार्यक्रम भारत में अस्थिरता, अराजकता, अलगाववाद और आतंकवाद फैलाना रहा है। अस्तित्व में आते ही पाकिस्तान की पहली कारगुजारी कश्मीर में घुसपैठ के रूप में सामने नहीं आयी थी। उसके बाद सबसे ज्यादा युद्ध हमें अपने इसी नापाक पड़ोसी से लड़ने पड़े। प्रत्यक्ष युद्धों में मात खाने के बाद पाकिस्तान लगातार भारत के विरुद्ध अलगाववाद और आतंकवाद के जरिये छद्म युद्ध छेड़े हुए है। इसके बावजूद अगर हमारे राजनेताओं को पाकिस्तान से बेहतर संबंधों की कोई भी संभावना नजर आती है, तो फिर हमें भविष्य में भी अनगिनत कारगिल, मुंबई, पठानकोट, उड़ी और पुलवामा के लिए खुद को अभिशप्त मान लेना चाहिए। बहरहाल, जैश के आतंकी ठिकानों पर भारतीय वायुसेना की कार्रवाई में कितने आतंकी मारे गए, इसका सही आंकड़ा शायद ही कभी पता चल पाएगा, लेकिन उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण यह तथ्य है कि आतंक के प्यादे ही मारे गये हैं, सूत्रधार अभी जिंदा हैं।

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