पाकिस्तान की हरकत अनुमान के मुताबिक

By Independent Mail | Last Updated: Feb 28 2019 10:03PM
पाकिस्तान की हरकत अनुमान के मुताबिक

पाकिस्तान में मौजूद कुछ आतंकी ठिकानों पर भारतीय वायुसेना की बमबारी के दूसरे दिन पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय हमारी सीमा में अपने लड़ाकू विमान भेज दिए, जिसका भारत ने कड़ा जवाब दिया। हमारा एक पायलट भी पाकिस्तान के कब्जे में है। इसके कारण लगभग युद्ध जैसा माहौल है। पाकिस्तान सरकार की बौखलाहट इस कदर बढ़ गई कि प्रधानमंत्री इमरान खान ने बुधवार को नेशनल कमांड अथॉरिटी की बैठक बुला ली, जिसके पास पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का नियंत्रण, अभियान से जुड़े हुए कमांड, तैनाती, अनुसंधान, विकास, रोजगार, अभ्यास और नीति का जिम्मा है। संभव है, यह बैठक केवल भारत और दुनिया को डराने के लिए हो कि पाकिस्तान परमाणु बम का इस्तेमाल कर सकता है। परंपरागत युद्ध में वह भारत के सामने कहीं टिकता नहीं, लिहाजा यह भी मुमकिन है कि उसने अभी से परमाणु के विकल्प पर सोचना प्रारंभ कर दिया हो। यह रास्ता न सिर्फ पाकिस्तान और भारत के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बेहद खतरनाक है। भारत की नीति पहले परमाणु हथियारों का उपयोग न करने की है, तो जाहिर है कि परमाणु हमले का एजेंडा पाकिस्तान के ही पास होगा। कुछ अंतर्राष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि पाकिस्तान के पास भारत से ज्यादा परमाणु हथियार हैं, जिनमें बड़ी संख्या 'डर्टी बमों' की है। ये बम अत्यधिक खतरनाक रेडियोधर्मी पदार्थों से भरे प्रक्षेपास्त्र हैं, जिनके प्रयोग से लगभग 12 करोड़ लोग तत्काल प्रभावित हो सकते हैं। लिहाजा, वह युद्ध तत्काल टाला जाना चाहिए, जिसकी आशंका है। हालांकि, लग रहा है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय सक्रिय हो गया है। गुरुवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान आया है कि भारत और पाकिस्तान की तरफ से अच्छी खबर जल्द आ सकती है। इसका अर्थ यह लगाया जा रहा है कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान को बात जहां तक पहुंची है, वहीं समाप्त करने के लिए तैयार कर लिया है। चीन हालांकि यह बयान देता रहता है कि दोनों देशों को संयम से काम लेना चाहिए, लेकिन पर्दे के पीछे से वह भी सक्रिय होगा। इसमें कुछ गलत भी नहीं है। दुनिया का इतिहास इस बात का गवाह है कि ऐसे दो देशों के बीच सीधी जंग कभी नहीं होती, जिनके पास परमाणु हथियार होते हैं। जब तक सोवियत संघ रहा, उसकी अमेरिका से बिल्कुल भी पटरी नहीं बैठी। दोनों देशों ने एक-दूसरे को तमाम मोर्चों पर नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वियतनाम जैसे छोटे से देश ने अगर अमेरिका को हरा दिया था, तो उसके पीछे सोवियत संघ की ही ताकत थी। इसके विपरीत, अमेरिका ने सोवियत संघ को अफगानिस्तान से निकल भागने के लिए मजबूर कर दिया था। इसके बावजूद ये दोनों देश सामने-सामने की जंग में कभी नहीं उतरे। आज भी रूस और अमेरिका एक-दूसरे के कट्टर विरोधी हैं। रूस की वजह से अमेरिका ईरान पर हमला करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है, तो अमेरिका के कोप के बावजूद सीरिया में बशर अल असद की सरकार अब भी कायम है, केवल और केवल रूस के कारण। लेकिन ये दोनों देश आपस में सीधी लड़ाई कभी नहीं लड़ेंगे। चीन और भारत के बीच कभी सीधी लड़ाई नहीं हो सकती। वह परमाणु बम ही है, जिसके कारण उत्तर कोरिया जैसे पिद्दी से देश से अमेरिका को बात करनी पड़ रही है। अगर परमाणु बम पाकिस्तान जैसे गैर-जिम्मेदार हाथों में हो, तो वह और भी खतरनाक होता है। ऐसे में युद्ध का समर्थन कोई नहीं कर सकता।

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