मध्य प्रदेश के केंद्रीय कारागारों को बनाया जाएगा सुरक्षित, जबलपुर से होगी शुरुआत

By Independent Mail | Last Updated: Mar 25 2019 6:53AM
मध्य प्रदेश के केंद्रीय कारागारों को बनाया जाएगा सुरक्षित, जबलपुर से होगी शुरुआत

इंडिपेंडेंटमेल, भोपाल। मध्य प्रदेश की जेलों की सुरक्षा को लांघ पाना अब कैदियों के लिए आसान नहीं होगा। अगर कोई कैदी जेल की दीवार को लांघने की कोशिश करेगा, तो उसे बिजली का झटका लगेगा। यह झटका इतना तेज होगा कि कैदी जमीन पर गिर जाएगा और वह कुछ देर तक तो खड़ा भी नहीं हो पाएगा। मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी सभी केंदीय जेलों की दीवारों पर अब इलेक्ट्रिक वायरिंग लगाने का फैसला ले लिया है। हालांकि, चुनाव आचार संहिता के कारण अभी इस फैसले की घोषणा नहीं की गई है। लेकिन सूत्रों ने बताया कि सरकार जेलों की सुरक्षा को पुख्ता करने की योजना पर काम कर रही है और यह कार्य जल्दी किया जाएगा। बताया जा रहा है कि जेल की दीवारों पर बिजली के जो तार लगाए जाएंगे, उनमें हर समय बिजली का करंट प्रवाहित रहेगा। यह करंट इतना ज्यादा होगा कि तार को छूने वाला उसे सह नहीं पाएगा। सबसे खास बात यह है कि करंट-रोधी सामग्री भी इस करंट को रोक नहीं पाएगी। प्लास्टिक के दस्ताने पहनकर भी अगर बिजली के तारों को छुआ जाएगा, तो दस्ताना जल जाएगा और छूने वाले को करंट लग जाएगा। सरकार इन तारों की निगरानी का कार्य कुशल इंजीनियरों को सौंपेगी। इसकी तैयारियों के लिए केंद्रीय कारागारों के अधीक्षकों को पत्र लिख दिया गया है।

जबलपुर जेल से होगी शुरुआत

सूत्रों ने बताया कि जेल की दीवारों पर बिजली के तार लगाने की शुरुआत जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय कारागार से होगी। 50 एकड़ मे फैली इस जेल की बाउॅन्ड्री वॉल में इलेक्ट्रिक वायर फेंसिंग का काम जल्द प्रारंभ होगा। इसकी लागत करीब 50 लाख रुपये बताई जा रही है। लोकसभा चुनाव समाप्त होते ही इस दिशा में काम प्रारंभ हो जाएगा। हालांकि, उससे पहले इतनी तैयारी कर ली जाएगी कि पूरा कार्य एक सप्ताह में पूर्ण हो जाएगा। जबलपुर केंद्रीय कारागार को इस काम के लिए सबसे पहले इसलिए चुना गया है कि उसमें कई खूंखार कैदी बंद हैं। मध्य प्रदेश में जबलपुर जेल ही एकमात्र ऐसी जेल है, जहां फांसी की सजा देने की व्यवस्था है।

समिति ने की थी सिफारिश

नेताजी सुभाषचंद्र बोस केन्द्रीय जेल के अधीक्षक ने बताया कि 2016 मे भोपाल केन्द्रीय जेल से सिमी के आतंकी भाग गए थे। इस घटना के बाद प्रदेश की सभी जेलों की सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट किया गया था। यह ऑडिट एक विशेष समिति बनाकर किया गया था। उसने जेलों मे इलेक्ट्रिक वायर फेंसिग का सुझाव दिया था। उसने यह भी कहा था कि जबलपुर जेल सबसे ज्यादा असुरक्षित है। बता दें कि इस जेल की क्षमता 2,200 कैदियों को रखने की है, लेकिन वर्तमान में इसमें 2,400 से कैदी बंद हैं।

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