ठीक नहीं है खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की स्थिति

By Independent Mail | Last Updated: Nov 8 2018 7:37PM
ठीक नहीं है खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की स्थिति

अरब देशों में रहकर काम करने वाले भारतीयों द्वारा अपने घर भेजी गई कमाई की चर्चा प्राय: होती है, बताया जाता है कि वे कितना पैसा भारत भेजते हैं, लेकिन इस तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता कि वे वहां किन परिस्थितियों से जूझकर पैसा कमाते हैं। इस संबंध में दिवाली से पहले आरटीआई के जरिये जो सूचना सामने आई, वह इस पर्व की धूम में भले ही दब गई है, लेकिन उस पर चर्चा होनी चाहिए, क्योंकि वह सूचना झकझोरने वाली है। उस सूचना का विश्लेषण कर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि अरब देशों से भारत में आने वाले हर एक अरब डॉलर की एवज में औसतन 117 भारतीयों की जान चली जाती है। राष्ट्रमंडल देशों के मानवाधिकार संगठन सीएचआई ने बहरीन, ओमान, कतर, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में पिछले साढ़े छह वर्षों में हुई भारतीयों की मौतों और उनके द्वारा भेजी गई रकम के आंकड़े जुटाए और दोनों को साथ रखकर उनका गहन अध्ययन किया। इस अध्ययन के निष्कर्ष बहुत चिंताजनक हैं। इन छह देशों से सबसे ज्यादा रकम भारत भेजी जाती है। दुनिया भर में फैले भारतीय मूल के लोगों की संख्या तीन करोड़ से भी ज्यादा है, जिनमें से करीब 90 लाख खाड़ी देशों में रहते हैं। सन 2012 से 2017 के बीच पूरी दुनिया से आई राशि का आधे से भी ज्यादा हिस्सा इन्हीं छह देशों से भारत आया। इन पांच वर्षों में पूरी दुनिया से 410.33 अरब डॉलर की रकम भारतीयों ने स्वदेश भेजी, जिसमें से 209.07 अरब डॉलर इन खाड़ी देशों से भेजे गए। मगर इसी अवधि में इन छह देशों में 24,570 भारतीय कामगारों की मौत भी हुई। यानी, इन देशों में हर दिन औसतन 10 भारतीय दुर्घटनाओं में या औचक बीमारियों से मरते रहे। इनमें से ज्यादातर भारतीयों की मौतें स्वाभाविक नहीं थीं। रिपोर्ट में बताया गया है कि खाड़ी देशों में भारतीय कामगारों को बेहद कठिन और अपमानजनक स्थितियों में काम करना पड़ता है। रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात में 2017 में 339 भारतीय कामगारों की मौत हुई, जिनमें से 65 फीसद 45 वर्ष से कम उम्र के थे। ज्यादातर मौतें लू लगने या दिल का दौरा पड़ने से हुई थीं। आज के दौर में जब हम पूरी दुनिया में भारत का डंका बजने और भारतीयों की इज्जत बढ़ जाने की बात करते हैं, तब अपनी मेहनत से दो देशों के विकास को गति देने वाले भारतीय इस तरह बेमौत मारे जाएं, यह बात किसी भी स्थिति में गले उतरने लायक नहीं है। सच है कि खाड़ी देशों का रुख करने वाले ज्यादातर भारतीय मेहनत-मजदूरी करने वाले लोग होते हैं। वहां काम-काज का वैसा माहौल उन्हें नहीं मिल सकता, जैसा डॉक्टर-इंजीनियर या कुशल श्रमिकों को मिलता है। लेकिन अंतत: वे भारत के नागरिक हैं और हमारे लिए उनका जीवन बेशकीमती है। यह बात पूरी दुनिया को समझाने की पहली जिम्मेदारी हमारी सरकार की है कि देश के लिए एक-भारतीय की जान कीमती है। उसे ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों काे गरिमापूर्ण जीवन बिताने का अधिकार मिले। चिंता की बात यह है कि इस रिपोर्ट पर देश में चर्चा तक नहीं हुई। जो लोग पैसा कमाकर भेजते हैं, उनकी मौत पर असंवेदना ठीक नहीं है। केंद्र सरकार इस रिपोर्ट का गहन विश्लेषण करे और खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा, उनके मानवाधिकार सुरक्षित करे।

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