यूएस-चीन व्यापार युद्ध में सतर्कता जरूरी

By Independent Mail | Last Updated: May 11 2019 8:13AM
यूएस-चीन व्यापार युद्ध में सतर्कता जरूरी

संयुक्त राज्य अमेरिका और पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के बीच छिड़े व्यापार युद्ध का प्रभाव अब भारत पर भी दिखने लगा है। आर्थिक मामलों के जानकारों की मानें तो इन दिनों भारत के प्रतिभूति बाजार में जो भयानक उठा-पटक देखने को मिल रही है, वह इन्हीं दो महा शक्तिशाली देशों के बीच छिड़े व्यापार युद्ध का प्रतिफल है। वैसे कुछ प्रेक्षक मानते हैं कि बाजार के हालिया हालात क्षणिक हैं। चुनाव परिणाम के बाद बाजार में स्थायित्व आने की पूरी संभावना है। परिणाम चाहे जो हों, लेकिन जिस यूएस-चीन व्यापार युद्ध फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है। इसके तात्कालिक और दूरगामी प्रभाव पड़ेंगे। चूकि भारत की अर्थव्यवस्था कई मायनों में इन दो देशों के ईद-गिर्द घुमती रही है, इसलिए भारत पर इस युद्ध का प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। चीन स्वदेशी चिंतन का देश है। चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को बेहद प्रभावशाली तरीके से खड़ा किया है। नि:संदेह चीन की अर्थव्यवस्था को खड़ा करने में अमेरिका भी बड़ी भूमिका है, लेकिन अब अमेरिका को लग रहा है कि अगर चीन इसी प्रकार बढ़ता रहा तो एक दिन अमेरिका की आर्थिक दादागीरी पर चीन लगाम लगा देगा। चूंकि अमेरिका लंबे समय से दुनिया की अर्थव्यवस्था को अपने ढंग से चला रहा है, इसलिए उसे यह बात हजम नहीं हो पा रही है। इधर अमेरिका का पारंपरिक दुश्मन रूस राष्ट्रपति पुतिन के नेतृत्व में एक बार फिर से मजबूत होकर उठा है। उसने दुनियाभर में फैले अपने पुराने जासूसों को संगठित कर लिया है। तकनीक की दृष्टि से वह पहले से मजबूत है। अब वह आर्थिक दृष्टि से अपने आप को खड़ा कर रहा है। इस मामले में चीन का उसे साथ मिल रहा है। जब चीन को खड़ा होना था तो उसने अमेरिका का साथ लिया और रूस को किनारे ढकेल दिया और अब वह अमेरिका को किनारे लगाने के फिराक में है। इधर अमेरिका संरक्षणवाद की रणनीति पर काम करने लगा है। अमपनी-कंपनियों को साफ तौर पर कह दिया है कि अगर वह स्वदेशी चिंतन को नहीं मानेगा तो उसके खिलाफ अमेरिका में कार्रवाई की जाएगी। जानकारी में रहे कि अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियां चीन से अपना सामान बनवाकर दुनिया के बाजार में बेच रही है। इसी पर चीन की अर्थव्यवस्था मजबूत है। अगर अमेरिका इसी नीति पर चलता रहा तो आने वाले समय में चीन की अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा। इसीलिए अमेरिका लगातार चीनी सामानों पर ड्यूटी बढ़ता जा रहा है। इसे संरक्षणवाद बहते हैं। इस संरक्षणवाद की रणनीति के कारण अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध छिड़ गया है। कई व्याख्याकार इसे शीत युद्ध की तरह ही देख रहे हैं। चूकि इस युद्ध में कहीं न कहीं रूस भी शामिल है, इसलिए यह युद्ध रोचक हो गया है। अमेरिका, चीन और रूस, इन तीनों के साथ भारत के व्यापारिक रिश्ते हैं। देश का अधिकतर व्यापार इन्हीं तीन देशों में होता है। वैसे अमेरिका की वर्तमान डोनाल्ड ट्रंप की सरकार चीन ही की तरह भारत को भी अपना व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी मानता है, लेकिन ट्रंप प्रशासन भारत के प्रति थोड़ा लिवरल है लेकिन चीन-अमेरिका व्यापार युद्ध का प्रभाव भारत पर पड़ना स्वाभाविक है। इस युद्ध से अंततोगत्वा भारत को फायदा होगा या नुकसान कहना कठिन है लेकिन इस युद्ध के कारण भारत का निवेश और पूंजी बाजार प्रभावित जरूर होगा। चीनी निवेश में कमी आएगी और अमेरिकी कंपनियां भी यहां आधारभूत संरचना खड़ी करने की स्थिति में नहीं होगा। इसका असर भारत के प्रतिभूति बाजार पर पड़ता दिख रहा है।  

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