तार्किक परिणिति तक पहुंचे अगस्ता प्रकरण

By Independent Mail | Last Updated: Dec 6 2018 10:57PM
तार्किक परिणिति तक पहुंचे अगस्ता प्रकरण

अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीद में हुए कथित घोटाले के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को दुबई से भारत लाया जाना केंद्र सरकार की एक बड़ी कामयाबी है। हालांकि, यह सौदा भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था, लेकिन उससे जुड़े हुए सवाल ज्यों के त्यों प्रासंगिक हैं। फिलहाल मिशेल सीबीआई की हिरासत में है और उम्मीद की जा रही है कि वह तमाम राज खोल सकता है। यह एक ऐसा मामला है, जिसका देश की राजनीति पर भी असर पड़ेगा। अगर बहुत असर नहीं पड़ेगा, तो भी राफेल सौदे में भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रही केंद्र सरकार को कुछ तो राहत मिलेगी। चूंकि हेलीकॉप्टर सौदा संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के कार्यकाल में हुआ था, इसलिए राफेल पर कांग्रेस के तेवर कमजोर पड़ेंगे। तथ्य यह भी है कि यह सौदा भले ही रद्द कर दिया गया हो, लेकिन इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि इस मामले में वायुसेना के पूर्व प्रमुख एसपी त्यागी को गिरफ्तार किया गया था, जो कानूनी प्रक्रिया का सामना अब भी कर रहे हैं। फिलहाल यह कहना कठिन है कि क्रिश्चियन मिशेल से इस घोटाले के राज किस तरह सामने आएंगे और उनके जरिये किसी को दंड का भागीदार बनाया जा सकेगा या नहीं, लेकिन जांच एजेंसियों के लिए बेहतर यही होगा कि वे मामले की तह तक पहुंचकर दूध का दूध और पानी का पानी करने में कोई कसर न उठा रखें। यह काम यथाशीघ्र होना चाहिए, क्योंकि अपने देश में बड़े घपले-घोटाले की जांच में जरूरत से ज्यादा समय लगता है। घोटालों को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तो खूब होता है, लेकिन सच सामने नहीं आता। इसके साथ ही साथ मोदी सरकार अगर राफेल सौदे की जांच कराने का ऐलान भी कर दे, तो उसकी चमक बढ़ जाएगी। अभी तो बहुत सारे लोग यही मानकर चल रहे हैं कि क्रिश्चियन मिशेल को लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इसीलिए भारत लाया गया है, ताकि उसके जरिये राफेल की आंच को कम किया जा सके। गौरतलब है कि ब्रिटिश-इतावली कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड के साथ हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए 2010 में हुआ यह करार लगातार चर्चा में रहा था। तत्कालीन सरकार ने फरवरी 2010 में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सरीखे अतिविशिष्ट लोगों के उपयोग के लिए 12 अगस्ता वेस्टलैंड एडब्ल्यू 101 हेलीकॉप्टर भारतीय वायुसेना के लिए खरीदने का फैसला लिया और 3600 करोड़ रुपये की डील फाइनल हुई थी। लेकिन फरवरी 2013 में इस डील में एक बिचौलिए को पैसा खिलाने के आरोप में अगस्ता वेस्टलैंड के सीईओ ब्रूनो स्पागनोलिनी की गिरफ्तारी की खबरों के बाद मामला अचानक चर्चा में आया और सरकार ने सौदे को स्थगित रखने का फैसला किया। मिशेल का नाम सामने आते ही वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की यह डील रद्द कर दी गई और सरकार ने अपना पूरा पैसा भी वापस ले लिया। माना जाता है कि इस डील के लिए कंपनी ने मिशेल को करीब साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये दिए थे, जो भारतीय राजनेताओं, रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और नौकरशाहों को रिश्वत के रूप में दी जानी थी। संयुक्त अरब अमीरात ने फरवरी 2017 में मिशेल को गिरफ्तार किया, जिसके बाद से ही उसके भारत प्रत्यर्पण की कोशिशें जारी थीं। यह बात अलग है कि सफलता अब मिली है। जाहिर है कि इस मुद्दे पर अब राजनीति होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इसकी शुरुआत कर दी है। देश की नजर इस पर रहनी चाहिए कि इस मुद्दे पर केवल राजनीति ही न हो। जब भ्रष्टाचार के मुद्दों पर राजनीति होने लगती है, तो उनका बहुत बुरा हश्र होता है। इसके बोफोर्स जैसे कई उदाहरण हमारे सामने हैं।

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