को-लिविंग क्षेत्र में उभर रहा है भारत: प्रोपटाइगर

By Independent Mail | Last Updated: Feb 11 2019 1:52PM
को-लिविंग क्षेत्र में उभर रहा है भारत: प्रोपटाइगर

एजेंसी, नई दिल्ली। पिछले कुछ साल के दौरान को-वर्किंग क्षेत्र में अच्छी वृद्धि के बाद अब देश में को-लिविंग क्षेत्र उभरने लगा है। एक रिपोर्ट के अनुसार विद्यार्थियों तथा पेशेवरों की बढ़ती मांग से को-लिविंग क्षेत्र में सालाना 93 अरब डॉलर का बाजार बनने की क्षमता है। को-लिविंग आवास का एक ऐसा आधुनिक रूप है, जहां लोग रहने के स्थान को आपस में साझा करते हैं। न्यूज कॉर्प और सॉफ्टबैंक समर्थित रीयल्टी पोर्टल प्रोपटाइगर ने को-लिविंग क्षेत्र को रीयल इस्टेट के लिए सोने का खदान करार दिया है। पोर्टल ने एक रिपोर्ट में कहा कि तथ्यों से यह स्पष्ट है कि को-लिविंग क्षेत्र में अभी संगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी महज एक लाख बिस्तरों तक सीमित है। यदि यह मानें कि वे सालाना प्रति बिस्तर 1.44 लाख रुपये कमा रहे हैं, तो इस को-लिविंग में संगठित क्षेत्र अभी 20.6 करोड़ डॉलर का है। उसने कहा कि यदि मांग और आपूर्ति की खाई को पाट दिया जाए, तो यह क्षेत्र 93 अरब डॉलर का बाजार बन सकता है।

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