तृणमूल के दुस्साहस को हतोत्साहित करना जरूरी

By Independent Mail | Last Updated: Apr 18 2019 8:48PM
तृणमूल के दुस्साहस को हतोत्साहित करना जरूरी

लोकसभा चुनाव को प्रभावित करने के लिए राजनीतिक पार्टियां नित नवीन हथकंडे अपना रही हैं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने तो अति कर दी। इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने अपनी पार्टी के प्रचार के लिए बांग्लादेशी अभिनेता फिरदौस अहमद  का उपयोग किया है। इसे देश की संप्रभुता के साथ जोड़कर देखा जाना चाहिए। हालांकि बांग्लादेश भारत का मित्र राष्ट्र है, लेकिन चुनाव में दूसरे देश का हस्तक्षेप किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। इस मामले को लेकन चुनाव आयोग और भारतीय प्रशासन ने संज्ञान लिया है। आनन-फानन में बांग्लादेशी अभिनेता को देश छोड़ने के लिए कह दिया गया है, लेकिन बांग्लादेशी अभिनेता के साथ ही साथ इस मामले में तृणमूल कांग्रेस और उसके उम्मीदवार बराबर के दोषी हैं। कायदे से उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। सच पूछिए तो संसदीय चुनाव भारत की सरकार को संचालित करने वाली संस्था की चयन प्रक्रिया  है। इसी प्रकार के एक मामले में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुरी तरह फंसे हुए हैं। उनके ऊपर आरोप है कि उन्होंने विदेशी शक्ति के सहयोग से राष्ट्रपति का चुनाव जीता है। इस मामले की जांच अमेरिका की सबसे ताकतवर गुप्तचर संस्था कर रही है। कुछ ऐसे तथ्य प्रकाश में आए हैं, जिससे ट्रंप की परेशानी बढ़ती जा रही है। यही नहीं ऑस्ट्रेलिया में भी इसी प्रकार के आरोप लगे हैं और वहां भी जांच चल रही है। दुनिया के कई अन्य देशों में तो अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव को प्रभावित करने का आरोप लगा है लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी के उम्मीदवार ने तो खुल्लम-खुल्ला भारतीय चुनाव को प्रभावित करने के लिए विदेशी ताकत का सहयोग लिया है। इसे देशद्रोह की संज्ञा दी जाए या नहीं इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। यदि इसे सामान्य घटना मानकर हल्की कार्रवाई की जाएगी तो कल पंजाब में पाकिस्तानी, तमिलनाडु में श्रीलंकाई, उत्तर भारत के राज्यों में चीनी प्रभाव के उपयोग को नकारा नहीं जा सकता है। गुप्तचर संस्थाओं का अनुमान है कि भविष्य में चीन पूर्वोत्तर के राज्यों में आंतरिक रूप से चुनाव को प्रभावित करने की साजिश कर सकता है। यदि पश्चिम बंगाल की घटना को सामान्य ढंग से लिया गया तो यह आने वाले समय में देश की संप्रभुता को भी चुनौती दे सकता है। इसीलिए भारत सरकार और खासकर चुनाव आयोग को इस मामले में गंभीरता दिखानी चाहिए और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं से जवाब मांगना चाहिए।  दूसरी बात यह है कि देश की प्रतिपक्षी पार्टियां, सत्तारूढ़ दल, भारतीय जनता पार्टी पर विभिन्न हथकंडों के माध्यम से चुनाव को प्रभावित करने का आरोप लगाती रही है। अब तो साफ हो गया है कि तृणमूल प्रत्यक्ष रूप से विदेशी शक्तियों का उपयोग कर चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। ऐसे में अन्य राजनीतिक दलों को भी तृणमूल के खिलाफ मोर्चा खोलना चाहिए और चुनाव आयोग से मांग करनी चाहिए कि वह इस पार्टी के खिलाफ कड़ी से कड़ी  कार्रवाई करे। तृणमूल कांग्रेस के ऊपर चुनाव आयोग ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। विदेश मंत्रालय ने फिरदौस का बिजनेस वीसा रद्द कर  अविलंब देश छोड़ने को कहा  है। यह नाकाफी है। इस कार्रवाई को सतही कार्रवाई कहा जाएगा। यदि कोई विदेशी नागरिक भारत के चुनाव को अपने प्रभाव से प्रभावित कर रहा है तो उसकी मानसिकता के बारे में हमारी एजेंसियों को जानने का अधिकार है। इसके लिए उस अभिनेता पर भी कार्रवाई  होनी चाहिए थी। हालांकि इससे बांग्लादेश के साथ संबंध खराब होने का खतरा है, लेकिन फिरदौस से पूछताछ की जानी चाहिए।  

image
Copyrights @ 2017 Independent NewsCorp (P) Ltd., Bhopal. All Right Reserved