सीबीआई को स्वायत्तता और पुलिस को सुधारों की जरूरत

By Independent Mail | Last Updated: Feb 6 2019 12:08AM
सीबीआई को स्वायत्तता और पुलिस को सुधारों की जरूरत

पश्चिम बंगाल में जो हंगामा चल रहा है, सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद भी उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह दरअसल राजनीतिक हंगामा है। इस दौरान भले ही सारदा और रोज वैली जैसी पोंजी योजनाओं के नाम पर हुए घोटालों की बात की जा रही है, देश की संघीय संरचना की बात भी की जा रही है। लेकिन दोनों ही पक्षों, केंद्र की नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार का मकसद केवल चुनावी है। वैसे भी इस पूरे घटनाक्रम को आगामी आम चुनाव से जोड़कर न देखा जाए, यह हो ही नहीं सकता। यह किसी से छिपा नहीं है कि पिछले कुछ सप्ताह से भाजपा और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के बीच रार गहराती जा रही थी। इस समय पश्चिम बंगाल कुछ उन राज्यों में से एक है, जिसके बारे में भाजपा को लगता है कि वह वहां एक बड़ी चुनावी जीत दर्ज करा सकती है। इसलिए उसने अपनी सक्रियता वहां तेजी से बढ़ाई है। दूसरी तरफ, ममता बनर्जी ने भी उसे कड़ी टक्कर देने की ठान रखी है। पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पश्चिम बंगाल में रथयात्रा की अनुमति नहीं दी गई। रविवार को जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभा को संबोधित करने पश्चिम बंगाल पहुंचे, तो उनके हेलीकॉप्टर को वहां उतरने नहीं दिया गया। उसी शाम को सीबीआर्ई के 40 अधिकारी कोलकाता के पुलिस कमिश्नर के घर सारदा घोटाले के बारे में पूछताछ करने के लिए जा पहुंचे। नहीं कहा जा सकता कि योगी आदित्यनाथ के हेलीकॉप्टर को उतरने की इजाजत न मिलना और सीबीआई के अधिकारियों को पुलिस कमिश्नर के घर पहुंचना, दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए मामले हैं या नहीं, लेकिन जिस तरह की राजनीति हो रही है, उसमें इन्हें जोड़कर देखा ही जाना चाहिए। इसके बाद सीबीआई अधिकारियों को पुलिस द्वारा पकड़ लिया जाना। फिर कोलकाता के सीबीआई कार्यालय को पुलिस द्वारा घेर लिया जाना, अंत में केंद्रीय सुरक्षा बलों का सीबीआई मुख्यालय पहुंचना, यह सब ऐसा घटनाक्रम था, जिसने दोनों ही दलों को अपनी-अपनी राजनीति साधने का पर्याप्त मौका उपलब्ध करा दिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तुरंत धरने पर बैठ गईं। सारे विपक्षी दल उनके समर्थन में आ गए। भाजपा नेताओं के तरकश में भी बहुत से तीर आ गए। खुद प्रधानमंत्री ने अपनी जनसभाओं में ममता बनर्जी पर हमले करने शुरू कर दिए। शायद भाजपा ने सोचा होगा कि वह केंद्रीय बजट पर चर्चा से आम चुनाव अभियान की शुरुआत करेगी, लेकिन अब इस अभियान का मुख्य मुद्दा पश्चिम बंगाल का घटनाक्रम है। अब इस पूरी राजनीति को हम अलग नजरिये से देखने की कोशिश करते हैं। हम कल्पना करें कि देश में पुलिस सुधार लागू हो चुके हैं और सीबीआई को स्वायत्त कर दिया गया है, तो तस्वीर कैसी होती? उस समय यह होता कि सीबीआई कोलकाता जाती ही नहीं। उसे वहां जाने का निर्देश मिलता, तो वह कह देती कि चूंकि कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को हाईकोर्ट से 12 फरवरी तक के लिए किसी भी पूछताछ में शामिल होने से राहत मिली हुई है, इसलिए उससे पहले वहां जाना अदालत की अवमानना होगी। अगर पुलिस सुधार लागू हो चुके होते, तो कोलकाता पुलिस सीबीआई के अफसरों को गिरफ्तार करने का राज्य सरकार का आदेश मानने से इंकार कर देती। ये दोनों ही तस्वीरें कितनी खूबसूरत होतीं, हम इसकी मात्र कल्पना ही कर सकते हैं। इसलिए इस मसले पर जो राजनीति हो रही है, उसमें जनता को नहीं उलझना चाहिए। हमें अपने नेताओं पर सीबीआई की स्वायत्तता और पुलिस सुधारों के लिए दबाव बनाना चाहिए।

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