प्रदूषण को गंभीरता से न लेना खतरनाक

By Independent Mail | Last Updated: Mar 7 2019 12:57AM
प्रदूषण को गंभीरता से न लेना खतरनाक

हमारे देश में पर्यावरण का हाल कितना खराब है, इसका पता इससे चलता है कि दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में सात भारत के हैं। यह खबर डराती है और परेशान भी करती है। डराती इसलिए है कि कहीं न कहीं हमने प्रदूषण को अब अपनी नियति मान लिया है। लेकिन इस खबर पर परेशान होने के कारण अनेक हैं। प्रदूषण की खबर आने के बाद आम प्रतिक्रिया यही थी कि इसमें नया क्या है। इस प्रतिक्रिया का अर्थ यह है कि हमने प्रदूषण के सामने अपने हथियार डाल दिए हैं और फिलहाल इस समस्या का हमारे पर ऐसा कोई समाधान नहीं है, जिससे उम्मीद बंधे कि हम प्रदूषण से लड़ पाएंगे। जबकि यह चिंता की बात है कि प्रदूषण हमारे नागरिकों को बीमारियां बांट रहा है, कुछ की तो जान भी ले रहा है, लेकिन इससे भी कहीं बड़ी चिंता की बात यह है कि बीमार होने और मरने वालों के आंकड़े हर साल नियमित तौर पर आते हैं, लेकिन फिलहाल तो ये सारी चीजें हमें समाधान खोजने के लिए मजबूर करती नहीं दिख रही हैं। अब एक नजर डालते हैं, प्रदूषित शहरों की इस फेहरिस्त में उभरे भूगोल पर। दुनिया के छह सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में जो पांच भारतीय शहर हैं, वे दिल्ली के आस-पास के शहर हैं-गुड़गांव, गाजियाबाद, फरीदाबाद, नोएडा और भिवाड़ी। प्रदूषण के साथ ही यह इलाका देश में आबादी, उसके घनत्व और सड़कों की भीड़ का सबसे बड़ा केंद्र है। दिलचस्प बात यह है कि दक्षिण और पश्चिम के वे शहर इस फेहरिस्त में नहीं हैं, जहां पिछले कुछ समय में औद्योगिक विकास सबसे ज्यादा हुआ है। 10 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में लखनऊ और पटना के नामों का शामिल होना भी यही बताता है कि शहरों का प्रदूषण सिर्फ औद्योगिक विकास का मामला नहीं है। इस पर एक गहन अध्ययन की जरूरत है कि ये शहर ज्यादा क्यों प्रदूषित हो रहे हैं, अपनी आबादी के घनत्व की वजह से, बढ़ती गाड़ियों की वजह से, सड़कों के ट्रैफिक जाम की वजह से या फिर निर्माण कार्यों से उड़ती धूल के कारण। इस फेहरिस्त में तीसरे नंबर पर जो शहर है, उस पर भी ध्यान देना जरूरी है। वह है पाकिस्तान का फैसलाबाद। औद्योगिक विकास के मामले में इस शहर को गुड़गांव या नोएडा जैसा नहीं माना जा सकता, लेकिन प्रदूषण के मामले में यह उनको टक्कर दे रहा है। लाहौर समेत पाकिस्तान के दो शहरों का इस सूची में होना बताता है कि दोनों देशों की कुछ समस्याएं समान हैं। बहरहाल, शीर्ष 10 प्रदूषित शहरों की सूची में चीन का भी एक शहर है। लेकिन यह चीन की राजधानी बीजिंग नहीं है, जो आबादी के घनत्व और ट्रैफिक के मामले में किसी से पीछे नहीं है। न ही वह चीन का पुराना औद्योगिक शहर शंघाई है। इनमें शेंझान और गंगझोऊ जैसे वे नगर भी नहीं हैं, जिन्होंने चीन को दुनिया की आर्थिक महाशक्ति बना दिया। इस सूची में चीन का जो शहर है, वह है वहां के सबसे पिछड़े प्रांत झिनझियांग का होटन। चीन का उदाहरण यहां इसलिए जरूरी है कि कभी प्रदूषित शहरों की कोई भी फेहरिस्त उसके इन शहरों के बिना अधूरी रहती थी। लेकिन उसने इन्हें प्रदूषण से मुक्त कर लिया। जो काम चीन ने कर लिया, वह हम भी कर सकते हैं, बशर्ते राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया जाए। लेकिन चिंता की बात यह है कि प्रदूषण की समस्या शायद हमें गंभीर ही नहीं लगती।

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