हवाई जहाज के किराए मे 100 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी

By Independent Mail | Last Updated: Mar 15 2019 6:49AM
हवाई जहाज के किराए मे 100 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी

एजेंसी, मुंबई। इथयोपिया में हादसे के बाद सरकार द्वारा बोइंग-737 मैक्स विमान के परिचालन पर रोक लगाने के बाद गुरुवार को हवाई जहाजों के किराए में सौ फीसद से भी ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हमारे देश में विमानन कंपनी स्पाइस जेट के पास 12, जबकि जेट एयरवेज के पास पांच बोइंग-737 विमान हैं। इनके अलावा गोएयर और इंडिगो के पास भी ये विमान हैं। इनका परिचालन रोके जाने से स्पाइसजेट को बुधवार को 14 उड़ानों को रद्द करना पड़ा था, जबकि गुरुवार को इसकी संख्या 32 तक पहुंच गई। वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहे जेट एयरवेज के पहले से ही चार विमान परिचालन से बाहर हैं। ये विमान एयरपोर्टों और विमान मालिकों की बकाया राशि का भुगतान नहीं किए जाने के कारण परिचालन से बाहर हैं। स्पाइसजेट काे बुधवार को अपनी 18 उड़ानों को रद्द करना पड़ा था। गुरुवार को उसे 44 उड़ानों को रद्द करना पड़ा। विभिन्न विमानन कंपनियों के करीब 50 विमान कलपुर्जों आदि की कमी के कारण नहीं उड़ पा रहे हैं, इसलिए सीटों की संख्या कम हो गई है और हवाई किराया बढ़ गया है।

इन रूटों पर यात्रा ज्यादा महंगी

मुंबई-दिल्ली रूट पर मंगलवार को विमान किराया सात से 14 हजार रुपये प्रति सीट था, जो गुरुवार को 22 से 36 हजार रुपये हो गया।दिल्ली-लखनऊ रूट पर मंगलवार को तीन से सात हजार रुपये प्रति सीट किराया था, जबकि गुरुवार को यह आठ से 22 हजार रुपये प्रति सीट हो गया। गुरुवार को मुंबई-लखनऊ का किराया 28,660 रुपये से 47,114 रुपये प्रति सीट रहा, जबकि मंगलवार को यह 14 से 25 हजार के बीच था। इसी तरह मुंबई-जम्मू का किराया 16,323 रुपये से 26,817 रुपये रहा। मुंबई-पटना का किराया 34,494 रुपये से 62,964 रुपये के बीच रहा। दिल्ली-पटना का किराया 22,388 रुपये से 42,968 रुपये रहा। दिल्ली-देहरादून का किराया 7,554 रुपये से 12,028 रुपये रहा। दिल्ली-चंडीगढ़ का किराया 20 हजार से लेकर के 28 हजार रुपये के बीच रहा।

और बढ़ेगा किराया

विमानन कंपनी इक्सिगो के सीईओ और सह-संस्थापक आलोक बाजपेई ने बताया कि विभिन्न कारणों से परिचालन रुकने की वजह से विमानों का किराया आगे और बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि यात्रियों के अनुपात में सीटें बहुत कम हो गई हैं और इन सीटों की संख्या बहुत जल्दी नहीं बढ़ सकती। कंपनियों को उन विमानों का विकल्प खोजने में समय लगेगा जो परिचालन से बाहर हो गए हैं।

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